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बड़ा तालाब में अतिक्रमण: निरीक्षण बार-बार, फिर भी बंटाधार

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  • अब हाइकोर्ट की फटकार के बाद जागी है उम्मीद, शनिवार को नगर आयुक्त और टीम ने किया दौरा

Ranchi : झारखंड हाइकोर्ट की फटकार के बाद रांची नगर निगम और जिला प्रशासन एक बार फिर बड़ा तालाब में हुए अतिक्रमण को लेकर रेस में है. बीते शनिवार को नगर आयुक्त के नेतृत्व में अधिकारियों की एक विशेष टीम ने तालाब का निरीक्षण किया.

हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है कि निगम और प्रशासन रेस में आया हो. रांची सांसद संजय सेठ, मेयर आशा लकड़ा और डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय सहित प्रशासनिक टीम पहले भी दो बार निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने का निर्देश दे चुके हैं.

इसमें तालाब किनारे धड़ल्ले से ट्रक लगाने, मांस-मुर्गा की दुकानों को बंद करने सहित कई निर्देश शामिल हैं. हकीकत यह है कि जनप्रतिनिधियों के निर्देश का न तो निगम स्तर पर कोई पालन हुआ है, न ही प्रशासन के स्तर पर. हालांकि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस बार उम्मीद की किरण दिखायी दी है.

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तालाब किनारे की वास्तविक स्थिति काफी है खराब, मुख्यमंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी


वर्तमान में खुले बड़ा तालाब के किनारे चारों ओर ट्रक लगे रहते हैं, जिससे यहां के सड़कें सिमट गयी हैं. व्यापारिक क्षेत्र के होने के कारण रोजाना यहां से वाहनों का आवागमन काफी अधिक होता है. ऐसे में अगर यहां कोई भी हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा, यह भी कहना मुश्किल है.

हाइकोर्ट के सख्त तेवर के पहले तालाब की सिकुड़ती स्थिति और गंदे पानी को देख मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी नाराजगी जता चुके हैं. स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर बीते 12 जनवरी को प्रतिमा के माल्यार्पण को पहुंचे हेमंत ने देखा था कि तालाब काफी सिकुड़ता जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि आखिर तालाब में दिख रहा गंदा पानी कहां से आ रहा है.

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दो बार निरीक्षण में दिये निर्देश आज तक अधूरे

बड़ा तालाब में अतिक्रमण: निरीक्षण बार-बार, फिर भी बंटाधार
बीते साल बड़ा तालाब की स्थिति का निरीक्षण करते सांसद संजय सेठ, तत्कालीन एसडीएम गरिमा सिंह. (फाइल फोटो).

सांसद संजय सेठ ने 2019 में दो बार (6 जून, 28 अगस्त) को तालाब का निरीक्षण किया था. दोनों ही बार उन्होंने तालाब के आसपास की विधि-व्यवस्था और तालाब के पानी को साफ करने के लिए कई निर्देंश अधिकारियों को दिये थे. पहले निरीक्षण में दिये निर्देशों में तालाब के आसपास हर शनिवार और रविवार को रात्रि बाजार लगाने, विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए टीओपी बनाने,  तालाब के किनारे चल रहे मांस व्यवसाय को बंद करने, तालाब किनारे लगने वाले ट्रकों पर रोक लगाने कराने सहित तालाब में गिर रहे सेवा सदन हॉस्पिटल के गंदे पानी को रोकने के लिए एक एसटीपी बनाने का निर्देश शामिल है. सभी निर्देश कभी भी पूरे नहीं हुआ.

अतिक्रमण की नापी के लिए बनायी गयी है टीम

एक बार फिर बीते शनिवार को नगर आयुक्त की टीम ने तालाब का निरीक्षण किया है. इस दौरान तालाब के क्षेत्र में कहां-कहां पर अतिक्रमण हुआ है, इसकी जांच के लिए अमीनों की टीम गठित की है. अगले तीन से चार दिनों में नापी का सारा काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है. यहां तक कि तालाब के चारों ओर लगनेवाली दुकानों को भी हटाने का निर्देश नगर आयुक्त ने दिया है.

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