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राजनीतिक मुद्दा बन कर रह गया ‘रोजगार’, युवाओं के धैर्य का बांध टूटा, करेंगे अगस्त क्रांति

AMIT JHA
RANCHI: 23 जून को सीएम हेमंत सोरेन ने एक ट्वीट किया था, रोजगार को लेकर. कहा था कि उन्होंने मुख्य सचिव, कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष एवं महाधिवक्ता के साथ बैठक की. विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को यथाशीघ्र भरने का निर्देश दिया है. साथ ही एक माह के अंदर नियुक्ति से संबंधित नियमावलियों में जितनी भी विसंगति हैं, उन्हें दूर कर विज्ञापन प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है ताकि राज्य के युवाओं को ज़्यादा से ज़्यादा अवसर मिले. विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरा जा सके. महीना पूरा होने को है. अब तक इसकी सुगबुगाहट नहीं दिखी है. मुख्य विपक्षी दल भाजपा के मुताबिक राज्य में रोजगार को महज राजनीति का विषय बनाकर रख दिया गया है. इस बीच अब युवा छात्र भी सड़कों पर धीरे धीरे उतरने लगे हैं. उनके धैर्य का बांध टूटने लगा है. वे 8 अगस्त को राज्यभर में अगस्त क्रांति के आयोजन में लग गये हैं.

नियुक्ति वर्ष का हाल

फरवरी में दुमका में सीएम ने घोषणा की थी कि यह साल नियुक्ति वर्ष होगा. खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां होंगी. पर कोरोना महामारी और नियमावली पेंच के फेर में अब तक ठोस पहल नहीं दिखी है. इस साल अब तक जेपीएससी (छठी) की प्रक्रिया को पूरा किया है. 326 पदाधिकारियों की नियुक्ति की है. जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई है. इसके अलावा सीधी नियुक्ति के तहत 40 खिलाड़ियों को नौकरी मिली है. इसके अलावे और उदाहरण नहीं दिखता.

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बेरोजगार सोशल मीडिया के जरिये नियुक्ति वर्ष का अंतिम संस्कार अभियान चला चुके हैं. ट्विटर पर झारखंडी युवा मांगे रोजगार हैशटैग खूब ट्रेंड हुआ था. 6 लाख से अधिक युवाओं ने इस पर ट्वीट किया था. इसके बाद जून के अंतिम सप्ताह में खुद सीएम ने सामने आकर घोषणा की थी कि अगले एक महीने में नियुक्ति से संबंधित नियमावलियों की विसंगतियों को दूर कल लिया जायेगा.

छले जा रहे युवाः भाजपा

पूर्व सीएम और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी लगातार कह रहे हैं कि झारखंड के युवा छले गए हैं. हेमंत सोरेन सरकार के नौकरियों के वादे, बेरोजगारी भत्ता सब के सब खोखले साबित हुए हैं. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष औऱ सांसद दीपक प्रकाश के मुताबिक इस सरकरा ने 5 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन 3 माह में भी रोड मैप तैयार नहीं किया. इस साल को नियुक्ति वर्ष कहा था पर 6 महीने बाद भी कोई नयी नियुक्ति नहीं हुई है. सरकार ने नियोजन नीति को रद्द कर लाखों युवाओं के सामने प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है. ग्रेजुएट को 5000 और पीजी को 7000 बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया. लेकिन आज तक एक को भी बेरोजगारी भत्ता प्राप्त नहीं हुआ है. सरकार रोजगार देने के प्रति गंभीर नहीं है. अगर होती तो सिर्फ मेरिट लिस्ट के प्रकाशन का इंतज़ार कर रहे पंचायत सचिव अभ्यर्थी, टीजीटी टीचर्स, ज़िला पुलिस आदि की सूची को जारी कर देती. नई नियुक्तियों के लिए तो नियोजन नीति बनाने हेतु मंत्रिमंडल समिति की घोषणा भी अभी तक नहीं हुई है.


अब अगस्त क्रांति से ही सहारा

जेपीएससी कैंडिडेट शफी इमाम के मुताबिक झारखंड में झूठ और लूट की राजनीति चल रही है. युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं. जेपीएससी समेत तमाम विभागों में भ्रष्टाचार व्याप्त है.
8 अगस्त एक एतिहासिक दिन है. इसी दिन 1942 को गांधी जी ने करो या मरो, अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा बुलंद किया था. झारखंड में भी लगभग वही स्थिति है. यहाँ भी आठ अगस्त को वादा पूरा करो, हेमंत सोरेन कुर्सी छोड़ो के नारा के साथ आन्दोलन किया जायेगा. हर जिला में एक साथ धरना-प्रदर्शन, पूतला दहन, नारेबाजी का कार्यक्रम होगा. उम्मीद है कि क्रांति की जोरदार गूंज सरकार तक पहुंचेगी.

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