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मुद्रा योजना से जुड़े रोजगार के आंकड़े अविश्वसनीय, मोदी सरकार ने दिये दोबारा जांच के आदेश

मुद्रा योजना से 3 सालों में 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोजगार के अवसर का आंकड़ें एक्सपर्ट की उम्मीद से काफी कम

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New Delhi: बेरोजगारी पर लगातार घिर रही केंद्र की मोदी सरकार रोजगार के आंकड़ों को लेकर दोबारा जांच करा रही है. सरकार की एक एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि वो उस आंकड़े की फिर से जांच करें, जिसके तहत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) में तीन सालों में 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करने का आकलन किया गया है.

अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ के मुताबिक सरकार को शक है कि रोजगार से संबंधित जो आंकड़े पेश किये गये हैं, वो सरकार की उम्मीद से कम है. ऐसे में बिना जांच किए केंद्र सरकार नौकरियों से जुड़े इस डेटा को जारी नहीं करेगी. उल्लेखनीय है कि बेरोजगारी के सवाल से बचने के लिए मोदी सरकार पीएमएमवाई के तहत दी गई जॉब्स का हवाला दिया था.

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उम्मीद से कम हैं आंकड़ें !

अखबार में छपी खबर के मुताबिक, इस साल 1 फरवरी तक मुद्रा योजना के तहत 7.59 लाख करोड़ की रकम के जरिए करीब 15 करोड़ 73 लाख लोन दिए गए.

लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद 1.12 करोड़ अतिरिक्त नौकरियां पैदा होने का आकलन उम्मीद से काफी कम है. विशेषज्ञों को इस बात का शक है कि बहुत सारे कामगारों ने कर्ज तो ले लिया, लेकिन इससे नए रोजगार के अवसर नहीं पैदा हुए.

ज्ञात हो कि हाल ही में एक टीवी न्यूज चैनल को दिये इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए कहा था कि कम से कम 4 करोड़ लोगों ने पहली बार कर्ज लिया है. पीएम ने संभावना जताई थी कि कर्ज लेने वाले लोगों ने कुछ रोजगार के अवसर जरूर पैदा किए होंगे, जिससे लोगों को रोजगार मिला होगा.

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मीडिया खबर के मुताबिक, अगर 4 करोड़ लोगों के कर्ज लेने का आंकड़ा सही है तो इससे यह संकेत मिलते हैं कि कर्ज लेने वाले कुछ लोग पहले से ही कहीं और नौकरी कर रहे थे.

लेकिन किसी भी हालत में अगर 16 करोड़ लोगों को कर्ज दिया गया है तो अतिरिक्त रोजगार पैदा होने का आदर्श आंकड़ा 1.12 करोड़ से ज्यादा होना चाहिए. अब अगर सरकार की ओर से आधिकारिक डेटा जारी किया जाता तो ही मामला साफ हो पायेगा.

लेबर ब्यूरो के सर्वे में 1.12 करोड़ नौकरी की कही गयी बात
बता दें कि सरकारी एजेंसी लेबर ब्यूरो ने एक राष्ट्रव्यापी सर्वे में 96000 लोगों से ली गई प्रतिक्रियाओं के आधार पर मुद्रा के जरिए 1.12 करोड़ अतिरिक्त नौकरियों का डेटा तैयार किया था.

ज्ञात हो कि लेबर ब्यूरो को मुद्रा योजना के लाभांवितों का सर्वे करने कहा गया था ताकि उनकी इसके तहत उत्पन्न हुई नौकरियों के बारे में पता लगाया जा सके. 9 महीने तक चली यह कवायद इस साल जनवरी में खत्म हुई.

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आंकड़ों की दोबारा जांच के आदेश

लेकिन आंकड़ों को लेकर विशेषज्ञ संशय में है. और एक एक्सपर्ट कमेटी ने लेबर ब्यूरो से इन आंकड़ों की दोबारा जांच करने के लिए कहा.

सूत्रों की मानें तो पैनल चाहता था कि यह काम जल्द से जल्द खत्म हो, लेकिन इसके लिए कोई समय नहीं निधार्रित किया गया है. कमेटी ने रिपोर्ट को जारी करने की मंजूरी नहीं दी. लेबर ब्यूरो अब इन आंकड़ों की दोबारा से जांच कर रहा है. समयसीमा नहीं होने के कारण ये साफ नहीं हो पाया है कि आंकड़े चुनाव से पहले जारी हो पाएंगे कि नहीं.

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