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एल्गार परिषद मामला : आठ के खिलाफ एनआईए ने दायर की चार्जशीट, माओवादी कहां से जुटाते हैं फंड, कहां से लाते हैं हथियार

सीपीआई-एम) को महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से सालाना लगभग तीन करोड़ रुपये का फंड मिलता है.

Mumbai : खबर है कि प्रतिबंधित माओवादी संगठन (सीपीआई-एम) को महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से सालाना लगभग तीन करोड़ रुपये का फंड मिलता है. इन फंड्स का इस्तेमाल सीपीआई-एम के सदस्य माओवादी गतिविधियों के लिए करते हैं.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एल्गार परिषद मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें यह आरोप दर्ज है. बता दें कि अपनी चार्जशीट में एनआईए ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन (सीपीआई-एम) को मिलने वाली फंडिंग, हथियारों के स्रोत तथा उनके संचार के नेटवर्क्स का विवरण दर्ज किया है.

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भीमा कोरेगांव केस में ये आरोपी हैं गिरफ्तार

आरोप पत्र में कहा गया है कि शहरी नक्सलियों में आरोपी अरुण फरेरा, सांस्कृतिक समूह कबीर कला मंच के सदस्य रमेश गाइचोर, सागर गोरखे और ज्योति जगताप, सुरेंद्र गडलिंग, वर्नोन गोंसाल्वेस, गौतम नवलखा, पी वरवारा राव, शोमा सेन, सुधा भारद्वाज, विल्सन, सुधीर धवले और महेश राउत गिरफ्तार हैं.

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  माओवादी सड़क ठेकेदारों से जंगल टैक्स भी वसूलते हैं

चार्जशीट में कहा गया है कि फंडिंग के कथित स्रोतों के बारे में जानकारी एक गवाह ने एनआईए को दी है कि सीपीआई (माओवादी) के सदस्य आदिवासियों और कॉन्ट्रैक्टर्स से टैक्स वसूलते हैं. बताया कि तेंदू पत्ते के प्रत्येक बैग पर उन्हें 350 रुपये का टैक्स (लेवी) माओवादियों को देना होता है. माओवादी सड़क ठेकेदारों से जंगल टैक्स भी वसूलते हैं. आदिवासी इलाकों के ग्रामीण अपनी कमाई का कुछ हिस्सा सालाना माओवादियों को दान करते हैं.

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सुरक्षाबलों से लूटते हैं हथियार

एक अन्य गवाह के अनुसार माओवादी बांस के कारोबारियों से भी टैक्स की वसूली करते हैं. कस्बाई इलाकों के दुकानदार भी सीपीआई (माओवादी) को फंड उपलब्ध कराते हैं. चार्जशीट में बताया गया है कि माओवादी सुरक्षाबलों द्वारा लूटे गये हथियारों और गोला-बारूदों का इस्तेमाल करते हैं. एक गवाह ने जानकारी दी कि इसके अलावा पार्टी के सदस्य अवैध खनन कारोबारियों से जिलेटिन खरीदते हैं और सोडा-सल्फर का कॉम्बिनेशन मिलाकर विस्फोटक तैयार करते हैं.

वॉकी-टॉकी या पत्र लिख कर करते हैं बात

इसके अलावा कैल्शियम-अमोनियम नाइट्रेट मिलाकर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के लिए वॉकी-टॉकी या पत्रों का इस्तेमाल किया जाता है.
मोबाइल का इस्तेमाल बात करने के लिए नहीं किया जाता. डेटा डाउनलोड करने या फिर इमेल्स अपलोड करने के लिए ही फोन का इस्तेमाल किया जाता है. चार्जशीट में कहा गया है कि कभी-कभार नक्सली संगठन बातचीत के लिए मिलिशिया के फोन्स का इस्तेमाल करते हैं.

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नकली नाम से एक-दूसरे को पुकारते हैं

माओवादी संगठन में सदस्य एक-दूसरे का असल नाम नहीं लेते हैं. हर किसी के लिए एक छद्म नाम होता है. चार्जशीट में बताया गया है कि फरार आरोपी मिलिंद तेलतुंबड़े का छद्मनाम साहिल था, जिससे उनके साथी उन्हें बुलाते थे.
माओवादी संगठन के कथित आंतरिक कामकाज के बारे में जानकारी देने वाले एक अन्य गवाह ने एनआईए को बताया कि कबीर कला मंच के गिरफ्तार किये दो आरोपियों रमेश गाइचोर और सागर गोरखे ने साल 2012 में गढ़चिरौली के जंगलों का दौरा किया था.

गवाहों ने दावा किया कि अर्बन सीपीआई (माओवादी) के रूप में 20 दिन के अपने प्रवास के दौरान उन्हें फिजिकल ट्रेनिंग दी गयी. इसके अलावा उन्हें हथियारों के इस्तेमाल का भी बुनियादी प्रशिक्षण दिया गया था.

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