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हाथी उड़ाने वाली सरकार डीवीसी का बकाया भुगतान नहीं कर सकी, यह निंदनीय है : मिथिलेश ठाकुर

ठाकुर ने कहा- बिजली कटौती कर सरकार को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है

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Ranchi: दामोदर वैली कॉरपोरेशन की ओर से की जा रही बिजली कटौती पर मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने पूर्व सरकार की निंदा की.

ट्वीट करते हुए पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि हाथी उड़ाने वाली सरकार डीवीसी के बिजली का भुगतान नहीं कर सकी. अब इसे आधार बना बिजली कटौती कर सरकार को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. मैं इसकी निंदा करता हूं.

बता दें गुरुवार को विधानसभा में डीवीसी की ओर से सात जिलों में की जा रही बिजली कटौती का मामला गरमाया रहा. इस पर सत्तापक्ष ने आश्वस्त किया की मामला सरकार के संज्ञान में है. कार्रवाई की जा रही है.

दस मार्च से डीवीसी दिन के चार घंटे की बिजली दे रही है. डीवीसी की ओर से बिजली काटे जाने से राज्य के सात जिले प्रभावित हैं. इसमें धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, चतरा और कोडरमा है.

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600 मेगावाट बिजली आपूर्ति करती है डीवीसी

डीवीसी की ओर से राज्य के सात जिलों में प्रतिदिन 600 मेगावाट बिजली आपूर्ति की जाती है. 10 फरवरी से डीवीसी जेबीवीएनएल को इस संबध में नोटिस दे रहा है. जिसमें बकाया भुगतान करने की मांग की गयी.

इस दौरान डीवीसी ने जेबीवीएनएल को 15 दिन का समय दिया. लेकिन जेबीवीएनएल बकाया राशि भुगतान नहीं कर सकी. जिसके बाद फिर से डीवीसी ने तीन दिनों का समय दिया. लेकिन इसके बाद भी जेबीवीएनएल ने भुगतान नहीं किया. जेबीवीएनएल अपने स्तर से डीवीसी को भुगतान करेगी.

शुरुआती नोटिस में डीवीसी ने पचास प्रतिशत बिजली कटौती की बात की थी. लेकिन अब दिन में 18-18 घंटे बिजली कटौती की जा रही है.

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समय के साथ बढ़ता गया बकाया

वर्तमान में जेबीवीएनएल के पास डीवीसी का 4995 करोड़ रुपये बकाया है. साल 2019-20 के लिए पूर्व सरकार ने दो हजार करोड़ डीवीसी को देने के लिये स्वीकृति दी. सरकार की स्वीकृति के बाद भी जेबीवीएनएल को राशि भुगतान नहीं किया गया जिससे जेबीवीएनएल ने डीवीसी को बकाया नहीं दिया.

नवंबर 2019 तक बकाया 4295 करोड़ था. फरवरी तक बकाया 4995 करोड़ रुपये हो गया. वहीं पिछली सरकार ने जेबीवीएनएल को 350 करोड़ रुपये बिजली दर से मिलने वाली सब्सिडी भी नहीं दी.

जेबीवीएनएल को पिछले साल नवंबर में यह राशि मिलनी थी. लेकिन पूर्व सरकार ने कैबिनेट की स्वीकृति के बाद भी राशि आवंटित नहीं की.

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