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बिजली मार रही हिचकोले, उद्योगों को तीन दिन में 200 करोड़ का नुकसान

150 करोड़ उत्पादन और 50 करोड़ खनन से जुड़े उद्योगों को हुआ नुकसान

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⇒ उद्योगों को 500 से 550 मेगावाट की जाती है बिजली की आपूर्ति

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तीन दिन में 50 हजार लीटर से अधिक डीजल की हुई खपत

डीजल से एक मेगावाट बिजली उत्पादन में 12 से 13 हजार रुपये आता है खर्च

जेनरेटर से एक यूनिट बिजली उत्पादन में खर्च आता है 18 से 19 रुपये

Ranchi: राज्य में बिजली का हिचकोले मारना जारी है. पिछले तीन दिनों में बिजली आपूर्ति चरमराने से उद्योगों को लगभग 200 करोड़ का नुकसान हुआ है. इसमें 150 करोड़ उत्पादन से जुड़े उद्योगों को और 50 करोड़ खनन से जुड़े उद्योगों को नुकसान हुआ है. राज्य में 50 बड़े, 500 मध्यम और 12,000 लघु उद्योग निबंधित हैं. हकीकत यह है कि राज्य के 10 जिलों में महीने में औसतन बिजली 88 से 213 बार ट्रिप करती है. किसी भी जिले में जीरो कट पावर की स्थिति नहीं बन पाई है. गिरिडीह, चतरा, कोडरमा, गुमला, लोहरदगा, साहेबगंज, डालटनगंज, दुमका और गढ़वा में औसतन आठ घंटे ही बिजली मिलती है.

तीन दिन में 50 हजार लीटर डीजल की अतिरिक्त खपत

पिछले तीन दिनों में प्रदेश में 50 हजार लीटर डीजल की अधिक खपत हुई. राजधानी रांची में पांच हजार लीटर डीजल की अधिक खपत हुई. राज्य में उद्योगों को 500 से 550 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जाती है. यह बिजली उद्योगों को पांच से छह रुपये प्रति यूनिट मिलती है. जबकि जेनरेटर से एक यूनिट बिजली उत्पादन में 18 से 19 रुपये खर्च आता है. इस हिसाब से जेनरेटर से एक यूनिट बिजली उत्पादन में लगभग 13 रुपये का नुकसान होता है. डीजल से एक मेगावाट बिजली उत्पादन में 12 से 13 हजार रुपये खर्च आता है.

घरेलू उपभोक्ताओं को सलाना 30 करोड़ का नुकसान

वोल्टेज अप-डाउन से घरेलू उपभोक्ताओं को सालाना लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. इसका प्रमुख कारण है कि किसी भी जिले में अर्थिंग सही नहीं है. बिजली वितरण निगम का कहना है कि झारखंड पहाड़ी इलाका है इस कारण प्रोपर अर्थिंग नहीं मिलती है. इस समस्या से निजात पाने के लिये आइसोलेटर और वैक्यूम सर्किट ब्रेकर नहीं लगाये गये हैं. अगर ये उपकरण लगाये जाते तो क्षमता से अधिक बिजली मिलने पर ऑटोमेटिक पावर कट हो जाता.

मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होने से भी नुकसान

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बिजली की मांग अधिक होने और आपूर्ति कम होने से वोल्टेज अप-डाउन की समस्या होती है. अगर आपूर्ति अधिक हो गई तो हाई वोल्टेज की समस्या होती है. ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट जल जाते हैं. वहीं लो वोल्टेज से भी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को नुकसान होता है.

किस उपकरण के जलने पर कितना नुकसान

  • एसी जला तो कंप्रेशर बनाने व रिफिलिंग कराने पर 9000 से 10000 रुपये खर्च
  • पंखा जला तो 400 से 500 रुपये खर्च
  • कूलर का मोटर जला तो 1000 से 1500 रुपये खर्च
  • रेफ्रीजरेटर जला को कंप्रेशर बनाने में लगभग 5000 रुपये खर्च
  • साधारण बल्ब फ्यूज हुआ तो 10 से 12 रुपये खर्च
  • एलइडी फ्यूज हुआ तो 90 से 150 रुपये खर्च

किस जिले में प्रतिमाह कितनी बार ट्रिपिंग

रांची- 104 से 169, गुमला-88 से 185, गिरिडीह- 158 से 213, दुमका-142 से 201, देवघर- 171 से 122, गोड्डा- 122 से 139, जमशेदपुर- 114 से 138, बोकारो- 74 से 177, डालटनगंज- 23 से 149 और गढ़वा में 149 से 221 बार ट्रिपिंग होती है.

बिजली की खराब स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन

बहुमतवाली सरकार के लाख दावे के बावजूद भी प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पायी है. पिछले चार साल में एक मेगावाट भी बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ा. कई योजनाओं में घोटाले भी हुए लेकिन दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई.

  • इन प्रोजेक्ट में लेटलतीफी करनेवाले दोषी अफसरों-इंजीनियरों पर कार्रवाई नहीं
  • अंडरग्राउंड केबलिंग का काम तीन साल में पूरा नहीं, कंपनी को कोई शो-कॉज नहीं
  • पतरातू पावर प्लांट लगाने में दो साल की देरी, इसका स्पष्ट जवाब सरकार के पास नहीं
  • ट्रांसमिशन लाइन बनाने में 1310 करोड़ का प्रोजेक्ट 1700 करोड़ का हुआ, अब तक नहीं बना. दोषी कंपनी पर कार्रवाई नहीं
  • सिकिदिरी हाइडल में हेराफेरी मामले में अब तक कार्रवाई नहीं
  • टीवीएनएल को समय पर पैसा नहीं देने का भी स्पष्ट जवाब नहीं
  • सस्ती छोड़ महंगी बिजली खरीदने के मामले पर कार्रवाई नहीं
  • आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट में लापरवाही बरतनेवाले इंजीनियरों पर भी कार्रवाई नहीं

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