न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

बाकी है पूरी गर्मी-झेलना होगा बिजली संकट, सिकिदिरी हाइडल प्लांट के लिए पानी ही नहीं

604
  • जनवरी से लेकर अब तक 88 दिन में पांच दिन ही सिकिदिरी हाइडल प्लांट से हुआ उत्पादन
  • हर साल इंजीनियरों के वेतन पर खर्च 4.80 करोड़, एक प्रोजेक्ट मैनेजर, तीन कार्यपालक, सात एई और चार जेई हैं पदस्थापित
eidbanner

Ranchi: प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है. राज्य की एक मात्र पन बिजली परियोजना (हाइडल पावर प्लांट) सिकिदिरी पानी की कमी से जूझ रहा है.

एक जनवरी से लेकर अब तक 88 दिन में सिकिदिरी पावर प्लांट से सिर्फ पांच दिन ही बिजली का उत्पादन हुआ. इन 88 दिनों में सिर्फ 442 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ.

इसे भी पढ़ेंः ‘राहुल गांधी की सरकार आयेगी तब ही दे पाऊंगा पत्नी को गुजारा भत्ता’

प्लांट में 65-65 मेगावाट की दो यूनिट है. कुल उत्पादन क्षमता 130 मेगावाट की है. वहीं टीवीएनएल हमेशा गच्चा मार रहा है. एक मार्च से 29 मार्च के बीच तीन दिन टीवीएनएल की दोनों यूनिटों से उत्पादन ठप रहा. वहीं पिछले 22 दिनों में टीवीएनएल की एक यूनिट से उत्पादन ठप है.

सिर्फ डेढ़ फीट पानी उपयोग की ही स्वीकृति जो 24 घंटा यूनिट चलने पर हो जायेगा खत्म

सिकिदिरी हाइडल प्लांट चलाने के लिये गेतलसूद डैम से जलसंसाधन विभाग सिर्फ डेढ़ फीट पानी के उपयोग पर ही सहमति दी है. अगर सिकिदिरी की दोनों यूनिटें 24 घंटे लगातार चलीं तो यह पानी भी खत्म हो जायेगा.

इसे भी पढ़ेंःक्या सारण से ससुर चंद्रिका राय को टिकट मिलने से नाराज हैं तेजप्रताप?

फिलहाल गेतलसूद डैम में 1920.50 फीट ही पानी है. जिससे राजधानी में हर दिन औसतन 70 मिलियन गैलन आपूर्ति की जाती है. प्लांट चलाने के लिये 1925 फीट से 1919 फीट तक ही स्वीकृति जलसंसाधन विभाग देता है. ऐसे में गर्मी में प्लांट चलाना मुश्किल हो जायेगा.

हर साल इंजीनियरों की सैलरी पर खर्च 4.80 करोड़

Related Posts

दर्द-ए-पारा शिक्षक: उधार बढ़ने लगा तो बेटों ने पढ़ाई छोड़कर शुरू की मजदूरी, खुद भी सब्जियां बेच निकाल रहे खर्च

इंटर तक पढ़ी हैं दो बेटियां, मानदेय नहीं मिलने के कारण आगे नहीं पढ़ा पा रहे

सिकिदिरी पावर प्लांट से बिजली उत्पादन हो या न हो लेकिन हर साल इंजीनियरों की सैलरी पर 4.80 करोड़ रुपये खर्च होता है. सिकिदिरी प्लांट में एक प्रोजेक्ट मैनेजर (अधीक्षण अभियंता रैंक), तीन कार्यपालक अभियंता, सात असिस्टेंट इंजीनियर और चार जूनियर इंजीनियर पदस्थापित हैं. इसके अलावा कर्मचारी भी हैं. इन सभी की सैलरी पर हर माह सैलरी पर 40 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है.

इसे भी पढ़ेंःकांग्रेस स्क्रीनिंग कमिटी की बैठक में 5 नामों पर सहमति, रांची से सुबोधकांत और खूंटी से प्रदीप बलमुचू!

केंद्रीय मापदंड के अनुसार 40 फीसदी पन बिजली जरूरी
केंद्रीय मापदंड के अनुसार, किसी भी राज्य में 60 फीसदी थर्मल पावर और 40 फीसदी हाइडल पावर का होना जरूरी है.

ऐसा होने से प्रदूषण की शर्तों का अनुपालन होता. वर्तमान में राज्य में पांच फीसदी भी पन बिजली नहीं है. हाइडल पावर प्लांट लगने से ग्रीन पावर विकसित होता. प्रदूषण की समस्या भी नहीं होती. बिजली उत्पादन का खर्च भी न्यूनतम होता.

किस दिन कितने मेगावाट बिजली का हुआ उत्पादन

18 फरवरी: 30 मेगावाट
28 फरवरी: 45 मेगावाट
एक मार्च: 116 मेगावाट
दो मार्च: 117 मेगावाट
29 मार्च: 114 मेगावाट

जनवरी में एक दिन भी यूनिटें नहीं चलीं.

फरवरी में सिर्फ दो दिन और मार्च में तीन दिन ही यूनिटें चलीं.

इसे भी पढ़ेंः50 फीसदी वीवीपैट मिलान पर चुनाव आयोग का जवाबः छह दिन लेट हो जायेगा इलेक्शन रिजल्ट

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: