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सीएस और डीजीपी को चुनाव कार्य से अलग रखे निर्वाचन आयोग : झाविमो

झाविमो ने अशंका जतायी कि आरोपी अधिकारियों का शीर्ष पदों पर रहना भाजपा को फायदा पहुंचायेगा.

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  • झाविमो ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
  • कहा- गंभीर आरोप हैं शीर्ष पदों पर बने तीन अधिकारियों पर, भाजपा को चुनाव में पहुंचा सकते हैं फायदा
  • दल-बदल मामले में स्पीकर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचा झाविमो

Ranchi : झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मांग की है कि राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अपर पुलिस महानिदेशक को चुनाव कार्य से अलग रखा जाये. झाविमो ने इस मांग से संबंधित ज्ञापन मंगलवार को झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपा. झाविमो ने इस दौरान अशंका जतायी कि आरोपी अधिकारियों का शीर्ष पदों पर रहना भाजपा को फायदा पहुंचायेगा. राज्य के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप हैं. अगर ये अधिकारी चुनाव कार्यों से जुड़े रहे, तो झारखंड में निष्पक्ष चुनाव प्रभावित होने की आशंका है. ज्ञापन में कहा गया है कि डीजीपी और एडीजी पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पुलिस सेवा नियमों का उल्लंघन करते हुए सत्ता पक्ष भाजपा के एजेंट के तौर पर काम करने का गंभीर आरोप है. जबकि, मुख्य सचिव को सेवा विस्तार देकर उपकृत करने का काम भाजपा सरकार ने किया है.

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डीजीपी और एडीजी पर लगे आरोपों का किया जिक्र

झाविमो ने कहा है कि इन अधिकारियों में मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, डीजीपी डीके पांडे और एडीजी अनुराग गुप्ता शामिल हैं. झाविमो ने ज्ञापन में कहा है कि एडीजी पर राज्यसभा चुनाव 2016 में भाजपा के पक्ष में वोटरों को घूस देने, पद का दुरुपयोग करने और पीसी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है. वहीं, डीजीपी की संलिप्तता बकोरिया मुठभेड़ में 12 निर्दोष ग्रामीणों की हुई हत्या, 514 फर्जी नक्सली सरेंडर मामले में भी गंभीर आरोप लगे हैं. इन दागी अधिकारियों को दंडित करना सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए, परंतु विडंबना यह है कि इन आरोपी अधिकारियों को भाजपा सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है. सरकार कार्रवाई के बजाय उल्टा आरोपी अधिकारियों पर मेहरबानी करते हुए इनके मामले में लीपापोती कर रही है, ताकि सरकारी अधिकारियों से गलत कार्यों को अंजाम दिलाते रहे.

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तीनों अधिकारियों को चुनाव कार्य से अलग रखने का किया आग्रह

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ज्ञापन में लिखा गया है कि सरकार इन पर कितनी मेहरबान है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बकोरिया कांड में डीजीपी पर संभावित कार्रवाई देख हाई कोर्ट द्वारा बकोरिया कांड की सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गयी, ताकि सीबीआई जांच रुकवाकर सरकार राज्य की एजेंसी से जांच के नाम पर मामले की लीपापोती कर सके. ऐसे में सरकार और दोषी अधिकारियों के प्रति भाजपा का परस्पर प्रेम राज्य में निष्पक्ष चुनाव की राह में एक बड़ी बाधा है. ज्ञापन में झाविमो ने अशंका जतायी है कि  तीनों पदाधिकारियों पर भाजपा के उपकार, मेहरबानियों का कर्ज चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचायेगा. झाविमो ने चुनाव आयोग से आग्रह किया गया है कि झारखंड में निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए गंभीर आरोप से घिरे उपरोक्त दो पुलिस पदाधिकारियों और मुख्य सचिव को चुनाव कार्य से पूरी तरह मुक्त रखा जाये, ताकि चुनाव में पूरी पारदर्शिता बनी रहे.

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भारत निर्वाचन आयोग को भी भेजी ज्ञापन की प्रतिलिपि

झाविमो द्वारा झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग को दिय गये ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत निर्वाचन आयोग, नयी दिल्ली को भी भेजी गयी है. ज्ञापन के साथ मुख्य सचिव, झारखंड को एडीजी अनुराग गुप्ता एवं अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने से संबंधित पत्र की छायाप्रति एवं गृह विभाग, झारखंड सरकार को डीजीपी, झारखंड के विरुद्ध लगाये गये आरोप से संबंधित पत्र की छायाप्रति एवं अखबारों में प्रकाशित खबरों की कटिंग भी दी गयी है. झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपनेवालों में झाविमो महासचिव बंधु तिर्की, सचिव सरोज सिंह, सुरेश साव, प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह और केंद्रीय मीडिया प्रभारी तौहीद आलम शामिल थे.

इधर, दल-बदल मामले में स्पीकर कोर्ट के फैसले के खिलाफ झाविमो ने हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका

इधर, छह विधायकों के बदल-बदल मामले पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण (स्पीकर कोर्ट) द्वारा दिये गये फैसले को झाविमो ने झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी है. पूर्व मुख्यमंत्री और झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी और पार्टी के महासचिव प्रदीप यादव ने स्पीकर कोर्ट द्वारा झाविमो के छह विधायकों के भाजपा में शामिल होने को सही करार दिये जाने के फैसले के खिलाफ मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की. विधानसभा अध्‍यक्ष दिनेश उरांव के फैसले को चुनौती देते हुए इस याचिका में कहा गया है कि झाविमो के छह विधायकों ने संविधान और राजनीति की मर्यादा को तोड़ते हुए भाजपा की सदस्‍यता ली थी.

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