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चुनाव पर्यवेक्षक के निलंबन मामले में घिरता जा रहा है चुनाव आयोग

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FAISAL ANURAG

पहले उस अधिकारी को सस्पेंड किया गया और फिर जांच के लिए एक वरीय अधिकारी को नियुक्त किया गया. मामला सामान्य नहीं है. क्योंकि निलंबन का आदेश चुनाव आयोग ने दिया है और इसका संबंध प्रधानमंत्री मोदी के हेलिकाप्टर की जांच से जुडा है.

संबलपुर में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक मोहम्मद मोहसिन को निलंबित करने में आयोग की तत्परता भी असान्य है. चुनाव आचार संहिता की अनेक शिकायतों पर आयोग की भूमिका पहले से ही विवाद में है.

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चुनाव आयोग की साख इसके पहले किसी भी चुनाव में इस स्तर पर कभी  संदेह के घेरे में नहीं रही है. चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की है.

जिससे सभी राजनीतिक दलों को एक सामान्य जमीन पर चुनाव लड़ने का अवसर मिले. लेकिन आयोग ने ऐसे हालात बना दिये हैं कि उस पर पक्षपात करने और सत्तरूढ दल को मदद पहुंचाने का आरोप लग रहा है.

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चुनाव आयोग से एक संवाददाता सम्मेलन में जब यह सवाल किया गया कि संबलपुर के संदर्भ में उसे किससे शिकायत मिली थी, तब आयोग के उमेश सिन्हा ने जबाव दिया कि आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया.

जब फिर पूछा गया तो आयोग का जवाब हे कि फील्ड के अधिकारियों ने सूचना दी थी. आयोग का जवाब मीडिया को संतुष्ट नहीं कर सकता. क्योंकि आयोग की तत्परता सामान्य नहीं है. पर्यवेक्षक के निलंबन में भी वह अधिकारी जिस काडर का हे उससे कोई राय ली गयी न ही उसे जवाब देने का मौका दिया गया.

मामला तब और गंभीर दिखने लगता है जब आयोग प्रधानमंत्री के एक भाषण में सेना के इस्तेमाल की शिकायत की 9 दिनों से जांच ही कर रहा है. उसने इस संदर्भ में कहा कि उसे प्रधानमंत्री के भाषण का पूरा पठ अब मिला है.

आयोग के जवाब ही अनेक संदेह पैदा कर देते हैं. राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के मामले में आयोग गंभीर आलोचना का शिकार हुआ है. उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई का अहसास देश को नहीं कराया गया है.

इसी तरह विपक्षी दल कांग्रेस को निशाना बनाते हुए मां की गाली देने के मामले में भी हिमाचल प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ अब तक कदम नहीं उठाया गया है.

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आईएस अधिकारी के निलंबन के संदर्भ में आयोग ने जिस पत्र का हवाला दिया है, उसे लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. मार्च 2019 के जिस पत्र का उल्लेख किया गया है, उसमें यह कहीं नहीं लिखा है कि चुनाव अभियान में प्रधानमंत्री के वाहन की जांच नहीं होगी.

उसमें सिर्फ यह प्रावधान किया गया है कि एसपीजी सुरक्षा के तहत प्रधानमंत्री सरकारी वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं. एक अन्य जिस पत्र का हवाला आयोग ने ही दिया है उसमें भी साफ यही लिखा है कि किसी व्यवसायिक हवाई अड्डे पर एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की जांच नहीं होगी.

देश में प्रधानमंत्री के अलावे चार अन्य लोगों को एसपीजी सुरक्षा प्राप्त है. इसमें राहुल गांधी भी शामिल हैं. हाल ही में उनके हेलिकाप्टर की जांच चुनाव अधिकारी ने की है. आयोग निलंबन मामले में अब बचाव भी जिस तरह से कर रहा है, इससे वह संदेह को पुख्ता ही बना रहा है.

किरण बेदी ने एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कार को पार्किंग एरिया से बाहर खड़ा करने पर क्रेन से उठवा लिया था. तब उन्हें उनके कर्तव्य पालन के लिए सरकार ने पुरस्कृत किया था.

लेकिन मोहसिन को आयोग कर्तव्य पालन के लिए ही सजा दे रहा है. यह दोहरा मानदंड भारतीय लोकतंत्र के लिए न केवल खतरनाक है बल्कि पहले से ही जिस नौकरशाही पर सरकार का पिछलग्गू होने के गंभीर आरोप हैं, उसका एक अधिकारी जब साहस दिखाता है तो उसे दंडित किया जाता है.

अनेक रिटायर अफसर इस घटना में आयोग की भूमिका की आलोचना करते हुए नौकरशाही के मनोबल को प्रभावित होने की आशंका जाहिर कर रहे हैं.

ओड़िशा में 17 अप्रैल को वहां के मुख्यमंत्री के हेलिकप्टर की जांच आयोग के अफसरों ने की. देर तक तलाशी में नवीन पटनायक चुपचाप बैठे रहे और कार्रवारई को सुचारू रूप से होने दिया. जबकि उसी राज्य में भाजपा के केंद्रीय मंत्री ने इसी तरह की जांच का न केवल प्रतिकार किया बल्कि अफसर को बर्बाद कर देने की धमकी भी दी.

असल में इस चुनाव में एक ब्लैक बैग तब रहस्य बन गया था जब कर्नाटक में वह प्रधानमंत्री के हेलिकाप्टर से उतरी. बैग को एक ऐसी कार में लाद कर रवाना किया गया जो पीएम के काफिले का हिस्सा नहीं थी. अत्यंत  संवेदनशील सुरक्षा घेरे में उस कार का पहुचना और बैग ले कर रवाना होना चर्चा का विषय बना हुआ है.

आयोग के साथ ही आईटी विभाग भी आलरोचनाओं के घेरे में है. जिस पर विपक्षी नेताओं पर छापा डालने का आरोप है.

तमिलनाडु में कनीमोझी के घर पर आईडी रेड के बाद तब सवाल गंभीरता से उठा है जब आईडी ने ही जांच के बाद कहा कि उसने गलत सूचना पर कार्रवाई की. अब आईडी विभाग अपनी इस कार्रवाई को रेड बताने से मुकर रहा है.

चुनाव आयरोग के साथ अन्य केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका भी इस चुनाव में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के नजरिये से गंभीर है.

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