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आजसू की वैधता की शिकायत पर निवार्चन आयोग कर रहा टाल-मटोल

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Ranchi: भारत निर्वाचन आयोग झारखंड की आजसू पार्टी की वैधता पर की गयी शिकायतों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहता है. आयोग का कहना है कि आजसू पार्टी का पंजीकरण 19.09.2002 को प्राप्त आवेदन के आधार पर किया गया है. आजसू पार्टी का नाम 2007 में आयोग की तरफ से निबंधित किया गया.

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इसके लिए निर्वाचन आयोग के अवर सचिव एसआर कार ने 8.8.2007 को ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष को पत्र लिख कर अवगत भी कराया गया था. वर्तमान में आजसू पार्टी के पांच विधानसभा सदस्य हैं और झारखंड में राजग गंठबंधन वाली सरकार में शामिल भी है.

बेसरा ने की थी शिकायत

आयोग कार्यालय में पार्टी के विक्षुब्ध गुट सूरज सिंह बेसरा की तरफ से यह शिकायत की गयी थी कि उनकी अध्यक्षता वाली ही आजसू मूल रूप से असली दल है. सुदेश कुमार महतो के नेतृत्व वाली आजसू पार्टी संवैधानिक रूप से सही नहीं है. इतना ही नहीं, उनकी शिकायत पर कई बार सुनवाई भी की गयी. मामला अब भी आयोग के समक्ष विचाराधीन है.

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10 सितंबर को आयोग में निबंधन के लिए दी गयी थी अर्जी

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आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष आज भी सुदेश कुमार महतो हैं. 10 सितंबर 2002 को ऑल झारखंड स्टूडेंट्स एसोसिएशन को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29 क के आधार पर निबंधित करने का आवेदन दिया गया था. उस समय पार्टी के पदाधिकारियों के नाम में कमल किशोर भगत, राजकुमार महतो, जयपाल सिंह, प्रवीण प्रभाकर, सुनील कुमार सिंह शामिल थे. सदस्यों तथा प्रवर्ग की संख्या 104 बतायी गयी थी. यह कहा गया था कि 2002 में पार्टी का कोई विधानसभा सदस्य अथवा सांसद सदस्य नहीं है. इन्हीं सब बातों को लेकर सूरज सिंह बेसरा ने शिकायत की थी और पार्टी को निबंधित किये जाने पर सवाल खड़े किये थे.

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क्या कहता है निर्वाचन आयोग

निर्वाचन आयोग ने सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गयी सूचना पर स्पष्ट किया है कि आजसू पार्टी से संबंधित शिकायतें कार्यालय में संकलित आधार पर उपलब्ध नहीं है. इन्हें इकट्ठा करना आयोग के संसाधनों को विचलित करेगा. सूचना के अधिकार कानून के नियमों के अनुसार आवेदक पूर्व में सूचना देकर शिकायतों से संबंधित फाइल को देख सकता है.

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