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जनजातीय समाज के लिए शिक्षा और सामाजिक जागरुकता जरूरी : राज्यपाल द्रौपदी मुरमू

पांचवीं अनुसूची से संबंधित विशेषज्ञ समूह की पहली बैठक आयोजित,कई मामलों पर बनी सहमति

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Ranchi :  राज्यपाल द्रौपदी मुरमू ने कहा है कि जनजातीय आबादी के बीच शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरुकता जरूरी है. राज्यपाल की अध्यक्षता में  गुरुवार को पांचवीं अनुसूची से संबंधित मामलों के विशेषज्ञ समूह की पहली बैठक में उन्होंने यह बातें कहीं. राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातियों के विकास और उनके कल्याणार्थ कई योजनाएं संचालित कर रही हैं. सरकार की इन योजनाओं का एक ही मकसद है कि उन्हें उनका हक मिले. राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय आबादी के जागरुक होने से ही वे अपने मौलिक अधिकार और योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे.

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कहा कि पेसा कानून राज्य में अंगीकृत नहीं किये जाने से कई परेशानियां हो रही हैं. राज्य सरकार को इस संबंध में नियमावली तैयार करनी चाहिए. बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव सतेंद्र कुमार सिंह,  डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा, पूर्व आयुक्त वासिल किड़ो, पूर्व आयकर आयुक्त एतवा मुंडा, संजीव कुमार बिरूली, कोआपरेटिव कालेज की प्राध्यापक चामी मुरमू, पर्यावरणविद जमुना टुडू समेत अन्य  उपस्थित थे.

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विशेषज्ञों ने दी अपनी राय

इस अवसर पर राज्यपाल के समक्ष विभिन्न विषेशज्ञों ने अपनी राय प्रकट की. सदस्यों ने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक वर्ष में दो बार होनी चाहिए. सरकार को चाहिए कि जल्द ही टीएसी की बैठक की तिथि तय की जाये. बैठक में जमीन से जुड़े व्यक्तियों को भी सदस्य बनाने की मांग की गयी.

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डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान को किया जाये सक्रिय

बैठक में डॉ रामदयाह मुंडा जनजातीय शोष संस्थान रांची को सक्रिय करने की मांग की गयी. यह कहा गया कि सभी स्वीकृत पदों पर जल्द बहाली की जाये. संस्थान में 26 हजार किताबें हैं, जिनका मनोनुकूल उपयोग नहीं हो रहा है. सदस्यों ने अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के निराकरण के लिए जनजातीय आयोग का गठन होना चाहिए.

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जनजातीय भाषा अकादमी को गतिशील बनाने की मांग

बैठक में शामिल लोगों ने जनजातीय भाषा, उसकी संस्कृति, उनके संरक्षण तथा विकास के लिए जनजातीय भाषा अकादमी का गठन करने पर बल दिया गया. कहा कि आदिम जनजाति की भाषा और संस्कृति की भी रक्षा करनी चाहिए. सदस्यों ने कहा कि सरकारी और नौकरी क्षेत्र में बाह्य कोटे से बहाली न हो.थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में स्थानीय लोगों के हितों का ख्याल रखा जाये और संविदा बहाली में जिला स्तरीय रोस्टर का अनुपालन किया जाये.

बैठक में कहा गया कि जनजातीय उप योजना वाले क्षेत्र में होने पर होनेवाले व्यय के अनुश्रवण की उचित व्यवस्था हो. बैठक में आदिवासियों की जमीन के अवैध स्थानांतरण पर रोक लगाने पर भी चर्चा की गयी. वन उत्पादों का सही मूल्य आदिवासियों को मिलने पर भी बल दिया गया. वनोत्पादों की बिक्री सहकारी समितियों के द्वारा करने पर भी विचार किया गया.

भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा का अनुमोदन हो

पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा का अनुमोदन लेने पर भी बल दिया गया. यह राय दी गयी कि नियमावली की जानकारी ग्राम सभा को नहीं है. इसलिए विकास परियोजनाओं के लिए अधिक जमीन ले ली जा रही है. मुआवजे की रकम का भुगतान समय पर किये जाने और अधिग्रहित होनेवाली जमीन का भी मुआवजा दिया जाना चाहिए.

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