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ईडी ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मलविंदर और शिविंदर सिंह के ठिकानों पर छापा मारा

रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड ने पिछले साल दिसंबर में मलविंदर और शिविंदर के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से शिकायत की थी.

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NewDelhi : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने  रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर भाइयों मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह के ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गुरुवार को छापे मारे. उन पर 740 करोड़ रुपए के फ्रॉड के आरोप हैं.  इस मामले में संज्ञान लेते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.  न्यूज एजेंसी के अनुसार दोनों पर रेलीगेयर एंटरप्राइजेज और फोर्टिस हेल्थकेयर में वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं. जान लें कि रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड ने पिछले साल दिसंबर में मलविंदर और शिविंदर के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से शिकायत की थी.  मई 2019 में दोनों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ.

दाइची सैंक्यो से विवाद चल रहा है

मलविंदर-शिविंदर का जापान की दवा कंपनी दाइची सैंक्यो से भी विवाद चल रहा है.  4,000 करोड़ रुपए के भुगतान विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में दोनों भाइयों से कहा था कि आदेश का उल्लंघन किया तो जेल भेज दिये जायेंगे. दाइची सैंक्यो आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को लागू करवाने के लिए कोर्ट में लड़ रही है.  सिंगापुर ट्रिब्यूनल में उसने 2016 में केस जीता था. दाइची ने 2008 में मलविंदर-शिविंदर सिंह से रैनबैक्सी को खरीदा था.  बाद में उसने आरोप लगाया कि सिंह ब्रदर्स ने रैनबैक्सी के बारे में अहम जानकारियां छिपायी,  उसने सिंगापुर ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी.

अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व रैनबैक्सी प्रमोटरों द्वारा 14 मार्च के निर्देश के जवाब में दायर  जवाबों पर असंतोष व्यक्त किया था.  इस दौरान कोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रोमोटर्स मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह से पूछा था कि वह किस तरह 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे. खबरों के अनुसार सिंगापुर के एक ट्रिब्यूनल ने सिंह बंधुओं के खिलाफ आदेश दिया है, जिसके अनुसार  उन्हें दायची सैंक्यों को 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.

दाइची ने 2008 में रैनबैक्सी को खरीदा था

कोर्ट ने इस दौरान कहा था कि यह किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का मामला नहीं है, बल्कि देश की प्रतिष्ठा का मामला है.  आप कभी फार्मा इंडस्ट्री की पहचान थे और यह ठीक नहीं लगता कि आप कोर्ट में आयें.  बेंच ने सिंह बंधुओं को 28 मार्च को अदालत में पेश होकर भुगतान योजना सौंपने का आदेश दिया था.  कोर्ट ने कहा था कि वे उम्मीद करते हैं कि कोर्ट में यह आपकी आखिरी मौजूदगी होगी.

दाइची ने 2008 में रैनबैक्सी को खरीदा था. बाद में उसने आरोप लगाया था कि रैनबैक्सी को बेचते समय दोनों भाइयों ने यूएसएफडीए से जुड़ी जानकारी को छुपाया था.  दोनों भाईयों ने 9,576 करोड़ रुपये की रैनबैक्सी में अपनी हिस्सेदारी को जापानी कंपनी दायची को बेच दी थी.  इसको बाद में दायची ने रैनबैक्सी को सनफार्मा को बेच दिया था.

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