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ब्रह्मडीहा कोल ब्लॉक से 2 करोड़ के कोयला चोरी मामले की जांच करने की तैयारी में ईडी

Ranchi : झारखंड के गिरिडीह जिले में बंद पड़े ब्रह्मडीहा कोल ब्लॉक से करीब दो करोड़ के दो हजार टन कोयला की चोरी मामले की जांच की तैयारी में ईडी जुट गयी है. बंद पड़े खदान से भारी मात्रा की चोरी के मामले को केद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. पुख्ता सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही इस मामले को ईडी टेकओवर कर सकती है. झारखंड में विगत दो माह से अवैध खनन से जुड़े मामले की जांच ईडी की टीम कर रही है. अवैध खनन से जुड़े 100 करोड़ के इस घोटाले में ईडी 36.58 करोड़ रुपये भी जब्त की है.

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राज्य में बड़े पैमाने पर कोल ब्लॉक से अवैध रुप से कोयला चोरो पर अब ईडी की नजर है. ब्रह्मडीहा कोल ब्लॉक से दो हजार टन कोयला चोरी मामले में कई सफेदपोश ईडी के रडार पर है. गौरतलब हो कि बंद पड़े ब्रह्मडीहा कोल ब्लॉक से फरवरी 2020 में खुद को सीबीआई का अधिकारी बता चार लोग कोल ब्लॉक पहुंचे. फर्जी कागजात दिखाकर जब्त कोयले की बिक्री संबंधी बात कर तकरीबन दो हजार टन कोयला स्टॉक से चोरी कर ली. घटना की जानकारी मिलने पर आनन फानन में गिरिडीह मुफस्सिल थाने में अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी.

जब्त कोयले की हुयी थी चोरी, सीआईडी भी नही पहुंच सकी अंजाम तक

कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने वर्ष 2015 में ब्रह्मडीहा कोल ब्लाक में रखे कोयला जब्त किया था. इस कोयले को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था. लेकिन वर्ष 2020 में कोयले की चोरी कर ली गयी. पुलिस मुख्यालय के आदेश पर मामले को सीआईडी ने अप्रैल 2021 में टेकओवर किया. सीआईडी अबतक जांच पूरी नही कर सकी है. हालांकि शुरुआती जांच में सोनू विश्वकर्मा नाम सामने आया.

सीबीआई अधिकारी बन 11 ट्रक में ले गये कोयला

प्राथमिकी के अनुसार फरवरी 2020 में चार लोग सीबीआई अधिकारी बताकर ब्रह्मडीहा कोयला खदान के पास पहुंचे. उनलोगो ने जय मां गायत्री एंटरप्राइजेज नाम की कंपनी के नाम का जिक्र करते हुए एक पत्र दिखाकर वहां पर तैनात गार्ड से कहा कि उक्त कंपनी को कोयला छोड़ने का आदेश जारी किया गया है. इसके अलावे तैनात गार्ड को प्रति ट्रक दस हजार रुपये का लालच दिया. इसके बाद 11 ट्रक में लादकर कोयला ले गये. घटना तब सामने आया जब मीडिया ने सनसनीखेज कोयला चोरी का पर्दाफाश हुआ. शिकायतकर्ता को पुलिस द्वारा मामले की जांच करने के बाद उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ. इसके बाद सुरक्षा पर्यवेक्षक मो साबुल की लिखित शिकायत पर 4 जुलाई 2020 को गिरिडीह मुफ्फसिल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई.

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