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#Economy : वित्त मंत्री ने की सरकारी बैंकों के प्रमुखों से अहम चर्चा, अर्थव्यवस्था को लेकर मंथन

NewDelhi : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने को लेकर बैठक की.  बैठक में सभी 18 बैंकों के प्रबंध निदेशक, चेयरमैन और सीईओ के शामिल हुए हैं. बजट पूर्व वित्त मंत्री द्वारा बुलायी गयी  अहम बैठक में सरफेसी अधिनियम के तहत संपत्तियों की नीलामी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, रूपे कार्ड के जरिए जन धन योजना के खाताधारकों को खाते में मौजूदा राशि से अधिक की निकासी करने की सुविधा देने और एमडीआर पर चर्चा किये जाने की खबर है.

जान लें कि  NPA के तहत फंसे कर्ज को लेकर रिजर्व बैंक के सख्त रुख का असर नजर आ रहा है.  पिछले एक साल में सरकारी और निजी बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियों (NPA) में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट आयी है.  आरबीआई ने मंगलवार को  बैंकिंग क्षेत्र के रुझान और प्रगति रिपोर्ट 2018-19 में बताया कि बैंकों का सकल NPA सात वर्षों में पहली बार नीचे आया है, जबकि वास्तविक NPA भी कम हुआ है.

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2018-19 में 1,56,702 करोड़ रुपए की वसूली

बैठक में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के जरिए  NPA की वसूली के बारे में चर्चा की जा रही है.   जानकारी के अनुसार बैंकों ने पिछले चार साल में 4,01,393 करोड़ रुपये के एनपीए वसूले हैं.  इनमें सिर्फ 2018-19 में ही 1,56,702 करोड़ रुपए की वसूली की गयी.  बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के हालातों पर चर्चा हुई और उन्हें ऋण वितरण की ग्रोथ रेट को तेज करने सहित बैंकों को रेपो दर में की गयी कटौती का  लाभ उपभोक्ताओं को देने को कहा गया.

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सितंबर 2019 तक बैंकों का सकल NPA घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया

खबरों के अनुसार फंसे कर्ज की पहचान को लेकर रिजर्व बैंक की प्रक्रिया पूरी होने को है. आरबीआई ने इससे पहले बैंकों की वास्तविक स्थिति का खुलासा किया है.  रिजर्व बैंक की  रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2019 तक बैंकों का सकल NPA घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया है, जो वित्त वर्ष 2018 की समान अवधि में 11.2 फीसदी थी.

इसी तरह, वास्तविक NPA में भी कमी आयी है और यह 2018 के 6 फीसदी से गिरकर सितंबर में 3.7 फीसदी पर आ गया है.  आरबीआई के अनुसार, लगातार सात वर्षों तक इजाफे के बाद सभी बैंकों का सकल एनपीए 2018-19 में पहली बार नीचे आया है.

रिजर्व बैंक के अनुसार  वित्त वर्ष 2019 में कृषि क्षेत्र को दिये गये कर्ज में NPA बढ़ा है, जो 2020 की पहली छमाही में भी जारी है.  इस पर सबसे ज्यादा असर उन राज्यों में हुआ है, जहां 2018 और 2019 में किसानों का कर्ज माफ किया गया.  हालांकि, सबसे ज्यादा सकल NPA के मामले में 17.4 फीसदी के साथ उद्योग क्षेत्र अब भी शीर्ष पर है.  इस क्षेत्र में कुल NPA राशि का दो तिहाई शामिल है.

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