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#EconomicSlowdown : रघुराम राजन ने कहा, अर्थव्यवस्था का संचालन PMO से होना, मंत्रियों के पास कोई शक्ति नहीं होना ठीक नहीं

NewDelhi : RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अर्थव्यवस्था का संचालन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से होना और मंत्रियों के पास कोई शक्ति नहीं होना देश में छायी मंदी का मूल कारण करार दिया है.  भारतीय रिजर्व बैंक  के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने यह बात अपने एक लेख में कही है. राजन ने इंडिया टुडे में लिखे अपने लेख में कहा कि देश मंदी के दौर से गुजर रहा है और अर्थव्यवस्था में भारी सुस्ती के संकेत मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साल 2024 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है.

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PMO लेता है सारे फैसले

रघुराम राजन ने कहा, कहां गलती हुई है यह समझने के लिए हमें मौजूदा सरकार के केंद्रीकृत प्रकृति को समझने की जरूरत है.  केवल फैसला ही नहीं, बल्कि विचार और योजना पर निर्णय भी प्रधानमंत्री के कुछ नजदीकी लोग और पीएमओ के लोग लेते हैं. राजन ने लिखा, पार्टी के राजनीतिक तथा सामाजिक एजेंडे के लिए तो यह सही है, लेकिन आर्थिक सुधारों के मामलों में यह काम नहीं करता है, जहां ऐसे लोगों को यह पता नहीं कि राज्य स्तर से इतर केंद्र स्तर पर अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है.

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की गठबंधन भले ही ढीला हो सकता है, लेकिन उन्होंने लगातार अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का रास्ता चुना.  राजन ने कहा, मंत्रियों के शक्तिहीन होने के साथ-साथ सरकार का बेहद अधिक केंद्रीकरण और दृष्टिकोण की कमी यह सुनिश्चित करता है कि पीएमओ के चाहने पर ही सुधार के प्रयास की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.

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हर साल आठ से नौ फीसदी की वृद्धि अनिवार्य है

राजन के अनुसार  इसके लिए हर साल आठ से नौ फीसदी की वृद्धि अनिवार्य है, जो बेहद मुश्किल है. भारत में 47 अरब डॉलर यानी करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट फंसे हुए हैं.  साथ ही 4.65 लाख यूनिट घर निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है.  इन सभी प्रॉजेक्ट को पूरा करने में दो से आठ सालों का वक्त लग सकता है.

अपने लेख में अर्थव्यवस्था को मुसीबत से निकालने के लिए उपायों की चर्चा करते हुए राजन ने पूंजी लाने के नियमों को उदार बनाने, भूमि और श्रम बाजारों में सुधार तथा निवेश एवं ग्रोथ को बढ़ावा देने का आह्वान किया.  उन्होंने सरकार से प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने तथा घरेलू क्षमता में सुधार लाने के लिए विवेकपूर्ण ढंग से मुक्त व्यापार समझौते में शामिल होने का आग्रह किया.

 कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर  समस्या से जूझ रहे हैं

रियल एस्टेट के साथ-साथ उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी समस्या से जूझ रहा है. इन तीनों सेक्टर को सबसे ज्यादा कर्ज नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनी (NBFC) से प्राप्त हुआ है. एनबीएफसी कर्ज बांटने की हालत में नहीं रह गयी हैं.  ऐसा इसलिए क्योंकि बैड लोन का आकार अब बढ़ गया है.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों पर काफी आर्थिक दबाव है. भारत की विकास दर घटती जा रही है. वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 4.5 फीसदी पर पहुंच गयी थी, जो पिछले छह सालों में सबसे कम है.  कहा कि भारत में बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है.

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