World

पाक में #EconomicCrisis : डूबती अर्थव्यवस्था बचाने के लिए सेना ने कारोबारियों के साथ बैठक की  

 Islamabad : पाक सेना पर आर्थिक बदहाली का असर साफ-साफ दिखाई दे रहा है. पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है जब 2020 का रक्षा बजट फ्रीज कर दिया गया है. ऐसा तब है जब पाकिस्तानी सैनिक अफगानिस्तान के आतंकियों और भारत के हालात के कारण हाई अलर्ट पर हैं. इसी बीच खबर आयी है कि आर्थिक खस्ताहाली में फंसे देश को चलाने में पाकिस्तानी सेना महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है.

Jharkhand Rai

खबर है कि सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के उपायों को लेकर पाकिस्तान के बड़े कारोबारियों के साथ बैठक की है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची और रावलपिंडी स्थित सैन्य दफ्तरों में बड़े कारोबारियों के साथ सेना ने तीन हाई सिक्यॉरिटी बैठकें की है.

इसे भी पढ़ें :  #Gandhi जिंदा होते तो कश्मीर से #Article370 हटाये जाने के विरोध में निकालते मार्च  : दिग्विजय सिंह   

जनरल बाजवा बिजनस कम्युनिटी में भरोसा लौटाने को लेकर चिंतित

रिपोर्ट के अनुसार बैठक में कमर जावेद बाजवा ने इकॉनमी पर मंडरा रहे संकट से निपटने को लेकर चर्चा की. सूत्रों ने बताया कि बैठक में इस पर चर्चा की गयी कि निवेश बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाये जा सकते हैं. बताया गया कि कुछ बैठकों में तुरंत फैसले लेकर सरकार के टॉप अफसरों को निर्देश जारी किये गये. इन बैठकों में शामिल लोगों के अनुसार जनरल बाजवा बिजनस कम्युनिटी में भरोसा लौटाने को लेकर काफी चिंतित हैं. हालांकि सेना के प्रवक्ता ने इन बैठकों के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया.

Samford

पाकिस्तान में कई बिजनस लीडर और आर्थिक विश्लेषक देश को लेकर जनरलों की भूमिका का स्वागत कर रहे हैं. उनका मानना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के पास सेना के मुकाबले काफी कम अनुभव है और सेना देश में सबसे ज्यादा सम्मानित भी है. वहीं कई लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पाकिस्तान के लोकतंत्र के लिहाज से सेना के लगातार बढ़ते रोल का क्या मायने होगा और उन नागरिक संस्थानों का क्या भविष्य क्या होगा जिन्हें अपनी जडें जमाने का कभी मौका नहीं दिया गया.

इसे भी पढ़ें : #INXMediaCase में अदालत का फैसला, पी चिदंबरम 17 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे

यूसुफ पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर एक किताब भी लिख चुके हैं

सिटीग्रुप इंक के पूर्व बैंकर यूसुफ नजर के अनुसार अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में सेना का बढ़ता रोल पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर धक्के की तरह है. जान लें कि यूसुफ पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर एक किताब भी लिख चुके हैं.   पाक वित्त मंत्रालय में प्रवक्ता ओमर हामिद ने कहा कि हम आर्मी की ओर से इकॉनमी को लेकर कोई प्रक्रियात्मक हस्तक्षेप नहीं देख रहे हैं.  सेना अपना काम कर रही है और हम अपना.

चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान के आर्थिक विकास की अनुमानित दर 2.4% है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है.  राजकोषीय घाटा बढ़ने के कारण पाकिस्तान ने मई 2019 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 6 अरब डॉलर का कर्ज लिया था, ताकि इकॉनमी में स्थिरता लायी जा सके.  इस वर्ष जून में खत्म हुए वित्त वर्ष में पाकिस्तान का बजट घाटा बढ़कर जीडीपी का 8.9% पर पहुंच गया है.

इसे भी पढ़ें : 67 साल में देश पर कर्ज 54.90 लाख करोड़, मोदी सरकार में 34.90 लाख करोड़ बढ़कर हुआ 89.80 लाख करोड़

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: