न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पहले स्‍वच्‍छता की चर्चा नहीं होती थी, अब जागरूकता आई है: सीपी सिंह

115

Ranchi: स्वच्छ भारत मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं सतत विकास लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. राज्य में असमानताएं व्याप्त है और सभी को अवसर मुहैया कराने के लिए सरकार प्रयासरत है. लोगों को योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है. कार्य संपादित करने में सरकार की भी अपनी सीमाएं होती हैं और कोई भी कार्य या योजना बिना लोगों की सहभागिता के पूर्ण नहीं हो सकती है. यह बातें झारखंड के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने सतत विकास लक्ष्य की तीसरी वर्षगांठ पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में कहा. उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रति लोगों को जागरुक किए जाने की जरुरत है. यह भी जरुरी है कि लोगों को अपनी जिम्मेवारियों का बोध हो और वे अपने कर्तव्यों को समझें. पहले स्वच्छता पर चर्चा नहीं होती थी, पर अब लोगों के व्यवहार में स्वच्छता को लेकर जागरुकता आई है. इन्होंने कहा कि कमियां अभी भी हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.

इसे भी पढ़ें: पुलिस की साजिश का शिकार हुए दो युवक, लाइनहाजिर किये गये तीन थानेदार, डीएसपी पर कार्रवाई बाकी

विचार आदान-प्रदान की आवश्यकता

लीड्स निदेशक एके सिंह ने कहा कि लोगों के बीच सतत् विकास को ले जागरूकता की कमी है. इस मुद्दे पर आपसी समझ को बढ़ाने और विचारों के आदान-प्रदान के लिए इस कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए. विश्व की लगभग एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर कर रही है. जबकि इन्हीं क्षेत्रों में विश्व के सबसे समृद्ध संसाधनों के भंडार हैं. इससे पूर्व मिलेनियम डेवलपमेंट लक्ष्य भी आया था. लेकिन, इस पर बहुत ज्यादा कार्य नहीं हो पाया. सतत विकास लक्ष्य की अवधारणा विश्व को एक बेहतर रहने लायक जगह बनाने की है.

इसे भी पढ़ें: ट्राइबल सब-प्लान के पैसे से किया जा रहा लोकमंथन कार्यक्रम का आयोजन

झारखंड में अभी भी 4000 आंगनबाड़ी केंद्रों की जरूरत

एके सिंह ने बताया कि एसडीजी अंतर्गत 17 लक्ष्य तय किए गए हैं. जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, जलवायु परिवर्तन आदि मुद्दों पर विकास करने की बात कही गयी है. राज्यों में अभी इस पर बहुत ज्यादा काम दिखायी नहीं दे रहा है और सिविल सोसायटी संस्थाओं के द्वारा इसे लेकर सरकार पर दबाव भी बनाया जा रहा है.  उन्होंने कहा कि राज्य में अभी भी 4000 आंगनबाड़ी केंद्रों की और आवश्यकता है. योजना बनाने का कार्य भी ऐसे क्षेत्रों से शुरु करना होगा, जहां पर सबसे ज्यादा अशिक्षा, गरीबी, भुखमरी व्याप्त है.

इसे भी पढ़ें: रेलवे पुलिस और सीआईडी ने जिसे मानव तस्कर कहकर जेल भेजा, कोर्ट ने उसे दिया क्लीन चिट

खाद्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा तो शिकायत करें

स्टेट फूड कमीशन की रंजना ने इस दौरान कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत राज्य को कुपोषित से सुपोषित बनाए जाने के लिए प्रयास किया जा रहा है. यदि किसी को खाद्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, तो शिकायत निवारण की व्यवस्था भी राज्य में की गई है. राशन से संबंधित शिकायत के लिए पीडीएस पर संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता के पास भी शिकायत दर्ज की जा सकती है.

इस कार्यक्रम के दौरान झारखंड फाउंडेशन के निदेशक विष्णु राजगढ़िया, स्टेट फूड कमीशन की सदस्या रंजना, कुमार प्रेमचन्द, गणेश रेड्डी, गणेश रवि, बलराम, राजपाल, अंजनी सिंह सहित झारखंड के प्रमुख सामाजिक संस्थाओं के 130 कार्यकर्तागण और विशेषज्ञ उपस्थित थे.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: