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आंदोलन पर उतरे ई-रिक्शा चालक, कहा- तानाशाही पर उतरे नगर आयुक्त

1 सितम्बर से लागू होगी नयी परिवहन व्यवस्था

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Ranchi : 1 सितम्बर से मेन रोड में ई-रिक्शा पर रोक लगाने के नगर निगम के फरमान के साथ ही ई-रिक्शा चालक आंदोलन पर उतर आये हैं. ई-रिक्शा चालक संघ का कहना है कि नगर आयुक्त अब तानाशाही रवैये पर उतर आये हैं. ऐसा कर वे और निगम के आला अधिकारी चालकों और उनके परिवारों को सड़क पर उतरने को विवश कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि निगम पहली बार चालकों पर शोषण कर रहा है. फाइन काटने के नाम पर निगम चालकों से 3000 से 15,000 रुपये तक फाइन लेता रहा है. अधिकतर चालकों पर गाड़ी खऱीदने का लोन अब भी है. ई-रिक्शा चालक एसोसिएशन के अध्यक्ष शकील राइन ने नगर निगम को चेतावनी देते हुए कहा कि मेन रोड में ई-रिक्शा नहीं चलने के निगम के फैसले को वापस लेना होगा. ऐसा नहीं करने पर चालक पूरे शहर में चक्का जाम करने को विवश होंगे.

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लोन पर हैं अधिकतर ई-रिक्शा, बढ़ जायेगी परेशानी

बता दें कि यातायात तकनीकी समिति की सोमवार को हुई बैठक में निर्णय हुआ है कि महात्मा गांधी मार्ग (मेन रोड) में 1 सितम्बर से ई-रिक्शा नहीं चलेगा. इसकी जगह यहां मिनी बस चलाने का फैसला लिया गया है. जिसके विरोध में ई-रिक्शा चालक संघ विरोध पर उतर आये हैं. एसोसिएशन के अध्यक्ष शकील राइन ने कहा है कि पहले से ही ई-रिक्शा जैसे गरीब चालकों को निगम तानाशाही फरमान देता रहा है. ई-रिक्शा चालक पहले से ही नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के जुल्म का शिकार हैं. जब जहां मन करे नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ई-रिक्शा वालो पर हजारों रुपये फाइन कर देते हैं. जिसे मजबूरी में ई-रिक्शा चालकों को भरना पड़ता है. दूसरी ओर अधिकतर ई-रिक्शा चालकों ने लोन लेकर ई-रिक्शा खरीदा है, अगर ई-रिक्शा चलना बंद कर दिया जायेगा तो ई-रिक्शा चालक लोन का पैसा कैसे भरेंगे.

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हजारों लोगों को बेरोजगार करना सही नहीं

उऩ्होंने कहा कि नगर आयुक्त कहते हैं कि मेन रोड में ई-रिक्शा के कारण जाम लगता है. लेकिन उनका यह तर्क सही नहीं है. अगर ऐसा होता तो रातू रोड, कांटाटोली में जाम की स्थिति ही नहीं होती. राज्य बने हुए 19 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक राजधानी की सड़क चौड़ी नहीं हुई है, जिसके कारण मेन रोड पर रोजाना जाम लग जाता है. ई-रिक्शा को जाम का कारण बता कर हजारों लोगों को बेरोजगार कर देना कतई सही नहीं है.

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