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जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने की टिप्पणी- कोर्ट के आदेश को मज़ाक न बनाया जाये

Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय में डॉक्टर  भीम प्रभाकर के द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने 29 मई को संज्ञान लेते हुए झारखंड सरकार के उच्च पदस्थ पदाधिकारियों को प्रति शपथ पत्र 4 सप्ताह में दाखिल करने का आदेश पारित किया गया था.

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प्रतिभागियो नें नहीं दायर किया था शपथ पत्र

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनोद सिंह के द्वारा यह विरोध दर्ज कराया गया कि याचिका में बनाये गये प्रतिभागियों में से किसी ने भी प्रति शपथ पत्र दायर नहीं किया, एवं उनकी जगह पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हेहल रांची के प्राचार्य जियाउर रशिद के द्वारा प्रति शपथ पत्र दायर किया गया है, जो कि सक्षम पदाधिकारी नहीं है. साथ ही याचिका में उठाये  गये मुद्दों का जवाब देने में समर्थ नहीं है. प्रार्थी के अधिवक्ता विनोद सिंह के मुताबिक हाइकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाइकोर्ट के आदेश को मजाक नहीं बनाया जाये. क्या किसी चपरासी को भी अधिकृत कर  प्रतिस्थापित प्रति शपथ पत्र दायर कराया जा सकता है?

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मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन एवं न्यायधीश सुजीत नारायण प्रसाद के द्वारा  याचिकाकर्ता  में से किसी एक के द्वारा ही प्रति शपथ पत्र दायर करने को कहा गया है.

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