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दुर्गापुर : #NIT के 3 रिसर्चर्स ने एक बूंद रक्त से #BreastCancer का पता लगाने वाला उपकरण बनाने का किया दावा

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Durgapur : एनआईटी, दुर्गापुर के बायो-टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट एंड इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ने संयुक्त रूप एक बायो-सेंसर स्ट्रिप बेस्ड डिवाइस का आविष्कार किया है. शोधकर्ताओं का दावा है कि यह बायो-सेंसर स्ट्रिप में रक्त एक बून्द गिराने से ही घर बैठे यह पता चल जायेगा कि महिलाओं के स्तन कैंसर की संभावना कितना है.

यह बायो-सेंसर स्ट्रिप देखने में काफी हद तक प्रेगनेंसी टेस्ट स्ट्रिप की तरह है. किसी महिला के रक्त में कैंसर के बायो मार्कर का स्तर प्रति मिलीलीटर 5 नैनोग्राम से अधिक है तो यह उपकरण उस महिला के स्तन कैंसर होने की संभावना का अनुमान लगा सकता है.

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नौ महीने के प्रयास से हुआ अविष्कार

इस उपकरण से चेतावनी संदेश प्राप्त कर महिलाएं ऑन्कोलॉजिस्ट के शरण में जा सकेंगी. इस बायो-सेंसर स्ट्रिप बेस्ड डिवाइस का आविष्कार प्रयोगशाला में बीते नौ महीने तक किये गए अथक प्रयास के बाद किया गया है.

सोमवार को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दुर्गापुर के बायो-टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के शोधकर्ता मणिदीपा घोष, सागरिका दीप्ती और इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट शोधकर्ता चिरंजीव कोले नामक इन तीन शोधकर्ताओं (जो ब्रेस्ट कार्सिनोमा बायो-मार्कर अध्ययन से जुड़े है) ने स्तन कैंसर का पता लगाने वाले उपकरण के आविष्कार करने का दावा किया है.

दोनों विभागों के छात्र भी अध्ययन में शामिल

बताया गया है कि इन दोनों विभागों के छात्र भी इस अध्ययन में शामिल हैं. तीन शोधकर्ताओं का दावा है कि बायो-कैंसर डिवाइस के आविष्कार के फलस्वरूप बहुत जल्द ही घर बैठ अथवा स्वास्थ्य शिविर में महिलाये एक बून्द रक्त उस डिवाइस में गिराते ही उन्हें पता चल जायेगा कि उनके शरीर के स्तन कैंसर कि संभावना है या नहीं.

एनआईटी शोधकर्ताओं का दावा है कि यह अध्ययन एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुका है. उन्होंने बताया कि इस  डिवाइस का बाजार में कीमत तक़रीबन दस हजार रूपये होगी. हालांकि भविष्य में इस डिवाइस को आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.

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लागत को 100 रुपये के अंदर रखने की कोशिश

एनआईटी सूत्रों के अनुसार, परीक्षण की लागत सौ रुपये के अंदर करने कि कोशिश की जा रही है ताकि साधारण घर की महिलाएं घर पर या स्वास्थ्य शिविर में अपने रक्त के नमूने की जांच करके आसानी से स्तन कैंसर का निदान पा सकें.

बताया गया है कि हर साल लगभग 1, 60, 000 महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित होती हैं, जिनमें से लगभग 87,000  महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है. लेकिन वर्तमान में कैंसर स्क्रीनिंग के लिए मैमोग्राफी परीक्षण काफी महंगा और कष्दायक है.

अधिकांश महिलाएं इस तरह के परीक्षण से बचना चाहती है. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए इस तरह की परीक्षा संभव नहीं है. एनआईटी शोधकर्ताओं द्वारा आविष्कार किया गया यह उपकरण, कम लागत पर स्तन कैंसर का पता लगाना आसान बना देगा. माना जाता है कि शुरुआती चरण में स्तन कैंसर का पता चल जाय उसे ठीक करना संभव है.

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