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दुर्गा पूजा : यहां नौ तरह के पत्तों से होता है देवी की प्रतिमा का निर्माण

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Ranchi : राजधानी रांची में एक स्थान ऐसा है, जहां के लोगों ने आज भी अपनी विरासत को सहेजकर रखा है. जगन्नाथपुर क्षेत्र के बड़कागढ़ स्थित नागवंशी परिवार के सदस्यों की दुर्गा पूजा कई मायनों में अलग है. यहां जगन्नाथपुर मंदिर के समीप नागवंशी राज परिवार द्वारा आज भी पूरे रस्मो-रिवाज के साथ समाज के हर जाति-समुदाय के लोगों के सहयोग से मां दुर्गा की आराधना की जाती है. यहां मां की प्रतिमा का निर्माण भी मिट्टी और पुआल से न होकर नौ अलग-अलग प्रकार के पत्तों से किया जाता है. इसमें मान, अशोक, बड़, पीपल, बेल, हल्दी व अन्य प्रकार के पत्ते शामिल होते हैं. पूजन में शामिल नागवंशी परिवार के वंशज प्रवीरनाथ  शाहदेव ने बताया कि वर्षों से यह पूजा शाहदेव परिवार द्वारा की जा रही है. इसमें चिंतामणि देवी की आराधना की जाती है. यह पूरी तरह से तांत्रिक विधि से की जाती है. रांची में इसकी शुरुआत शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की धर्मपत्नी वानेश्वरी कुंवर द्वारा की गयी थी, जो वर्तमान में भी उनके वंशजों द्वारा जारी है.

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बांस की डोली में बिठाकर लाया जाता है आनी गांव

श्री शाहदेव ने बताया कि माता की प्रतिमा को बांस की डोली तैयार कर उसमें बिठाकर माता को आनी गांव स्थित मंदिर तक ले जाया जाता है, जहां विधी-विधान से मां की पूजा की जाती है एवं बलि दी जाती है. माता की डोली का निर्माण आदिवासी समुदाय के लोग करते हैं. जिस रास्ते से डोली को मंदिर तक ले जाया जाता है, उस रास्ते की साफ-सफाई दूसरे समुदाय के लोग करते हैं. कुल मिलाकर देखा जाये, तो सभी समुदाय मिलकर आपसी भाईचारगी और सौहार्द के साथ इस पूजा को संपन्न कराते हैं.

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पूरे भारत में मात्र तीन स्थानों पर ही होती है ऐसी पूजा

प्रवीरनाथ शाहदेव ने बताया कि मां चिंतामणि देवी की प्रतिमा भारत में मात्र तीन स्थानों पर ही है- बेलिया, पालकोट और बड़कागढ़. रांची के बड़कागढ़ में 1880 में पूजा आरंभ की गयी थी. इस पूजा की वजह से ही जगन्नाथपुर परिक्षेत्र को पुरुषोत्तम क्षेत्र माना जाता था. यानी इस परिक्षेत्र में बलि वर्जित है. जगन्नापुर क्षेत्र में बलि नहीं दी जा सकती, लेकिन माता के पूजन में बलि अनिवार्य होती है. इसे देखते हुए महारानी वानेश्वरी कुंवर ने जगन्नाथपुर के पास में ही आनी गांव में देवी माता के लिए मंदिर का निर्माण करवाया, जहां भगवती मां चिंतामणि और मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना कर उनकी आराधना की जाती है.

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