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एक साल पहले मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में की शिकायत, बिजली के नाम पर मिला तो सिर्फ खंभा

रैली निकालकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे ग्रामीण

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Dumka: सरकार नक्सल प्रभावित ईलाकों में विकास योजनाओं में तेजी लाने के प्रयास करने का दावा करती है. संताल परगना खासकर मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है. रघुवर सरकार ये भी दावा करती है कि जनसंवाद केन्द्र में आये लगभग 90 फीसदी मामलों का निपटारा होता है. पर क्या ये सिर्फ दावे हैं? काठीकुंड प्रखंड के पीपरा पंचायत के अंतर्गत बालीजोर गांव के घटवार टोला को देखकर तो यही लगता है. आजादी के सत्तर सालों के बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंची.

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2016 में सहायक विद्युत अभियंता को लिखी चिट्ठी
2016 में सहायक विद्युत अभियंता को लिखी चिट्ठी

बिजली के नाम पर लगे हैं सिर्फ खंभे

इस टोला में करीब 20 घर हैं. कई साल पहले यहां बिजली का पोल गाड़ा गया था. लेकिन बिजली के उन खंभों को कभी तार नसीब नहीं हुए. ग्रामीण आज भी पोल को देखकर ही बिजली आने की उम्मीद लगा बैठे हैं.ऐसा नही है कि ग्रामीणों ने सरकार या बिजली विभाग का दरवाजा नहीं खटखटाया है. ग्रामीणों ने बिजली के लिए 2016 में ही सहायक विद्युत अभियंता को लिखित आवेदन दिया था. लेकिन गांव के इस टोला में अभी तक बिजली नहीं पहुंची.

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जनसंवाद केन्द्र में शिकायत का भी असर नहीं

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ग्रामीणों को जब मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र (181) की जानकारी हुई तो कुछ आशा जगी. ग्रामीणों ने 8 मई 2017 को मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में मुख्यमंत्री से गुहार लगायी.जिसका जिसका शिकायत नंबर रजिस्टेशन नंबर OL/DUM/17-129है. जन संवाद में शिकायत किये एक वर्ष होने के बावजूद अभी तक इस टोला में बिजली नहीं पहुंची है.

रैली निकाल मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे ग्रामीण

अब कोई रास्ता नही बचा तो ग्रामीणों ने सर्व सम्मति यह निर्णय लिया है कि अगर विभाग एक सप्ताह के अन्दर टोला में बिजली नही पहुंचाती है तो ग्रामीण विवश हो कर दुमका में रैली के मध्यम से बिजली के लिय दुमका के उपायुक्त के माध्यम मुख्यमंत्री को बिजली और मुलभूत सुविधाओं के लिय मांग पत्र सौंपेंगे. इसके साथ ग्रामीणों ने यह भी निर्णय लिया कि ”बिजली नही तो वोट नही” अर्थात टोला में बिजली नही चालू किया जाता है तो चुनाव का बहिष्कार किया जायेगा.

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