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दुमकाः 1955 में बने कुएं से प्यास बुझा रहे ग्रामीण, डीप बोरिंग नहीं हुई चालू

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खरौनीबाजार पंचायत के गांव भीषण जलसंकट से जूझ रहे

कई गांवों में महिलाएं अपना आधा समय सिर्फ पानी लाने में बिता रही हैं

पानी की समस्या इस कदर विकाराल कि पशुओं को नहीं मिल रहा पानी

Dumka: जिले के गोपीकांदर प्रखंड के नमोडीह गांव के ग्रामीण भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं. 11 फरवरी 2019 को न्यूजविंग ने खरौनीबाजार पंचायत की पानी समस्या को लेकर खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान भी लिया था. तीन चापाकल की मरम्मत करायी गयी थी.

लेकिन अभी भी ग्रामीण एक से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने के लिये विवश हैं. कुछ टोला के ग्रामीण तो दूसरे गांव से पानी लाने के लिये विवश है. इस गांव के कई चापाकल पांच-छ: वर्षो से खराब है, लेकिन सुध लेने वाला कोई नही है. इस गांव के सभी टोला करीब एक-दूसरे से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

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इस क्षेत्र के ग्रामीणों ने विकास नहीं होने के कारण लोकसभा में वोट बहिष्कार का भी ऐलान किया था, लेकिन अंतिम क्षण में ग्रामीणों ने प्रजातंत्र में विश्वास रखकर वोट डाले.

अब ग्रामीणों का कहना है कि वोट देने के बाद भी हमारे गांवों की पानी समेत अन्य समस्याओ का समाधान नहीं हो रहा है. ग्रामीण इससे दुखित और मर्माहित है.

टोलों की स्थिति कुछ ऐसी है

(1)मंझी टोला

इस टोला में करीब 60 घर है. जिसकी जनसंख्या लगभग तीन सौ है. इस टोला में कुल तीन चापाकल है, जिनमें से दो करीब चार वर्षो से खराब है. ऐसे में इस टोला में मात्र एक चापाकल कुछ हद तक काम कर रहा है.

जो दस/पंद्रह बाल्टी पानी लेने के बाद ही बंद हो जाता है. इस चापाकल में सोलर टंकी भी लगायी गयी थी, लेकिन पानी कम होने के कारण ये सफल नहीं हो पाया. और प्रखंड प्रशासन सोलर टंकी को अपने साथ ले गयी.

इलाके में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है. डोभा का पानी सुख जाने के कारण इस टोला के कुछ ग्रामीण करीब एक किलोमीटर दूर नीचे स्थित कुएं से और कुछ ग्रामीण करीब एक किलोमीटर दूर स्थित स्कूल से पीने का पानी लाने के लिय विवश हैं.

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इस टोला के ग्रामीणों का कहना है कि सरकार इस टोला में एक डीप बोरिंग कराये और नया चापाकल लगाया जाये. साथ ही खराब चापाकल की मरम्मत की जाये और एक सोलर टंकी लगायी जाये.

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(2)पहाड़िया टोला

इस टोला में करीब 25 घर है, जिसकी जनसंख्या करीब 125 है. इस टोला में अधिकतर आदिम जनजाति के पहाड़िया आदिवासी रहते हैं. इस टोला में कुल चार चापाकल है और सभी 3-6 वर्षो से खराब है. इसकी सुध लेने वाला कोई नही है.

जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं करवायी गयी है. इस टोला के ग्रामीण करीब एक किलोमीटर नीचे स्थित कुएं से पीने का पानी लाते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि यह कुआं भी जल्द सूखने के कगार पर है. ग्रामीणों ने कहा इस टोला में 20/25 दिन पहले डीप बोरिंग की गयी है. लेकिन अब तक उसे चालू नही किया गया है.

टोला के ग्रामीणों का कहना है कि डीप बोरिंग को जल्द से जल्द चालू किया जाये. साथ ही सभी चापाकलों की जल्द मरम्मत की जाये और सोलर टंकी भी दी जाये.

(3)कमार टोला

इस टोला में कुल 22 घर हैं, जिसकी जनसंख्या करीब 110 है. इस टोला में एक मात्र चापाकल है, जो चार वर्षो से खराब है. टोला के ग्रामीण करीब डेढ़ किलोमीटर दूर दूसरे गांव दुंदवा से पीने का पानी लाते हैं.

ग्रामीणों ने कहा कि इस टोला में 20/25 दिन पहले डीप बोरिंग की गयी है. लेकिन अब तक उसे चालू नहीं किया गया है. इस टोला के ग्रामीणों की झारखंड सरकार से मांग है कि इलाके में जल्द से जल्द डीप बोरिंग को चालू किया जाये. और खराब चापाकल की मरम्मत के साथ ही सोलर टंकी लगायी जाये.

(4)आमेरजोला टोला

इस टोला में भी कमोवेश वही स्थिति है.इस टोला के ग्रामीणों का मांग है कि एक नया चापाकल लगाया जाये.

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