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#दुमकाः नौवीं बार शिबू होंगे सांसद या तीसरी बार खिलेगा कमल

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Ranchi: संथाल में लोकसभा सभा क्षेत्र संख्या के हिसाब से भले ही तीन हो. लेकिन दुमका लोकसभा क्षेत्र कई मामले में दोनों लोकसभा क्षेत्र पर भारी पड़ता है. आठ बार से शिबू सोरेन का वहां से सांसद होना दुमका की अहमियत को दर्शाता है. नौंवी बार एक बार फिर से सांसद बनने के लिए जेएमएम की तरफ से शिबू सोरेन मैदान में हैं. तीसरी बार शिबू के साथ दो-दो हाथ करने के लिए बीजेपी ने सुनील सोरेन को मैदान में उतारा है. दुमका लोकसभा क्षेत्र में दोनों ही आदिवासी चेहरा हैं. दुमका को जहां जेएमएम की पुश्तैनी सीट माना जाता है, वहीं बीजेपी इस बार दुमका में पूरी ताकत झोंक देने के मूड में है. बीते पांच साल में सीएम रघुवर दास ने संथाल के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा समय बिताया है. अपनी सरकार की हर योजना का बखान उन्होंने चुनाव आने से काफी पहले ही शुरू कर दिया था. लेकिन उसका नतीजा क्या होता है, यह देखना बाकी है.

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क्या बीजेपी जीत के आंकड़े को तीन कर पाएगी

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दुमका में बीजेपी ने दो बार जीत दर्ज की है. दोनों बार बाबूलाल ने ही बीजेपी की झोली में यह सीट डाली है. 1998 और 1999 में हुए दोनों लोकसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी ने बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की. लेकिन उसके बाद या पहले बीजेपी का कोई भी उम्मीदवार दुमका से जीत दर्ज नहीं कर पाया. पिछले विधानसभा की बात की जाए तो दुमका सीट से हेमंत सोरेन की हार की शक्ल में संथाल में जेएमएम को एक बड़ा झटका लगा था. हेमंत को बीजेपी की लुईस मरांडी ने 5262 वोट से हराया था. जिसका इनाम भी उन्हें मंत्री पद के रूप में मिला था. लुईस मरांडी की दुमका विधानसभा से जीत ने 2014 में बीजेपी में एक जान फूंकने का काम किया था. देखना है कि बीजेपी की यह जीत की पताका आगे भी बढ़ती है या वहीं रुक जाती है.

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दुमका लोकसभा का चुनावी समीकरण

दुमका लोकसभा में पिछले तीन बार से बीजेपी दूसरे नंबर पर रही है. दो बार लगातार 2009 और 2014 में सुनील सोरेन ने शिबू सोरेन से मात खायी है. 2009 में जहां सुनील सोरेन को 18,812 वोट से हार का सामना करना पड़ा. वहीं मोदी लहर यानी 2014 में हार का अंतर बढ़ कर 39,030 हो गया. दो बार मिली हार और हार के अंतर का बढ़ता जाना सुनील सोरेन के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है. दुमका लोकसभा में अंदर छह विधानसभा की सीटें आती हैं. दुमका, जामताड़ा, सारठ, जामा, शिकारीपाड़ा और नाला. दुमका और सारठ को छोड़ बाकी सभी चार विधानसभा विपक्ष के कब्जे में है. इस लिहाज से महागठबंधन का उम्मीदवार निश्चित तौर से दुमका लोकसभा में बीजेपी से ज्यादा मजबूत माना जा रहा है. ऊपर से जब शिबू सोरेन जैसी शख्सियत उम्मीदवार हों तो राजनीतिक समीकरण पहले से बताना जरा मुश्किल होता है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में नाला, जामताड़ा और जामा में बीजेपी के प्रत्याशी मामूली अंतर से दूसरे नंबर पर थे.

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