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आदिवासी परंपरा :  संताल समुदाय के लोगों ने ‘छटियर’ धार्मिक अनुष्ठान का किया आयोजन

Dumka : संताल समुदाय में जन्म से मृत्यु तक कई धार्मिक अनुष्ठान होते हैं. इसमें ‘छटियर’ महत्पूर्ण अनुष्ठान है. दुमका प्रखंड के मकरो गांव में मंझी बाबा (ग्राम प्रधान) मिस्त्री मरांडी की अध्यक्षता में संताल आदिवासी का ‘छटियर’ धार्मिक अनुष्ठान हर्सोल्लास के साथ अयोजन किया गया. छटियर गुरु के रूप में बाबा मंगल मुर्मू ने 80 लोगो का छटियर किया.

जिसमे बच्चे, लड़के और लडकियां शामिल थीं. संताल आदिवासियों की मान्यता है कि छटियर के बिना हर कर्म अधूरा है. सामान्यतया ‘छटियर’ बच्चे के जन्म के तीन से पांच दिन के अन्दर ही करा लेना चाहिए. लेकिन वर्तमान समय में यह शादी के समय भी किया जाता है.

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‘छटियर’  दो तरह के होते हैं ”जोनोम छटियर”  और ”चाचु छटियर”. बच्चे के जन्म के तीन से पांच दिन के अन्दर के ‘छटियर’ को ”जोनोम छटियर” कहा जाता है. जो बच्चे उस समय किसी कारण वश छटियर नही करा पाते हैं वे शादी के पहले तक इसे अंजाम कर लेते हैं. इसे से ”चाचु छटियर”  कहा जाता है.

संताल आदिवासियों की मान्यता है कि बिना ‘छटियर’ के मांग में सिंदूर भी नहीं लगा सकते हैं. अर्थात बिना छटियर के संताल आदिवासी लड़की और लड़के शादी नही कर सकते हैं. संताल आदिवासियों में यह भी मान्यता है कि ‘छटियर’ के बिना कोई भी व्यक्ति सिरमापूरी (स्वर्ग) में नहीं पहुंच सकता.

इसलिए बिना ‘छटियर’ किये मृत्यु होने पर अंतिम कर्म से पहले उसका ‘छटियर’ किया जाता है. ‘छटियर’  बच्चा-बच्ची या लड़का-लड़की दोनों का होता है.

अनुष्ठान में पंरापरगत आदिवासी स्वशासन का मिलती है झलक

‘छटियर’ में इष्ट देवताओं के साथ-साथ पूर्वजों के नाम से भी विनती-बखेड (प्रार्थना) की जाती है. ‘छटियर’ के दिन गांव के मोड़े होड़ नायकी, मंझी बाबा, जोग मंझी, गुडित, प्राणिक आदि को सबसे पहले शरीर में तेल लगाया जाता है. और सिर, कान में सिंदूर लगाया जाता है.

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आदिवासी स्वाशासन व्यव्स्था में इन पदाधिकारीयों का महत्पूर्ण स्थान भी है. उसके बाद ”धय बूढी” बच्चों पर पानी छिड़क कर नहलाती/शुद्धिकरण करती है. और तेल लगाती हैं. उसके बाद धर्म गुरु विनती-बखेड़ (प्रार्थना) करते हैं. अन्त में सभी नाचते-गाते हैं.

जिसे छटियर नृत्य कहते हैं. छटियर कराने वाले सभी परिवार अपने साथ एक हडिया गोड़ोम हंडी (राइस बियर) लाते हैं. इसे लेकर  अनुष्ठान के समय नाचते हुए तीन बार घूमते हैं.

मौके पर ये लोग थे मौजूद

पिछलने दिनों इस तरह का एक आयोजन हुआ. इस धार्मिक अनुष्ठान में स्टीफन मरांडी, मुखिया चमेली टूडू, मनोहर मरांडी सीताराम मुर्मू, रूबी लाल मरांडी, बालेश्वर मुर्मू, सरदार मुर्मू, बाबूधन मरांडी, छोटेलाल मरांडी, पौल हांसदा, पीयस हांसदा के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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