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दुमकाः करमांटाड़ गांव के लोग आज भी ढिबरी युग में जीने को विवश

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Dumka: एक ओर रघुवर सरकार ने 2018 तक झारखंड के हर गांव और हर घर को बिजली पहुंचाने का वादा किया था. वही राज्य की उपराजधानी दुमका का करमांटाड़ गांव इन दावों की पोल खुलता है. यहां के लोग आज भी ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. इस गांव में करीब 75 घर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि करीब सात साल पहले पोल, तार और छोटे ट्रांसफॉर्मर तो लगाये गए थे, लेकिन बिजली कभी नहीं आयी.

बिजली के इंतजार में टूटने लगे तार

इतने सालों से बिजली का इंतजार कर रहे बिजली के तार और पोल भी अब तो कई जगहों से टूटने लगे हैं, या गिर गए हैं. बिजली नहीं होने से ग्रामीणों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालात ये हैं कि ग्रामीणों को पैसा देकर बैटरी से मोबाइल फोन की बैटरी चार्ज करनी पड़ती है. जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाकर हार चुके ग्रामीणों ने अब इसकी शिकायत सीएम जनसंवाद केंद्र में की है. नाराज ग्रामीणों को कहना है कि गांव में बिजली नहीं आयी तो आनेवाले चुनाव में वो वोट नहीं डालेंगे.

बिजली के साथ-साथ नेटवर्क की भी यहां काफी समस्या है. यहां मोबाइल टावर का सिग्नल भी ना के बराबर आता है. ऐसे में ग्रामीणों को परिजनों से बात करने में भी समस्या होती है. ग्रामीणों ने एकबार फिर बिजली की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इस मौके में सुभाष टुडू, लखीराम हांसदा, चारलेस मुर्मू, होपा हांसदा, कोर्नेलुस मुर्मू, मानवेल हांसदा,निकोलस हांसदा, संजय हांसदा, शिवधन हांसदा, रोशन मरांडी, फिलिप हांसदा, अन्दिरियास हांसदा के साथ काफी संख्या में लोग शामिल थे.

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