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दुमका : कैसे पूरा होगा सीएम का वादा, आज भी गांव के लोग डिबिया युग में जीने को विवश

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Dumka : झारखंड में कोयले का भंडार है. इसके बाद भी झारखंड को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है. राज्य में ऊर्जा संकट का हाल यह है कि गांव की बात तो दूर, शहरों में भी घंटों पावर कट रहता है. जिला के रानेश्वर प्रखंड की तालडंगाल पंचायत के तारादह गांव के ग्रामीण अभी भी डिबिया युग में जीने को विवश हैं. गांव में करीब 70 घर हैं. गांव में करीब सात वर्षों से बिजली नहीं है. सात वर्ष पूर्व ट्रांसफॉर्मर और बिजली का तार तो लगाया गया था, लेकिन कभी बिजली चालू ही नहीं किया गया. अभी हालात ऐसे हैं कि पोल के तार और ट्रांसफॉर्मर का क्वॉइल भी चोरी हो गये हैं. इतना ही नहीं, बिजला का इस्तेमाल नहीं होने की स्थिति में भी कई बार बिजली बिल आ जाता है.

ग्रामीणों ने कहा- बिजली नहीं, तो वोट नहीं

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संतालपरगान के कई गांव अब बिजली नहीं तो वोट नहीं के नारे से गूंजने लगे हैं. ग्रामीणों ने गांव में बिजली के लिए विभाग में कई बार आवेदन दिया, लेकिन अब तक गांव में बिजली बहाल ही नहीं हो सकी. ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से काफी नाराज हैं. ग्रामीणों ने मन बना लिया है कि अब की बार गांव में बिजली नहीं आयी, तो वोट का बहिष्कार करेंगे. ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में जल्द दर्ज करने की बात भी कही. साथ ही, ग्रामीणों ने बैठक कर कहा कि बिजली नहीं आयी, तो वे वोट बहिष्कार करेंगे. बैठक में भुटू मुर्मू, सानमुनि हांसदा, झुमरी हेम्ब्रोम, धनीराम सोरेन, श्रीपति गोराई, निमाई पाल, बहादुर मरांडी, धर्मपाल, सुनीता मुर्मू, रोजमेरी टुडू, सिमोन मरांडी, संन्यासी पाल, धनमुनी सोरेन, पकलू सोरेन, रसोनी किस्कू, सूरजमुनि सोरेन, फुलमुनी मुर्मू, किस्टू मरांडी, जोहन मुर्मू, अमीन मुर्मू, बिटी मरांडी, जोहन मुर्मू, चंदन मुर्मू, रामधन बेसरा, अभिनव मुर्मू के साथ काफी संख्या में ग्रामीण महिला और पुरुष उपस्थित थे.

क्या सीएम रघुवर दास 2019 के चुनाव में जनता से वोट नहीं मांगने जायेंगे

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मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 30 अगस्त 2017 को गढ़वा के रमना प्रखंड के भागोडीह गांव में दवा किया था कि  2018 तक राज्य के सभी 32 हजार गांवों के हर घर तक न सिर्फ बिजली पहुंच जायेगी, बल्कि सातों दिन 24 घंटे बिजली आपूर्ति भी की जायेगी़. उन्होंने दावा किया था कि यदि ऐसा नहीं कर पाये, तो वह 2019 के चुनाव में जनता से वोट मांगने नहीं जायेंगे. सीएम ने यह दावा जिस समारोह में किया था, उस समारोह में झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक निरंजन कुमार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ, मनिका विधायक हरेकृष्ण सिंह मौजूद थे. अब सवाल यह उठता है कि क्या सीएम रघुवर दास 2019 के चुनाव में जनता से वोट नहीं मांगने जायेंगे.

राजधानी में तो बिजली का ठिकाना नहीं, सुदूर गांवों की बात बेमानी : झाविमो

झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कितनी विडंबना है कि जिस झारखंड की बिजली से देश के कई राज्य ही नहीं, दूसरे देश तक रोशन होते हों, उसी राज्य में बिजली की स्थिति भयावह है. यह काफी दुखद पहलू है. झारखंड की राजधानी रांची में तो निर्बाध बिजली आपूर्ति का ठिकाना नहीं है, सुदूरवर्ती गांवों-इलाकों में बिजली आपूर्ति के बारे में सोचना भी बेकार है. 13 दिसंबर को तो राजधानी में बड़ा बिजली संकट देखा गया. 360 मेगावाट तक की लोड शेडिंग रही. वहीं, पिछले लगातार सात दिनों से राजधानी में पांच-सात घंटे और राज्य के हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद सहित लगभग आधा दर्जन जिलों में 10-10 घंटे तक की बिजली कटौती ने लोगों को रुला रखा है. पूरे राज्य में 250-300 कम मेगावाट बिजली की भरपाई लोड शेडिंग करके की जा रही है. इसका सीधा असर जनजीवन व व्यवसाय पर पड़ रहा है. यह स्थिति सर्द मौसम की है. अब समझा जा सकता है कि सरकार बिजली पर कितनी संवदेनशील है. सरकार ने कई जिलों को पूर्ण विद्युतीकरण का दर्जा दिया है, यह केवल कागजी है. पूरे प्रदेश में बिजली की स्थिति पूरी तरह लचर हो चुकी है. बिजली की यह बदहाली राज्य के सीएम के उस बयान पर भी तमाचा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2018 तक पूरे प्रदेश को चैबीसों घंटे बिजली उपलब्ध नहीं करा पाया, तो वोट मांगने नहीं आऊंगा. अब इस मियाद में महज एक पखवारा का समय बचा है. मुख्यमंत्री को बिजली के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करते हुए जनता से माफी मांगनी चाहिए.

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