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दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहेबगंज जिले हाथीपांव और कालाजार से सबसे ज्यादा प्रभावित

  • हाथीपांव, कालाजार, रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए मनाया गया एनटीडी दिवस
  • स्टेट वेक्टर ऑफिसर ने कहा राज्य के चार जिले हाथीपांव और कालाजार के लिए चुनौती
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तैयार किया है रोडमैप

Ranchi: राज्य में 30 जनवरी नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज दिवस एनटीडी के रूप में मनाया गया. इसकी जानकारी देते हुए स्टेट वेक्टर बोर्न डिजीजेज अधिकारी डॉ. एसएन झा ने कहा कि इन बीमारियों के लिए देश में लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिसके मुताबिक साल 2030 से पहले एनटीडी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त कर लेना है.

भारत में विश्व स्वास्थय संगठन की ओर से इसके लिए रोडमैप तैयार किया गया है. जिसके अनुसार तैयारी की जा रही है. उन्होंने बताया कि इन रोगों में हाथीपांव, कालाजार, कुष्ठरोग, रेबीज, मिट्टी संचारित कृमिरोग, रेबिज, डेंगू समेत अन्य बीमारियां शामिल हैं. इन रोगों की रोकथाम संभव है. लेकिन फिर भी हजारों लोगों की मौत इन बीमारियों से होती है. तो वहीं कुछ विकलांग हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि देश भर में ये दिवस मनाया गया.

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कालाजार और हाथीपांव में सुधार

श्री झा ने बताया कि इन रोगों के नियंत्रण कार्यक्रमों को वैश्विक रणनीतियों पर चलाया जाता है. तय सालाना बजट भी रहता है. भारत में कालाजार और हाथीपांव के उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. देश में फिलहाल ऐसे मामलों में कमी देखी जा रही है.
उन्होंने कहा कि राज्य के 22 जिलों में हाथीपांव और कालाजार से प्रभावित 4 जिले गोड्डा, पाकुड़ दुमका और साहेबगंज जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं.

लेकिन राज्य इन रोगों के खिलाफ ठोस कदम उठा रहा है. कोविड-19 की वजह से इन रोगों पर कुछ काम बाधित हुए. लेकिन फिर से इस पर गतिविधियां शुरू की जा रही हैं. एनटीडी के खिलाफ राज्य के प्रयासों के बारे में डॉ. झा ने कहा कि कालाजार कीटनाशक छिड़काव के साथ ही सभी संबंधित घरों में स्टीकर, सार्वजनिक स्थानों में पोस्टर लगा कर, लोगों में जागरुकता का प्रचार किया जा रहा है.

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कुछ रोगों के लिए बन रहा प्लटेफॉर्म

हाथीपांव, कालाजार, मिट्टी से संचारित कृमिरोग और कुष्ठरोग के लिए प्लेटफॉर्म बनाये जा रहे हैं. डॉ झा के मुताबिक जहां भी संभव हो मामलों का पता लगाने, वेक्टर कंट्रोल, मास ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन आदि प्रयासों का समन्वय किया जा सकेगा. वेक्टर कंट्रोल के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय मजबूत करने से डेंगू, हाथीपांव और कालाजार के मामलों में लाभ हुआ है.

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