DumkaJharkhandNEWS

Dumka: चुनाव के दौरान नेता चापाकल लगाने का देते हैं झांसा, गांव में अब तक दूर नहीं हो सका पेयजल संकट

  • ग्रामीणों ने सीएम को ट्वीट कर भेजा आवेदन, प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं डहालंगी के ग्रामीण

Dumka: बिहार से अलग हुए झारखंड को 20 साल होने को हैं. झारखंड के संताल परगना में ऐसे कई गांव है जो आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए मोहताज हैं. मसलिया प्रखंड का आदिवासी गांव डहालंगी उनमें से ही एक है. जो पहाड़ के नीचे बसा है.

गांव आमगाछी पंचायत के अंतर्गत आता है. गांव से दो किलोमीटर पहले ही पक्की सड़क निझोर गांव में ही खत्म हो जाती है. डहालंगी गांव में “खुले में शौच मुक्त गांव” का साइन बोर्ड लगा दिया गया है. लेकिन यहां वर्षों से पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है.

इसे भी पढ़ें – बाजार में पलाश ब्रांड से बिकेंगे एसएचजी के प्रोडक्टस, Online Marketing के लिए भी बनायी जा रही योजना

ग्रामीणों ने हेमंत सरकार से चापाकल मरम्मती का किया आग्रह


डहालंगी गांव में कुल तीन टोले हैं. मांझी टोले में करीब 8, मारीडीह टोले में भी करीब 8, कलि टोला में करीब 14 घर हैं. ये सभी टोले आधा किलोमीटर से थोड़ा अधिक दूरी पर अवस्थित हैं. कलि टोला में आंगनबाड़ी के चापाकल को मिलाकर कुल तीन चापाकल हैं जिसमे आंगनबाड़ी का चापाकल पूरी तरह खराब है. वहीं अमीन सोरेन और गोविन्द मरांडी के घर के चापाकल को बहुत देर चलाने पर बहुत कम मात्रा में पानी निकलता है.

मारीडीह टोला और मांझी टोला में एक भी चापाकल नहीं है. मारीडीह टोला के ग्रामीण अपनी प्यास एक जर्जर पुराने कुएं के पानी से बुझाते हैं. इस टोले के ग्रामीणों का कहना है कि चापाकल की सुविधा नहीं होने के कारण हमलोग कुएं का प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं, इससे बीमार होने की संभावना तो बनी रहती है लेकिन क्या करें? ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मारीडीह टोला में नया चापाकल लगवाने की गुहार लगायी है.

मांझी टोला में एक भी चापाकल नही है. यहां के ग्रामीणों ने पोखरा के पास एक डडी बनाया हुआ है, उससे ही अपनी प्यास बुझाते हैं. इस टोला के ग्रामीणों का कहना है कि हमें पीने के पानी के लिए बहुत दिक्कत है. हमलोग डडी का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं. बीमारी होने का डर बना रहता है.

ग्रामीण यह भी कहते हैं, वर्षा के समय में पोखरा का दूषित पानी डडी में चला जाता है लेकिन कोई और व्यवस्था नही होने के कारण इसी दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं.

इसे भी पढ़ें –बिहार: विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन से अलग हुए जीतनराम मांझी

टोला में चुनाव प्रचार के दौरान नया चापाकल लगाने का दिया जाता है झांसा

टोला के ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता यह वादा कर जाते है कि चुनाव के बाद नया चापाकल लगवा दिया जायेगा. लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई नही आता है. और न ही नया चापाकल लगा है.

सरकार तक संवाद पहुंचाने के लिए लिखित आवेदन ट्वीट कर रहे ग्रामीण

डहालंगी गांव के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, सांसद सुनील सोरेन, दुमका उपायुक्त और मसलिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी मसलिया के नाम लिखित आवेदन ट्वीट किया है जिसमें खराब चापाकलों की मरम्मति के साथ मांझी टोला, मारीडीह टोला में नये चापाकल लगाने की गुहार लगायी गयी है.

लिखित आवेदन तैयार करने के दौरान ये ग्रामीण रहे मौजूद

लिखित आवेदन तैयार करने के दौरान तीनो टोले के ग्रामीण जिसमें छतिस मुर्मू, देव्रन हांसदा, कलम मुर्मू, सुरेश मुर्मू, कलिशल सोरेन, हेदमा सोरेन, रासमुनी टुडू, बड़का मुर्मू, सहदेव मुर्मू, सुजो किस्कू, पानमुनी मुर्मू, स्नेहलता मुर्मू, रूपलाल सोरेन, रसिक सोरेन, देवीलाल किस्कू, पकुनी किस्कू, लिलमुनी सोरेन, जोहोन किस्कू, निर्मल सोरेन, तिलको टुडू, बबुसोल सोरेन, शांति मुर्मू, सकदी टुडू, सोनामुनी मुर्मू, संजू किस्कू, सुजो किस्कू आदि उपस्थित थे.

इसे भी पढ़ें –29 अगस्त को देश का पहला इंश्योरेंस लोक अदालत, झारखंड से होगी शुरुआत

5 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button