NEWSWING
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

आरयू के टीआरएल विभाग में स्‍थायी शिक्षकों की कमी, फिर भी थोक के भाव बंट रही पीएचडी की डिग्रियां

तीन स्‍थायी शिक्षकों के जरिए होती हैं 9 भाषाओं की पढ़ाई, दी गई 45 पीएचडी डिग्रियां

101

Ranchi: रांची विश्वविद्यालय (आरयू) के जनजातीय क्षेत्रीय भाषा विभाग (टीआरएल) में शिक्षकों का टोटा है, इसके बावजूद यहां बड़ी संख्या में पीएचडी की डिग्रि‍यां बांटी जा रही हैं. दरअसल, इस विभाग में गिनती के तीन स्थायी शिक्षक हैं. जबकि, यहां झारखंड की नौ आदिवासी भाषाओं की पढ़ाई होती है. जो कि अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है.

बात शिक्षकों की कमी और कोर्स तक ही सीमित नहीं है. सबसे बड़ा अजूबा यहां का पीएचडी कोर्स है. औसतन हर साल यहां 45 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाती है. यह अपने-आप में एक अजूबा है. पूरे देश में यह एक मात्र ऐसा विभाग है जो इतनी संख्या में पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है, वह भी तीन शिक्षकों के माध्यम से. केवल दो वर्षो में टीआरएल विभाग से 71 शोधार्थियों ने पीएचडी की डिग्री ली है.

इसे भी पढ़ें: रांची : सुरक्षा और कानून को ताक में रख कर युवतियां चलाती हैं दोपहिया वाहन

ये तीन शिक्षक हैं विभाग के स्थायी शिक्षक

डॉ टीएन साहू, हरि उरांव और उमेश नंद तिवारी टीआरएल में स्थायी शिक्षक के रूप में काम रहे हैं. इन्हीं की देख-रेख में शोधार्थी छात्र पीएचडी करते हैं. लेकिन, इन छात्रों के गाइड इस विभाग के न होकर अन्य कॉलेजों के शिक्षक होते हैं. दरअसल इस विभाग में जिस प्रकार से पीएचडी की डिग्री दी जा रही है, यह वाक्‍या कई तरह के सवाल खड़ा करता है. क्या कोई  विभाग शिक्षकों की कमी के बाद भी बड़े पैमाने पर पीएचडी की डिग्री इस प्रकार प्रदान कर सकता है?

इसे भी पढ़ें: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांटः एस्सेल इंफ्रा ने कहा- 90 % डेब्ट लाइबिलिटी वहन करे सरकार

madhuranjan_add

विभाग चल रहा है अतिथि शिक्षकों के भरोसे

टीआरएल विभाग में कुल 700 छात्र अध्यनन करते हैं इनको पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से 45 अतिथि शिक्षकों को बहाल किया गया है. ये अतिथि शिक्षक भी यहीं के पूर्ववत्ती छात्र हैं, जो अब यहां सेवा दे रहे हैं. इसमें से ज्यादतर शिक्षकों ने इस विभाग से पीएचडी और नेट की डिग्री प्रदान की है. यहां अध्ययन करने वाले छात्रों में से हर वर्ष 25 छात्र नेट और जेआरएफ में सफल होते हैं.

क्या कहते हैं विभागाध्यक्ष

टीआरएल के विभागाध्यक्ष डॉ टीएन साहू ने कहा कि शिक्षकों का घोर अभाव है. शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए विश्वविद्यालय और राज्य सरकार पहल कर रही है. जहां तक बात पीएचडी डिग्री की है तो नौ भाषाओं के विभाग चल रहे हैं. इसलिए इतनी संख्या में इस विभाग से शोधार्थी पीएचडी की डिग्री ले रहे हैं.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Averon

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: