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रंजय हत्याकांड में पुलिस की धीमी जांच से परिजनों में आक्रोश

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Dhanbad: झरिया के विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या के मामले में जांच सुस्त क्यों है? जांच से मृतक की विधवा रूमी सिंह संतुष्ट नहीं है. उनका कहना है कि जब तक सरायढेला थानेदार निरंजन तिवारी इस केस के आईओ रहेंगे, इंसाफ नहीं होगा. मामले का सबसे चिंताजनक पहलू है कि केस में कोई एविडेंस नहीं मिला है. सिर्फ बयानों पर केस की गुत्थी सुलझाने का दावा किया जा रहा है. रंजय की हत्या करनेवाला दूसरा शूटर नहीं मिला है. वह पिस्टल नहीं मिली है, जिससे हत्याकांड को अंजाम दिया गया. घटनास्थल से बरामद खोखे हैं. रंजय की पोस्टमार्टम रिपोर्ट है. प्रत्यक्षदर्शी बताये गये राजा यादव का बयान है, पर उसके बयान को पुलिस पूरी तरह नहीं मान रही है.

पिस्टल का नहीं मिलना खड़ा करता है सवाल

पुलिस ने शूटर बताकर नंदकिशोर उर्फ मामा उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया है. पर कोई पिस्टल नहीं मिली है. मामा के साथ दूसरा कौन था? नाम चंदन शर्मा बताया गया है. वह पकड़ा नहीं गया है. ऐसे में मौखिक बयान कोर्ट में कैसे टिकेंगे? रंजय की पत्नी रूमी का कहना है कि सारा शहर जानता है कि रंजय की हत्या किसने और क्यों करवायी. ऐसी स्थिति में एकलव्य सिंह से पूछताछ नहीं होना बताता है कि मामले में सही दिशा में कार्रवाई नहीं हो रही है. रूमी ने मामले में अनुसंधानकर्ता पर आरोप लगाकर शिकायत मुख्यमंत्री से भी की है. अब नये एसएसपी से सपरिवार मिलेंगी. वैसे यह तो स्पष्ट है कि रंजय सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने काफी विलंब से और अभी तक आधी-अधूरी ही कार्रवाई की है. जबकि, नीरज सिंह की हत्या के मामले में झरिया के भाजपा विधायक संजीव सिंह समेत सभी 11 लोग गिरफ्तार कर जेल में डाल दिए गये, जिनके नाम अनुसंधान के दौरान आये या प्राथमिकी में थे.

सत्ता का कोई आदमी प्रभावित कर रहा है केस को

बता दें कि नीरज सहित चार लोगों की हत्या से पहले रंजय की हत्या हुई पर सबूत के रूप में पुलिस को कुछ भी नहीं मिला है. सवाल है क्या भाजपा विधायक के करीबी की हत्या के इस मामले को सत्ता में प्रभावशाली कोई व्यक्ति प्रभावित कर रहा है? क्या राजनीति की कोई नयी बिसात बिछ रही है? अगर, ऐसा नहीं था तो हर्ष के सरेंडर का नाटक क्यों किया गया? रंजय हत्याकांड में पुलिस की सुस्ती का अर्थ क्या है? वहीं, विधायक संजीव सिंह के छोटे भाई सिद्धार्थ गौतम भाजपा से अलग लोकसभा चुनाव में नयी पारी खेलने की बात कह रहे हैं तो अर्थ यही निकाला जा रहा है कि भाजपा में उनके परिवार का ठिकाना महफूज नहीं है.

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