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Plan Plus पर नहीं चढ़ पा रही हैं 14वें वित्त की योजनाएं, पैसा पेंडिंग रहने से गांवों के विकास कार्यक्रमों पर पड़ रहा असर

Ranchi : राज्य में पंचायतों को 15वें वित्त की राशि जुलाई से जारी होनी शुरू हो चुकी है. आयोग से मिली राशि की पहली किस्त पंचायतों को आवंटित हो गयी है. अब तक 4 अरब 22 करोड़ 25 लाख रुपये पंचायतीराज संस्थाओं को दिये जा चुके हैं. उधर, 14वें वित्त की राशि कई पंचायतों के पास फंसी हुई है. मुखिया संघ के अनुसार प्लान प्लस में स्कीम को चढ़ाये जाने के बाद ही किसी स्कीम पर काम शुरू किये जाने का प्रावधान है. कंप्यूटर ऑपरेटरों की कमी और उनकी मनमानी से प्लान प्लस पर योजनाओं को चढ़ाने में उदासीनता बरती जा रही है. इससे ग्राम विकास के लिए बनी योजनाओं पर काम नहीं हो पा रहा है. इससे 14वें वित्त के पूरे पैसे का उपयोग नहीं हो पायेगा.

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3 पंचायतों पर है एक कंप्यूटर ऑपरेटर

राज्य में 4367 पंचायतें हैं. फिलहाल तीन पंचायतों पर एक-एक कंप्यूटर ऑपरेटरों को अनुबंध पर रखा गया गया है. राज्यभर में तकरीबन 1500 ऑपरेटर अभी सेवा दे रहे हैं. सभी ऑपरेटर ब्लॉक ऑफिस में रह कर ही काम करते हैं. पंचायत प्रतिनिधियों को अनुसार इससे वैसी पंचायतें जो प्रखंड मुख्यालय से दूर हैं, उनके लिए ब्लॉक ऑफिस जाकर काम कराना चुनौती साबित होती है.

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प्लान प्लस में योजनाओं को अपलोड करना जरूरी

14वें वित्त के पैसों का उपयोग करने में यह कहा गया था कि किसी भी योजना को प्लान प्लस पर चढ़ाना जरूरी है. ग्राम सभा गांव की जरूरतों के अनुसार योजनाओं (GPDP-ग्राम पंचायत विकास योजना) का चयन करेगी. इसे कार्यकारिणी से पास कराया जायेगा, इसके बाद इसे कंप्यूटर ऑपरेटरों की मदद से प्लान प्लस पर चढ़ाया जायेगा. ऐसा किये जाने के बाद ही उस योजना पर काम शुरू किया जा सकता है.

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पेंडिंग पड़े हैं 20 से 40 लाख रुपये

पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार कंप्यूटर ऑपरेटरों की कमी और डीपीएम (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी) के रवैये से जीपीडीपी को प्लान प्लस में चढ़ाये जाने में चैलेंज आ रहा है. इससे कई योजनाएं और उसका पैसा लंबित पड़ा रह जा रहा है. किसी पंचायत का 20 लाख तो किसी का 40 लाख तक पैसा फंसा रह गया है. पंचायतों का औसतन 10 लाख रुपये तक का काम अटका पड़ा है. इससे 2020-21 तक 14वें वित्त की समूची राशि खर्च करना मुश्किल हो गया है.

क्या कहता है मुखिया संघ

संघ के उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह के अनुसार चाहे जिस किसी के स्तर से 14वें वित्त के पैसे के उपयोग को लेकर दिक्कत आ रही हो, पंचायती राज विभाग को सामने आना चाहिये. उसे इस पर संज्ञान लेकर जवाबदेह लोगों को निर्देश जारी करना चाहिए.

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क्या कहता है विभाग

पंचायती राज निदेशक विनय राय के मुताबिक अगर किसी पंचायत में प्लान प्लस में योजनाओं को चढ़ाये जाने को लेकर शिकायत है तो वे जिला स्तर पर अपनी बात रखें. जरूरत पड़े तो वे मुख्यालय स्तर पर भी संपर्क कर सकते हैं.

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