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#Lockdown की वजह से उद्योगों को नहीं मिल रहा बाजार, उत्पादन पर भी असर, जानें आगे क्या होंगी चुनौतियां

बनी रही ऐसी ही स्थिति तो आने वाले छह महीने चुनौती से भरे होंगे

कच्चा माल होंगे महंगे, नकदी में आ सकती है कमी

Chhaya

Ranchi: लॉकडाउन के बाद उद्योगों के समक्ष अनेक चुनौतियां होंगी. लॉकडाउन के पहले चरण से उद्योग कारखाने बंद हैं. अब तीसरे चरण का लॉकडाउन समाप्त होने वाला है. और शायद 17 मई के पहले गृह मंत्रालय की ओर से लॉकडाउन 4 की घोषणा भी कर दी जाये, लेकिन रियायत बढ़ाते हुए.

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हालांकि लॉकडाउन 2 की घोषणा के साथ ही केंद्र ने उद्योगों को खोलने की छूट दी. वो भी जोन और ग्रामीण क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए. अब तक राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में ही उद्योग सही से नहीं खुल पाये हैं. इसमें मजदूरों और कच्चा माल की कमी एक मुख्य समस्या है. लेकिन इन समस्याओं के साथ, उद्योगों के समक्ष भविष्य की समस्याएं भी है.

रियायतों के साथ लॉकडाउन 4.0 घोषित भी किया जाता है, तो लघु, कुटीर, मध्यम उद्योगों के सामने चुनौती आने वाले छह महीने तक की है. लॉकडाउन के पहले चरण में केंद्र सरकार ने उद्योगों को जो दिशा-निर्देश दिये, अब उसके साइड इफेक्ट्स सामने आने लगे हैं. राज्य में बिजली के फिक्स्ड चार्जेस में छूट अब तक नहीं दी गयी है. कर्मचारियों को वेतन देना ही है. कारखानों के मैनेंटनेंस आदि.

बाजार नहीं होने से उत्पादन चालू रखना मुश्किल काम

कोरोना महामारी का भय इतनी आसानी से लेागों के जेहन से नहीं जाने वाला. बाजार में मांग की कमी के कारण आपूर्ति प्रभावित होगी. सबसे बड़ी समस्या मांग की होगी. जिससे वापस सामान्य होने में लंबा वक्त लगेगा. इसके बारे में बताते हुए पूर्व चेंबर अध्यक्ष दीपक मारू ने कहा कि अभी से ही परेशानियां है.

जो भी 20 फीसदी कारखाने चल रहे. वहां समस्या ये है कि बाजार तक सामान पहुंचाये कैसे. आने वाले समय में भी यहीं होगा. उत्पादन चालू रखना मुश्किल हो गया है. जो उद्योग चालू हो भी गये हैं, वहां अब और खर्च बढ़ गये हैं.

बिजली बिल, कारखाने का मैनेटेंनेस, मशीनों का रखरखाव, ऐसे में काफी असमंजस की स्थिति है. सरकार बाजार में थोड़ी रियायत देगी तो, उत्पादन और सप्लाई में कुछ राहत मिल सकती है. जिससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा. लेकिन कोरोना महामारी का भय लोगों के जेहन से इतनी आसानी से नहीं जाने वाला. और इसके दूरगामी परिणाम होंगे.

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महंगे होंगे कच्चा माल नकदी की आयेगी कमी

स्टेकहोल्डर विकास विजयवर्गीय ने कहा लॉकडाउन के काफी दूरगामी परिणाम होंगे. केंद्र सरकार ने बिना कुछ प्लानिंग के इसे लागू किया. कितनी भी रियायत उद्योगों को दी जाये, स्थिति सामान्य नहीं होने वाली है. असर ये होगा कि कच्चा माल महंगें हो जाएंगे . नकदी की कमी आयेगी. कोरोना का डर उद्यमी के साथ मजदूर, कर्मचारी, ट्रांसपोर्टर सब को रहेगा. जिससे उद्योगों को वापस जिंदा कर पाना मुश्किल होगा. उद्योग जगत को सामान्य होने में छह महीने तक का वक्त लग सकता है या इससे अधिक भी, लेकिन कम तो नहीं.

इन्होंने कहा कि मजदूरों की कमी रहेगी कारखानों में. जहां मजदूर रहेंगे भी तो, काम नहीं रहेगा. ऐसे में काम जेनरेट किया जायेगा.

लोन तभी लिया जायेगा जब काम हो

किसी भी अर्थव्यव्स्था की रीढ़ डिमांड होती है. कोरोना के कारण डिमांड कई महीनों तक प्रभावित रहेगी. भले कारखाने काम करें, लेकिन डिमांड के बिना कुछ नहीं है. और डिमांड तभी संभव है, जब बाजार में ढील दी जायेगी. या कुछ समय के लिये बाजार को खुला छोड़ा जायेगा.

अजय भंडारी नामक कारोबारी ने कहा की पिछले तीन लॉकडाउन के दुरगामी परिणाम ये होंगे, कि मांग जेनरेट करना मुश्किल हो जायेगा. उत्पादन का क्या करेंगे. केंद्र सरकार भले तीन लाख करोड़ लोन की घोषणा करें, लेकिन लोन तभी संभव है, जब काम हो. मांग के बगैर स्थिति सामान्य नहीं हो सकती. राम चंद्र कुमार ने कहा कि अभी से ही स्थिति काफी विकट है. आने वाले समय में और भी गंभीर हो जायेगी. क्योंकि काम जेनरेट करना सबसे मुश्किल होगा. क्योंकि बाजार में मांग कम रहेगी.

क्या हो सकता है इन समस्याओं का समाधान

कारोबारियों की मानें तो सरकार को आनेवाले दो साल तक ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिये जो राज्य में बन सकें, साथ ही जो जरूरी भी हो. इससे लघु, छोटे, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. ऐसा करने से बाहर से लौटे स्किल्ड एवं अन्य स्किल्ड लेबर को काम दिया जा सकेगा. लॉकडाउन का पालन करते हुए भी कम से कम चार से पांच घंटे बाजार नियमित खोले जाये. जिससे उद्योग चल पाये. सरकार कारोबारियों से वार्ता करें. जिससे उद्योग और व्यापार संचालित रहें.

वित्त मंत्री ने किया है तीन लाख करोड़ के कर्ज का ऐलान

इन सबके अलावा, बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमो समेत उद्यमों को बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा देने की घोषणा की. उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से मंगलवार को घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का ब्यौरा में इस स्वचालित कर्ज की घोषणा की. जो चार साल के लिये दिया जायेगा. वहीं पहले एक साल तक उद्यमियों को मूलधन नहीं चुकाने की सुविधा दी गयी है. लेकिन इस दौरान ब्याज दिया जायेगा. जिसकी दर अभी तय नहीं है.

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