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Infertility Problem: लेट से हो रही शादियों की वजह से तेजी से झारखंड के इस शहर में बढ़ रही बांझपन की समस्या

नशे की लत, गलत लाइफ स्टाइल और मल्टीपल पार्टनर ने इस समस्या को गंभीर बनाया

Sanjay Prasad
Jamshedpur: झारखंड के जमशेदपुर शहरवासियों में बांझपन यानि इनफर्टिलिटी तेजी से बढ़ रही है. लेट उम्र में हो रही शादियां, करिअर का दबाव, गलत जीवनशैली और नशे की आदत ने इस समस्या को और बढ़ाया है. शहर के स्पर्श आईवीएफ के क्लीनिकल डायरेक्टर और इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ.विनोद अग्रवाल बताते हैं क‍ि बड़े शहरों के साथ ही जमशेदपुर जैसे शहरों में भी यह समस्या विकराल रूप धारण कर रही है. हर रोज उनके क्लीनिक में ऐसे दंपत्ति आते हैं, जो बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं. हम पिछले छह साल से शहर में आईवीएफ यानि इन विट्रो फर्टीलाइज़ेशन, (जिन्हें सामान्य भाषा में टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से जाना जाता है) और इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन (आईयूआई) कर रहे हैं.

ज्यादातर वैसे दंपत्ति होते हैं, जिनकी उम्र 35-40 के पार कर जाती है. वे जब सभी तरफ से थक हार जाते हैं, तो हमारे पास आते हैं. लेकिन उम्र ज्यादा होने के बाद महिलाओं के अंडे और पुरूषों के वीर्य में कई तरह की कम्प्लीकेशंस आने शुरू हो जाते हैं. ऐसे में कई बार हमें डोनर की मदद लेनी होती हैं. बकौल डॉ.अग्रवाल, मेरा लोगों से एक ही अनुरोध होगा कि वे बहुत लेट करके नहीं आएं, क्योंकि जितना लेट होगा, इस तकनीक के जरिए सफलतापूर्वक गर्भाधारण होने और डिलीवरी की संभावनाएं कम हो जाती है. यही कारण है कि जब दंपत्ति आते हैं तो हम वैसे ही केस को लेते हैं, जिसका सक्सेस रेट ज्यादा हो. हम वैसे केस को नहीं लेते हैं, जिसमें सफल होने की संभावनाएं बेहद कम होती है. अच्छी बात यह है कि झारखंड में हमारा सक्सेस रेट सबसे ज्यादा है. आईवीएफ का सक्सेस रेट 70 फीसदी और आईयूआई का सक्सेस रेट 18 फीसदी है.
बांझपन की वजह


देर से शादी-डॉ.विनोद अग्रवाल ने बताया कि बांझपन एक दिन में नहीं आती है. वह हमारी गलत आदतों का परिणाम होता है. आज कल के युवा देर से शादी कर रहे हैं. यहां तक कि लड़कियां भी 30 साल के बाद शादी कर रही है, जो सही नहीं है. शादी 25 से लेकर 30 साल के बीच में हर हाल में हो जाना चाहिए. लड़कियों की तो जरूर होनी चाहिए, क्योंकि 35 साल के बाद उनमें अंडा बनने की क्षमता कम होने लगती है. यहां तक कि अंडे की क्वालिटी भी कम होने लगती है. जंक फूड की लत-जंक फूड हमारे शरीर के हर अंग को बुरी तरह से प्रभावित करता है. ऐसे खानों से शरीर की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति बांझ रह जाता है. नशे की लत-आज के युवाओं में नशा आम है. सिगरेट और शराब आम हो गया है, जबकि कई ड्रग्स के भी शिकार हैं. इससे केवल लीवर या फेफड़ा ही खराब नहीं होता, हमारी प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है. हेल्दी लाइफ स्टाइल नहीं होना-युवाओं में यह आम है. करिअर का प्रेशर और पैसा कमाने का जुनून उन्हें कहीं का नहीं रहने देता. शरीर तो बीमार हो ही जाता है, वे इस स्थिति में पहुंच जाते हैं कि एक बच्चे पैदा नहीं कर सकते. हर रोज फिजिकल वर्कआउट जरूरी है. आप कितने भी बड़े हैं, शरीर को इससे कोई मतलब नहीं है. उसे वर्कऑउट चाहिए, ताकि शरीर में खून का सर्कुलेशन होता रहे. टाइम के साथ सोना और सुबह में जल्दी जगना जरूरी है.
एबॉर्शन से बच्‍चेदानी हो जाती है खराब
मल्टीपल पार्टनर-नैतिकता में आई गिरावट ने युवाओं में लिव इन रिलेशन को बढ़ावा दिया है. शादी के पहले मल्टीपल पार्टनर होने से इन्फेक्शन का डर होता है. कई बार लड़कियों को एबॉर्शन कराना पड़ता है, जिससे बच्चेदानी खराब हो जाती है और बाद में वह मां नहीं बन पाती.

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