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एक तरफ इलेक्ट्रॉनिक कार-दूसरी तरफ इलेक्ट्रिसिटी के लिए त्राहिमाम ! उद्योगों को सालाना 1000 करोड़ का नुकसान

बिजली किल्लत के कारण डिफेंस के उद्योग झारखंड में नहीं- केंद्र अब दूसरे राज्यों में लगायेगी डिफेंस उपकरण के उद्योग

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Ranchi: अब बिजली विभाग के अफसर इलेक्ट्रिक कार की सवारी करेंगे. लेकिन सूबे की जनता को 24 घंटे बिजली नसीब नहीं. पिछले चार साल में वितरण निगम के अफसर दर्जनों बार जीरो कट पावर और क्वालिटी बिजली देने का दावा कर चुके हैं. इनके वादे की मियाद भी पूरी हो गई. लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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हाल यह है कि बिजली के कारण उद्योगों को सालाना 1000 करोड़ का नुकसान हो रहा है. वहीं उत्पादन कम होने के कारण राज्य सरकार को टैक्स में सालाना 500 करोड़ का नुकसान हो रहा है. ऑटोमोबाइल सेक्टर देश भर में उपकरणों का 34 फीसदी टैक्स देता है.

अब डिफेंस की इंडस्ट्रीज दूसरे राज्यों में होगी शिफ्ट

सुरक्षा उपकरण बनाने वाले उद्योग झारखंड में लगने वाले थे. लेकिन बिजली की उपलब्धता नहीं होने के कारण अब केंद्र ने इसे दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने की हामी भर दी है. राज्य में 50 बड़े, 5000 मध्यम और 12000 लघु उद्योग निबंधित हैं. उद्योगों को 500 से 550 मेगावाट बिजली दी जाती है. फिलहाल यह बिजली उद्योगों को 5 रुपये से 6.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से दी जा रही है.

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कैसे हो रहा उद्योगों को नुकसान

बिजली की उपलब्धता नहीं होने के कारण उद्योगों को जेनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है. जेनरेटर से बिजली उत्पादन में प्रति यूनिट 19 से 20 रुपये खर्च आता है. वहीं डीजल से एक मेगावाट बिजली उत्पादन में 15 हजार रुपये खर्च होता है. दिलचस्प यह है कि 10 जिलों में हर प्रतिमाह औसतन 88 बार बिजली ट्रिप करती है. किसी भी जिले में प्रतिदिन औसतन 20 घंटे से अधिक बिजली उपलब्ध नहीं रहती. गिरिडीह में औसतन 7 से 8 घंटे बिजली नहीं रहती है. धनबाद में प्रतिदिन औसतन 18 घंटे ही बिजली उपलब्ध रहती है.

घरेलू उपभोक्ताओं को सालाना 60 करोड़ का नुकसान

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क्वालिटी बिजली नहीं मिलने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं को सालना 60 करोड़ से अधिक का नुकसान वहन करना पड़ता है. इसका प्रमुख कारण है कि किसी भी जिले में प्रोपर अर्थिंग नहीं है. वितरण निगम का तर्क है कि झारखंड पहाड़ी इलाका है कि इसलिए प्रोपर अर्थिंग नहीं मिलती. वोल्टेज अप-डाउन रोकने के लिये आइसोलेटर और वैक्यूम सर्किट ब्रेकर नहीं लगाये गये हैं. गिरिडीह, कोडरमा, गुमला, लोहरदगा, साहेबगंज, डालटनगंज, दुमका और गढ़वा में हर दिन औसतन आठ घंटे बिजली नहीं रहती.

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किस जिले में प्रतिमाह कितने बार ट्रिपिंग

जिला प्रतिमाह ट्रिपिंग

रांची 104-169
गुमला 88-185
गिरिडीह 158-213
दुमका 142-201
देवघर 171-122
गोड्डा 122- 139
जमशेदपुर 114- 138
बोकारो 74-177
डालटनगंज 23-149
गढ़वा 149-221

क्या कहते हैं वाणिज्यकर के प्रमुख सलाहकार

वाणिज्य कर के प्रमुख सलाहकार सह ऑल इंडिया ऑटोमोबाइल सेक्टर के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरडी सिंह के अनुसार, बिजली की उपलब्धता नहीं होने के कारण उद्योगों को सालाना 1000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है. 500 करोड़ रुपये टैक्स की कम प्राप्ति हो रही है. डिफेंस उपकरण का कारखाना जो झारखंड में लगने वाला था, वह अब दूसरे राज्यों में शिफ्ट होगा.

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