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डिप्रेशन के कारण लोग हो रहे अल्कोहलिक, बच्चे भी इससे दूर नहीं : डॉ संजय मुंडा

अल्कोहल के सेवन को नहीं समझते लोग मानसिक रोग

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तनाव के कई कारण,अकेलापन,सच्चाई से दूर भागना, हमेशा दुख-खुशी का अनुभव भी मानसिक रोग

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Ranchi : मेंटल हेल्थ एडिक्शन और डिप्रेशन विषय पर सोमवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसका आयोजन कैथोलिक डॉक्टरर्स की ओर एक्सआइएसएस सभागार में किया गया. इस दौरान सीआइपी साइकाइटिस्ट के सहायक प्रोफेसर डॉ संजय कुमार मुंडा ने कहा कि आज कल दस साल की उम्र से बच्चों में अल्कोहल का प्रभाव देखा जा रहा है. ये कोई नयी बात नहीं है कि आज कल के बच्चे ऐसा कर रहे है. वास्तव में भविष्य में बच्चे ऐसा करेंगे, इसकी जानकारी पहले ही हो गयी थी. उन्होंने जानकारी दी कि कई बच्चों में एक होड़ होती है यह जानने की कि अल्कोहल कैसा लगता है या टीवी या फिल्मों में जैसा दिखाया जाता है उसका वैसा ही प्रभाव रहता है या नहीं. ऐसे में कुछ बच्चे इसे चख के छोड़ देते है, जबकि कुछ को लत लग जाती है.

जेनेटिक भी हो सकता है अल्कोहल का सेवन

डॉ संजय ने जानकारी दी कि कई बार अल्कोहल का प्रयोग जेनेटिक देखा जाता है. जो पुश्त दर पुश्त चलती है. लेकिन इसका यह मतलब यह नहीं कि ऐसी आदतों को छुड़ाया नहीं जा सकता है. पारिवारिक सहयोग और डॉक्टरी सलाह से ऐसी आदतों से छुटकारा पाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जिन बच्चों में कम उम्र से अल्कोहल सेवन की लत लगी होती है, वो भविष्य में और भी खतरनाक साबित होती है.

डिप्रेशन के कई कारण

डॉ सौरभ खानरा ने डिप्रेशन की जानकारी देते हुए कहा कि डिप्रेशन के कई कारण हो सकते हैं. न सिर्फ काम काज का बोझ बल्कि अधिकांश मामलों में देखा जाता है कि पारिवारिक सहयोग और आपसी सहयोग नहीं होने के कारण ऐसा होता है. उन्होंने बताया कि डिप्रेशन के कई कारण है जिसमें अकेलापन, सच्चाई से दूर भागना, हमेशा दुख या खुशी का अनुभव, माता पिता के संबध ठीक नहीं होना, तनाव को सहन नहीं कर पाना आदि है. ऐसे में इंसान को चाहिए कि अधिक से अधिक समय मनोरंजन या ऐसे काम करें जिससे उनका तनाव कम हो. उन्होंने कहा कि तनाव अधिक होने पर भी लोग अल्कोहल का प्रयोग अधिक करते हैं, जो खुद में एक बीमारी है.

ये थे उपस्थित

मौके पर फादर डॉ. मरियानुस कुजूर, डॉ हिमाद्री सिन्हा, डॉ सीआजे खेस, डॉ. दयाशिनी लाहिरी, डॉ केके भगत, डॉ अंशु टोप्पो समेत अन्य उपस्थित थे.

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