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डीएसपीएमयू : हंगामा, लेटलतीफी और आलोचना के नाम रही सीनेट की पहली बैठक

Ranchi : डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के पहले सीनेट की बैठक हंगामा, लेटलतीफी और आलोचनाओं के नाम रही. तय समय से डेढ़ घंटे देर से सीनेट की बैठक शुरू हुई.

कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू के आने के ठीक पहले स्टूडेंट यूनियन की ओर से जोरदार हंगामा किया गया. सीनेट में शामिल करने की मांग को लेकर उन्होंने कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा का घेराव किया.

कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू के नहीं आने ही सूचना मिलने के बाद सीनेट की कार्यवाही शुरू हुई. कुलपति डॉ एसएन मुंडा ने सीनेट की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी. सीनेट की कार्यवाही में कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑनलाइन शिरकत की.

सीनेट की शुरुआत में वीसी डॉ एसएन मुंडा ने विवि की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अपने स्थापना काल से ही विवि हर दिन उपलब्धियों के पायदान चढ़ रहा है. यहां के शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेपर प्रेजेंटेशन दिया है.

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साथ ही लंदन, ईरान, चीन, स्विट्जरलैंड जैसे देशों में गये और प्रतिभा का लोहा मनवाया है. यहां के शिक्षक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई शैक्षणिक संगठनों के सदस्य हैं.

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में हर शैक्षणिक सत्र में दो वर्षीय पीजी, तीन वर्षीय यूजी और एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत की गयी है. वहीं कई तरह के वोकेशनल कोर्सेस भी शुरू हुए हैं. उन्होंने कहा कि डीएसपीएमयू संभवत: राज्य का पहला विवि है, जहां झारखंड बिहार के अलावा बंगाल और ओड़िशा से भी स्टूडेंट्स पढ़ाई करने आये हैं.

वहीं कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों का काम केवल अध्यापन का नहीं होता है, बल्कि उन्हें शोध पर भी जोर देना चाहिए. निश्चित रूप से कोरोना काल में पढ़ाई के स्वरूप में बदलाव हुआ, पर मूल अब भी जस का तस है. आज भी शिक्षक ही हैं, जो समाज को दिशा देने का काम करते हैं.

आज की इस सीनेट की बैठक में 20 से अधिक मुद्दों पर चर्चा की गयी. जिसमें नये कोर्सेस शुरू करने, शिक्षकों की प्रोन्नति, संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति, विवि भवन के रिनोवेशन, लाइब्रेरी दुरुस्त करने, किताबों की खरीदारी जैसे मुद्दे अहम रहे. इन सभी मुद्दों में चर्चा के दौरान सीनेट के सदस्यों ने आपत्ति दर्ज की तो कई मुद्दों को बिना शोर शराबे के पास कर दिया.

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इन प्रस्तावों पर हुई चर्चा

सीनेट में शिक्षकों की प्रोन्नति के मामले में बात रखी गयी कि राज्य में विवि शिक्षकों की प्रोन्नति को लेकर 2008 के बाद नियमावली नहीं बनी है. इस पर डीएसपीएमयू की ओर से साल 2010 में प्रोन्नति नियमावली बना कर सरकार को भेजी गयी.

जिसमें सरकार की ओर से आंशिक सुधार को विवि को वापस भेजा गया है. विवि की इस प्रोन्नति नियमावली के प्रस्ताव को सीनेट सदस्यों ने सहमति दी.

इसके अलावा विवि की ओर से कुलपति और कुलसचिव के लिए दो वाहन खरीद के प्रस्ताव को पटल पर रखा गया. इस पर सीनेट सदस्य डॉ अशोक कुमार नाग ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि क्या इस खरीदारी के लिए सरकार से अनुमति ली गयी थी.

इस पर जवाब देते हुए रजिस्ट्रार एके चौधरी ने कहा कि यह विवि के क्षेत्राधिकार में आता है. ऐसी खरीदारी के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है.

सबसे अहम मुद्दे की बात करें तो चर्चा विवि के विभिन्न कोर्स में पेड सीट को लेकर हुई. पटल पर आये प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए डॉ एके नाग ने कहा कि विवि के सभी विषयों में पेड सीट है. इन पेड सीटों में हर साल पैसे लेकर एडमिशन लिया जा रहा है.

जबकि चांसलर की अनुमति के बिना यह कैसे हो रहा है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विवि में 15 फीसदी पेड सीटों के चलन को बंद करना चाहिए. राज्य के किसी भी विवि में इस तरह से नामांकन का चलन नहीं है.

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