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नशे की खेती पर लगाम : 10 साल में 10, 000 एकड़ जमीन पर लगी अफीम की फसल को पुलिस ने किया नष्ट

Ranchi : झारखंड पुलिस का अफीम की खेती के खिलाफ अभियान जारी है. पिछले 10 सालों में झारखंड पुलिस ने 10,000 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अफीम की खेती नष्ट की है. वहीं 2,215 आरोपियों की गिरफ्तारी भी की है.

झारखंड के पहाड़ी गांवों में अफीम की फसल लहलहाती है. लेकिन उन इलाकों में पहुंचना भी काफी कठिन होता है. झारखंड पुलिस की कार्रवाई में पिछले 10 सालों में अफीम के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े सीआईडी ने जारी किए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 के नवंबर महीने तक हुई कार्रवाई पर ही गौर करें तो नशे के खिलाफ न सिर्फ सर्वाधिक मामले दर्ज हुए हैं, बल्कि नारकोटिक्स के केस में सर्वाधिक गिरफ्तारी भी साल 2020 में हुई है.

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झारखंड में बीते दस सालों में सर्वाधिक 10,000 से ज्यादा एकड़ जमीन से अफीम की खेती नष्ट की गयी है. झारखंड के कई जिलों से अफीम की फसल उगाई जाने की सूचना पुलिस को मिली है. जिसके बाद पुलिस उन्हें नष्ट करने में लगी हुई है. अफीम के खिलाफ लगातार पुलिस करवाई कर रही है.

एक नजर आकड़ों पर

सालगिरफ्तारअफीम  नष्ट
2011107.26 एकड़
201222866 एकड़
2013202247 एकड़
20149881एकड़
2015172516 एकड़
2016164259 एकड़
20171652676 एकड़
20183012160 एकड़
20193181800 एकड़
20204621838 एकड़

झारखंड पुलिस ने अफीम के खिलाफ साल 2011 से अब तक 1730 केस दर्ज किये गये हैं, जबकि 2217 आरोपी की गिरफ्तारी भी की गयी है. वहीं पुलिस ने कई एकड़ खेतों में लगे अफीम को नष्ट किया है. झारखंड पुलिस नशे के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है.

एक नजर आकड़ों पर

सालकेसबरामद
20117925 क्विंटल
201213313 क्विंटल
201313021 क्विंटल
20147813 क्विंटल
201514816 क्विंटल
201614214 क्विंटल
201718637 क्विंटल
201823780 क्विंटल
2019256152 क्विंटल
2020341 

42 केजी

 

झारखंड पुलिस यह तो मानती है कि नक्सली अफीम की खेती से करोड़ों का व्यारा न्यारा कर रहे है, लेकिन इस खतरनाक कारोबार पर कैसे नकेल कसा जाएगा यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है. लेकिन अब जब पानी सर के ऊपर जाने लगा है सेटेलाईट के जरिये अफीम के खेत पर नजर रखा जा रहा हैं.

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अफीम की फसल अब उन लोगों के लीए फ़ायदा का सौदा होता जा रहा है जो थोड़े से पैसा लगा कर करोड़ों कमाते हैं. पिछले 10 साल में 10,000 एकड़ में लगी फसल को नष्ट किया गया था. झारखंड के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में अफीम की खेती नक्सलियों और अपराधियों के लिए एक बड़ा आर्थिक स्रोत बन गयी है. सूबे की अवाम के लिए यह एक बड़ा खतरा है. नशे के इस कारोबार ने अरबों रुपये की कल्याणकारी योजनाओं की हकीकत भी उजागर कर दी है.

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