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जल जीवन मिशन सेवाओं की क्वालिटी बनाये रखने को गांव-गांव में एक्सपर्ट रखने की तैयारी में पेयजल विभाग

Ranchi :  राज्य में जल जीवन मिशन सेवाओं के जरिये हर घर को नल से जल की सुविधा देने पर काम जारी है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (झारखंड) इस तैयारी में है कि मिशन की सुविधा को बनाये रखने में टेक्निकल एक्सपर्ट भी रखे जाएं. गांवों में नल से जल सेवा के तहत कनेक्शन मिल जाने के बाद इनकी क्वालिटी बनाए रखना भी जरूरी है. कभी इलेक्ट्रिक कनेक्शन, कभी पंप की तो कभी दूसरी समस्याएं भी आती रहती हैं. ऐसे में इस तरह के इश्यू को दूर करना विभागीय स्तर से परेशानी का सबब बनता रहा है. इसे देखते हुए प्रयास यह है कि ग्राम स्तर पर ही तकनीकी तौर पर दक्ष लोगों से सेवाएं ली जाएं. इसके लिये पेयजल विभाग की ओर से फिलहाल 1976 लोगों को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है. इन्हें इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर और पंप ऑपरेटर ट्रेड में सक्षम बनाया गया है.

इस तरह से विभाग की है तैयारी

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पेयजल विभाग ने उद्योग विभाग के साथ टाइअप किया है. इसी के तहत झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम दुमका, गोला (रामगढ़) और रांची की मदद से 2021-22 में 1976 लोगों को सात दिनों के आवासीय प्रशिक्षण प्रोग्राम के जरिये अलग-अलग ट्रेड में ट्रेंड कराया गया है. इनमें से 688 लोगों को इलेक्ट्रिशन, 551 को प्लंबर, 737 को पंप ऑपरेटर के तौर पर स्किल्ड बनाया है. अब इसी वित्तीय वर्ष में 10 हजार से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दिये जाने का प्रयास जारी है.

 

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सरकार की कोशिश गांव-गांव में दक्ष कर्मी उपलब्ध कराने की है. जल जीवन मिशन के तहत गांवों में लग रहे सोलर बेस्ड वाटर सप्लाई स्कीम में किसी तरह की समस्या आने पर त्वरित तौर पर इनके जरिये मदद ली जायेगी. चापाकल मरम्मत और इस तरह के अन्य कामों में इनसे मदद मिलनी है. स्कीम की गुणवत्ता एवं निरंतरता में इनसे सपोर्ट मिलेगा. इन्हें स्थानीय स्तर पर योजनाओं से संबद्ध कर दिया जायेगा. ग्राम जल स्वच्छता समिति और जल सहिया के साथ मिलकर ये वाटर सप्लाई स्कीम में मददगार होंगे. सेवा प्रदान किये जाने के एवज में उन्हें वाटर टैक्स कलेक्शन चार्ज से निर्धारित राशि भी उपलब्ध करायी जायेगी ताकि उनका जीविकोपार्जन भी हो सके.

महिलाओं के हाथों में भी डोर

दिलचस्प यह है कि जिन 1976 लोगों को अलग-अलग ट्रेड में दक्ष बनाया गया है, उनमें महिलाएं भी शामिल हैं. इनमें 1925 पुरुषों तो 51 महिलाओं को भी कौशल विकास का लाभ मिला है. यानि 51 महिलाएं ऐसी हैं जो इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर और पंप ऑपरेटर के रूप में अपनी सेवाएं देंगी. 1976 लोगों में सामान्य श्रेणी के 165, ओबीसी-1 कैटेगरी के 1100, एसटी वर्ग के 365 और एससी वर्ग के 226 लोग भी शामिल हैं. अभी बोकारो के 56, चतरा के 137, देवघर के 152, धनबाद में 113, दुमका में 171, गढ़वा में 52, गिरिडीह में 193, गोड्डा में 69, गुमला में 26, हजारीबाग में 67, जामताड़ा में 105, खूंटी में 17, कोडरमा में 62, लातेहार में 24, लोहरदगा में 20, पाकुड़ में 31, पश्चिम सिंहभूम में 74, पूर्वी सिंहभूम में 134, रामगढ़ में 42, रांची में 110, साहेबगंज में 108, सरायकेला में 40 और सिमडेगा में 19 लोगों को ट्रेनिंग दी गयी है. विभाग इसके अलावे और भी लोगों को तैयार करेगा ताकि सभी 24 जिलों में गांव स्तर पर ऐसे कर्मी उपलब्ध कराये जा सकें.

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