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धनबाद में पेयजल संकट गहराया, तोपचांची झील में मात्र सात दिनों का पानी है शेष

नदी, तालाब, कुआं सूखने की कगार पर हैं. बढ़ती गर्मी से पानी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है

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Manoj Mishra

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Dhanbad :  गर्मी से देशभर के लोग तप रहे हैं. बढ़ती गर्मी से जल स्त्रोत भी सूबते जा रहे हैं. मॉनसून के आने का वक्त भी बढ़ता ही जा रहा है. धनबाद में भी लोगों की गर्मी और पानी की किलल्त से हालत खराब है. पानी के बिना लोगों के हलक सूख रहे हैं. नदी, तालाब, कुआं सूखने की कगार पर हैं. बढ़ती गर्मी से पानी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है और वाष्पीकरण की इस प्रक्रिया से डैम और नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है. धनबाद के मुख्य जलस्रोत मैथन डैम, दामोदर नदी और तोपचांची झील की स्थिति खराब है.  नए जलस्रोतों की खोज तो हो नहीं पायी है और पानी का इस्तेमाल बढ़ती ही जा रहा है.

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मैथन डैम में औसत जलस्तर

मैथन डैम में अप्रैल माह के अंत में औसत जलस्तर 465-66 फीट रहता था. जो इस बार जून महीने में 454 फीट पहुंच गया. अगर डैम का 8 फीट जलस्तर और गिरा तो शहर की जलापूर्ति ठप हो जाएगी. डीवीसी प्रबंधन का कहना है कि मैथन डैम में 448 फीट जलस्तर अलार्मिंग स्थिति है. 448 फीट जलस्तर पर पानी सप्लाई संभव नहीं है.

वहीं डैम के गिरते जलस्तर को देखते हुए सेंट्रल वॉटर बोर्ड ने पानी की राशनिंग शुरू कर दी है. डीवीसी जीपीआरओ एम विजय कुमार का कहना है कि सामान्य दिनों में प. बंगाल को 4 हजार एकड़ फीट पानी छोड़ा जाता था. जलस्तर कम होने के कारण पश्चिम बंगाल को पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. इस हालात में डैम पानी देने की स्थिति में रहेगा या नहीं, इसे लेकर मंथन शुरू हो गया है.

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कतरास की 2 लाख आबादी तोपचांची झील पर निर्भर

इधर  कतरास कोयलांचल की आधी आबादी की प्यास बुझाने वाली तोपचांची झील भीषण गर्मी से सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है. अब झील में मात्र सात दिनों का पानी शेष बचा हुआ है. इन सात दिनों में अगर बारिश नहीं हुई तो कतरास की आधी आबादी में जलसंकट गहरा सकता है. अभी तोपचांची झील में मात्र आठ फिट पानी बचा हुआ है.

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कतरास और आसपास की लगभग 2 लाख आबादी तोपचांची झील पर पानी के लिए निर्भर है.  तोपचांची झील से तिलाटांड़, तेतुलमारी, सिजुआ, भदरीचक, अंगारपथरा, कतरास, चैतुडीह, लकड़का तथा छाताबाद का कुछ भाग में पानी की आपूर्ति की जाती है.

झमाडा के जेई विनय कुमार का कहना है कि तोपचांची झील में अप्रैल महीने में सामान्य तौर पर 50 फीट पानी रहता था. लेकिन  इस बार अप्रैल महीने में ही तोपचांची झील का जलस्तर 43.11 फीट हो  गया. जो औसत जलस्तर से 7-8 फीट कम है. मई एवं जून महीने में झील का जलस्तर घटता गया और अब झील में मात्र सात से दस दिनों का पानी शेष बचा हुआ है.

वहीं झील में कार्यरत बिनोद प्रमाणिक का कहना है कि झील में मात्र 8-10 फीट पानी ही बचा हुआ है. इससे मात्र छह से सात दिनों तक ही लोगों को पानी दी जा सकती है. अगले आठ दिनों तक अगर बारिश नहीं हुई तो पानी की समस्या शुरू हो जाएगी. झील में जल भंडारण की क्षमता को बढाने के लिए युद्धस्तर पर मिट्टी कटाई का काम चल रहा है.

लेकिन यदि इन आठ दिनों में बारिश हो भी गई तो लोगों को पानी नहीं मिल पायेगी. उसका मुख्य कारण मिट्टी कटाई के बाद झील में पानी आने के बाद वह मिट्टी से घुल जाएगी, जिसके कारण पानी साफ होने के बाद ही लोगों को पानी की आपूर्ति की जायेगी.

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 दामोदर नदी का जलस्तर तीन वर्षों में सबसे नीचे आया

बढ़ती गर्मी का असर दामोदर नदी में दिख रहा है. पिछले तीन वर्षों में दामोदर का जलस्तर सबसे कम है. 27 अप्रैल को दामोदर का जलस्तर 451  आरएल रिकॉर्ड रिकार्ड किया गया. वहीं मई और जून महीने में जलस्तर घट कर 431 आरएल पहुंच गया है. दामोदर नदी की पानी पर झरिया, भौंरा, पुटकी, करकेंद सहित कोयलांचल के 8-10 लाख लोग निर्भर करते हैं. झमाडा प्रबंधन कोजामाडोवा  वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थित इंटेकवेल के पास पानी पहुंचाने के लिए दामोदर नदी पर बांध बांधना पड़ गया है.

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