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NDA की ट्रेनिंग में एक्सीडेंट से सपना टूटा, जानिये क्यों कन्याकुमारी से लेह की पैदल यात्रा पर निकला रांची का रोनित रंजन

Naveen Sharma

Ranchi : आप बचपन से ही जो बनने का सपना बुनते हैं. आपके परिवार के सदस्य जिस सपने को खाद पानी देकर धीरे-धीरे बड़ा करते हैं. जब युवा होते हैं अपनी प्रतिभा, लगन और शिक्षकों के मार्गदर्शन से आप उस सपने को पूरा करने के द्वार पर पहुंच जाते हैं तो आपकी खुशी का ठीकाना नहीं रहता है, फिर अचानक कोई ऐसा हादसा हो जाता है जिसकी कल्पना आप बुरे से बुरे स्वपन में भी नहीं करते हैं तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाती है.

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ऐसे में कई लोगों को लगता है जीने का अब कोई मतलब नहीं है. अधिकतर लोग ऐसे में निराशा के गर्त में चले जाते हैं, मानसिक स्थिति गड़बड़ा जाती है. कई लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं. ऐसी ही विपरीत परिस्थियों में इन्सान के हौसले और दृढ़ता की पहचान होती है. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो निराशा के इस अंधकार को दूर करने के लिए जी जान से लड़ते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही जांबाज युवा के संघर्ष की दास्तान बताने जा रहे हैं.

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12 वीं के बोर्ड में अच्छे मार्क्स

रांची के तुपूदाना के रहनेवाले रोनित रंजन ने अपने स्कूली दिनों में ही भारतीय सेना में जाने का सपना देखा था. पढ़ाई में भी तेज और छह फुट के लंबे कद काठीवाले रोनित को अपने व्यक्तित्व के हिसाब से देश सेवा के लिए ये सबसे अच्छा काम लगता था. 12 वीं की CBSE बोर्ड परीक्षा में रोनित अपने स्कूल के टॉपरों में शुमार था. पहली बार में नेशनल डिफेंस एकेडमी NDA का इंट्रेंस एग्जाम क्रैक नहीं हो पाया था. दूसरी बार ज्यादा तैयारी के साथ परीक्षा दी तो सफलता भी मिली. रोनित जब महाराष्ट्र के खड़गवासला में स्थित NDA पहुंचा तो वो सातवें आसमान पर था.

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जनवरी 2017 का वो काला दिन

रोनित ने पूरे उत्साह के साथ NDA में कड़ी ट्रेनिंग शुरू की. एक दिन ट्रेनिंग के दौरान जनवरी 2017 का वो काला दिन आया जब गिरने की वजह से रोनित को कमर में गंभीर चोट लग गयी. कुछ दिनों तक सेना के अस्पताल में इलाज चला लेकिन चोट इतनी अधिक थी कि उसे पूरी तरह से ठीक कर सामान्य होना संभव नहीं था. इसकी वजह से रोनित को ट्रेनिंग बीच में ही छोड़ कर ही अपना सपना अधूरा लिये ही NDA से बाहर आना पड़ा. रोनित को लगा कि उसके जीने का मकसद ही खत्म हो गया है. वह गहरे अवसाद में चला गया. मां-पिता और बहन रेवती रंजन को भी गहरा धक्का लगा.

परिवार और दोस्तों का मिला साथ

इन बुरे दिनों में जब रोनित की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी और शारीरिक रूप से भी वो तकलीफ से गुजर रहा था. इस दौरान रोनित के परिवार और दोस्तों ऋषभ पांडे, हर्ष पोद्दार, आस्था अग्रवाल, नीलय और प्रांजल ने उसे इस निराशा के दौर से निकलने में मदद की. दोस्त उसका हौसला बढ़ाने के लिए हर सप्ताह बारी-बारी उसे पत्र लिखते थे. धीरे-धीरे शारीरिक और मेंटल हेल्थ में सुधार होने के बाद रोनित ने खुद को मजबूत किया और नयी राह तलाशने की ओर निकल पड़ा.

क्राइस्ट कॉलेज से किया ग्रेजुएशन

रोनित ने बेंग्लूरू के मशहूर क्राइस्ट कॉलेज में एडमिशन लिया. यहां इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस आदि विषय लेकर ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान साहित्य की ओर रोनित का झुकाव ज्यादा हुआ. पढ़ना लिखना शुरू हुआ. वो कविताएं भी लिखने लगा. रोनित ने NEWS WING से फोन पर बात करते हुए बताया कि लिखने से बहुत लाभ हुआ. इससे मुझे अपने तनाव और निराशा से उबरने में बहुत मदद मिली.

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रोनित के जीवन की दास्तान The Mighty Mustang

रोनित ने अपने जीवन से जुड़े अनुभवों को संजो कर एक किताब लिखी जिसका नाम दिया The Mighty Mustang . इस किताब में रोनित ने अपनी असफल प्रेम कहानी और जीवन की यात्रा में आये उतार-चढ़ाव के बारे में लिखा था. इस किताब को लोगों ने काफी पसंद किया, ये अमेजन के टॉप सेलर की सूची में भी शामिल थी. खासकर युवाओं ने. रोनित सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय है. उसने सोशल मीडिया पर युवाओं को निराशा से बाहर निकलने के लिए जागरूक करने का अभियान चलाया.

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मेंटल हेल्थ को स्कूली कैरीकुलम में शामिल करने को निकला पैदल यात्रा पर

रोनित ने बताय कि हमारे देश में मेंटल हेल्थ पर लोग बात तक करना नहीं चाहते हैं. हालत यह है कि आपके शरीर में कोई बीमारी है तो आप जेनरल फिजिशियन को बड़े आराम से दिखाने चले जाते हैं लेकिन अगर मेंटल प्राब्लम है तो लोग उसे छुपाते हैं यहां तक कि उस पर लोग बात तक नहीं करना चाहते हैं. आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हर तबके के लोग मानसिक तनाव से गुजरते हैं लेकिन कोई इस पर बात नहीं करता. हालत इतनी गंभीर है कि 28 बच्चे हर दिन मानसिक तनाव की वजह से आत्महत्या तक कर लेते हैं. इसलिए मैंने एक अभियान शुरू किया कि मेंटल हेल्थ को 9वीं से 12 वीं क्लास के बच्चों के लिए स्कूली कैरीकुलम में शामिल किया जाये.

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4000 किलोमीटर की पैदल यात्रा की ठानी

रोनित ने लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए और मेंटल हेल्थ के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए देश की यात्रा करने की ठानी. 16 नवंबर 2020 को कन्याकुमारी से अपनी 4000 किलोमीटर लंबी यात्रा शुरू की. यहां ध्यान देनेवाली बात यह है कि रोनित अभी भी पूरी तरह से स्वस्थ्य नहीं हुए हैं. उनके बैक इंज्यूरी परमानेंट है, वो पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती है. रोनित ने 2750 किमी की यात्रा पूरी कर ली है और वे 27 फरवरी 2021 को जयपुर पहुंच चुके हैं. अब यहां से वे दिल्ली जायेंगे.

राह में आयीं कई मुश्किलें, पुलिस स्टेशन और पेट्रोल पंप पर सोना पड़ा

रोनित को इस लंबी यात्रा में कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा है. कई बार पुलिस स्टेशन, अस्पताल और पेट्रोल पंप पर रात गुजरनी पड़ी है. रास्ते में कई बार गुंडों का सामना भी करना पड़ा था. कई जंगली जानवर भी रास्ते में मिले. वहीं दूसरी तरफ लोगों का काफी प्यार और प्रोत्साहन भी मिला. कोविड-19 की वजह से थोड़ी परेशानी भी हुई लेकिन इसके बाद भी कई बार गांवों में लोगों ने उत्साह से स्वागत सत्कार भी किया. रोनित अच्छे काम के लिए यात्रा पर निकले हैं इसका हर वर्ग के लोगों ने तारीफ भी की है. मीडिया औऱ अखबारों की रिपोर्ट की वजह से भी लोग उसे जान जाते थे.

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पीएम, शिक्षा मंत्री और अन्य को देंगे ज्ञापन

रोनित अपने जीवन अनुभव तथा अपनी लंबी यात्रा के दौरान मिले ग्राउंड रियलिटी की फाइंडिंग को शामिल कर मेंटल हेल्थ के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक तथा अन्य को ज्ञापन सौपेंगे. रोनित कहते हैं कि जब तक सरकार के स्तर पर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर नीतिगत निर्णय नहीं होगा तब तक इस गंभीर समस्या से लड़ना मुश्किल है.

 

युवाओं को मैसेज

रोनित युवाओं को अपना मैसेज देते हुए कहते हैं कि कुछ भी अच्छा या बुरा होना हमारे हाथ में नहीं है लेकिन खुदा ना खास्ता अगर कुछ बुरा हो जाता है तो फिर उसका मुकाबला करना चाहिए. उस परेशानी से निकलने का रास्ता ढ़ूंढ़ना चाहिए. सबसे पहले अपना ख्याल रखना चाहिए, तभी हम दूसरे का भी ख्याल रख पायेंगे. माइंड में कोई बैरियर नहीं रखें, कुछ भी असंभव नहीं है. अब मेरा ही मामला लें मैं जिस शारीरिक स्थिति में हूं उसमें इतनी लंबी यात्रा असंभव ही कही जायेगी लेकिन मैंने ठान लिया और अब इसे पूरा करने के करीब हूं. आमतौर पर रोज 50- 60 किमी का सफर तय करता हूं.

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