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इसरो, IIM और यूसीआईएल जादूगोड़ा सहित 40 संस्थाओं के नींव रखनेवाले डॉ. विक्रम साराभाई

जयंती पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : स्वतंत्र भारत में जिन वैज्ञानिकों ने विज्ञान के क्षेत्र में सबसे उल्लेखनीय काम किया है उनमें विक्रम साराभाई प्रमुख हैं. उनका योगदान कितना महत्वपूर्ण था इसको हम इस तथ्य से भी आंक सकते हैं कि उन्होंने 40 वैज्ञानिक संस्थाओं की स्थापना की थी.एक तरह से कहा जाए तो उन्होंने ही उन संस्थाओं को खड़ा किया जिनके बल पर आज हमारे देश ने चंद्रयान और मिशन मंगल तक का सफर तय किया है.

इसरो की स्थापना भी विक्रम साराभाई के विजन और वैज्ञानिक प्रतिभा का एक शानदार उदाहरण है. इसमें खास बात ये है कि साराभाई अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा तथा विज्ञान संबंधी काम करनेवाली संस्थाओं के साथ- साथ मैनेजमेंट के क्षेत्र में देश के नंबर वन संस्थान आईआईएम अहमदाबाद की भी स्थापना में अहम रोल अदा किया था.

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हमारे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब अग्नि की उड़ान में इस बात पर फख्र जाहिर किया है कि उन्हें विक्रम साराभाई जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति के साथ काम करने का मौका मिला. उन्होंने साराभाई की नेतृत्व क्षमता की खूबियों की चर्चा की है.

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प्रसिद्ध उद्योगपति के घर हुआ जन्म

विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में हुआ था.साराभाई के पिता अम्बालाल साराभाई समृद्ध उद्योगपति थे. गुजरात में उनकी कई फैक्ट्री थीं. विक्रम साराभाई, अम्बालाल और सरला देवी की 8 संतानों में से एक थे.

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स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा था परिवार

साराभाई का परिवार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल था. इसके कारण कई स्वतंत्रता सेनानी जैसे महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, रबीन्द्रनाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू अक्सर साराभाई के घर आते-जाते रहते थे. इन सभी सेनानियों का उस समय युवा विक्रम साराभाई के जीवन पर काफी प्रभाव पडा. इन्होंने साराभाई के व्यक्तिगत जीवन के विकास में काफी सहायता भी की.

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क्लासिकल डांसर मृणालिनी साराभाई से हुआ विवाह

सितम्बर 1942 को विक्रम साराभाई का विवाह प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर मृणालिनी साराभाई से हुआ.उनका वैवाहिक समारोह चेन्नई में हुआ था जिसमें विक्रम के परिवार से कोई भी व्यक्ति उपस्थित नहीं हो पाया था, क्योंकि उस समय महात्मा गांधी का भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था. इसमें विक्रम का परिवार भी शामिल था.

विक्रम और मृणालिनी को दो बच्चे हुए- कार्तिकेय साराभाई और मल्लिका साराभाई. मल्लिका साराभाई भी प्रसिद्ध डांसर हैं. इन्हें पालमे डी’ओरे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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‘कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ें

भारत में इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विक्रम साराभाई इंग्लैंड चले गये और ‘कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ के सेंट जॉन कॉलेज में भर्ती हुए.

विक्रम साराभाई ने कास्मिक किरणों के समय परिवर्तन पर अनुसंधान किया और निष्कर्ष किया कि मौसम विज्ञान परिणाम कास्मिक किरण के दैनिक परिवर्तन प्रेक्षण पर पूर्ण रुप से प्रभावित नहीं होगा.

आगे, बताया कि अवशिष्ट परिवर्तन विस्तृत तथा विश्वव्यापी है तथा यह सौर क्रियाकलापों के परिवर्तन से संबंधित है. विक्रम साराभाई ने सौर तथा अंतरग्रहीय भौतिकी में अनुसंधान के नए क्षेत्रों के सुअवसरों की कल्पना की थी. वर्ष 1957-1958 को अंतर्राष्ट्रीय भू-भौतिकी वर्ष (IGW) के रूप में देखा जाता है.

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इसरो की स्थापना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना उनकी महान उपलब्धियों में एक थी. रूसी स्पुतनिक के प्रक्षेपण के बाद उन्होंने भारत जैसे विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व के बारे में सरकार को राज़ी किया.
डॉ. साराभाई ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा था कि “ऐसे कुछ लोग हैं जो विकासशील राष्ट्रों में अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं. हमारे सामने उद्देश्य की कोई अस्पष्टता नहीं है.

हम चंद्रमा या ग्रहों की गवेषणा या मानव सहित अंतरिक्ष-उड़ानों में आर्थिक रूप से उन्नत राष्ट्रों के साथ प्रतिस्पर्धा की कोई कल्पना नहीं कर रहे हैं.” “लेकिन हम आश्वस्त हैं कि अगर हमें राष्ट्रीय स्तर पर, और राष्ट्रों के समुदाय में कोई सार्थक भूमिका निभानी है, तो हमें मानव और समाज की वास्तविक समस्याओं के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को लागू करने में किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए.”

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इनके नाम पर रखा गया अंतरिक्ष केंद्र का नाम

इनके नाम पर बना विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र इसरो का सबसे बड़ा एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण केंद्र है. यह तिरुवनंतपुरम में स्थित है. यहाँ पर रॉकेट, प्रक्षेपण यान एवं कृत्रिम उपग्रहों का निर्माण एवं उनसे सम्बंधित तकनीकी का विकास किया जाता है. केंद्र की शुरुआत थम्बा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र के तौर पर 1962 में हुई थी. केंद्र का पुनः नामकरण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ॰ विक्रम साराभाई के सम्मान में किया गया.

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डॉ. साराभाई द्वारा स्थापित संस्थान :

• भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद
• इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (आईआईएम), अहमदाबाद
• कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद
• दर्पण अकाडेमी फ़ॉर परफ़ार्मिंग आर्ट्स, अहमदाबाद (अपनी पत्नी के साथ मिल कर)
• विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
• स्पेस अप्लीकेशन्स सेंटर, अहमदाबाद (यह संस्थान साराभाई द्वारा स्थापित छह संस्थानों/केंद्रों के विलय के बाद अस्तित्व में आया)
• फ़ास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफ़बीटीआर), कल्पकम
• वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रॉन प्रॉजेक्ट, कोलकाता
• इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड(ईसीआईएल), हैदराबाद
• यूरेनियम कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड(यूसीआईएल), जादूगोड़ा, झारखंड

पुरस्कार व सम्मान

विज्ञान के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 1962 में उन्हें शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. भारत सरकार ने उन्हें 1966 में ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत किया. इन सबके अतिरिक्त इंडियन अकादमी ऑफ साइंसेज, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेस ऑफ इंडिया, फिजिकल सोसाइटी, लन्दन और कैम्ब्रिज फिलोसाफिकल सोसाइटी ने उन्हें अपना ‘फैलो’ बनाकर सम्मानित किया,

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