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बिग बैंग पर शोध के लिए जिनेवा रवाना हुए सिमडेगा के वैज्ञानिक डॉ सिद्धार्थ

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Simdega : ब्रह्मांड की उत्पत्ति (बिग बैंग) के रहस्य को जानने के लिए दुनिया के कई देश मिलकर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कई वर्षों से एक महाप्रयोग कर रहे हैं. इस महाप्रयोग में झारखंड के सिमडेगा जिले के वैज्ञानिक डॉ सिद्धार्थ कुमार प्रसाद भी शोध कर रहे हैं. वह मंगलवार को इस शोध में शामिल होने के लिए कोलकाता से जिनेवा के लिए रवाना हुए. डॉ सिद्धार्थ सोमवार को ही सिमडेगा से कोलकाता पहुंचे थे.

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डेटा कलेक्ट कर लौटेंगे भारत, कोलकाता में करेंगे उस पर शोध

जिनेवा में लगभग डेढ़ माह रहकर वह बिग बैंग पर शोध करेंगे. वहां महामशीन के माध्यम से दो अणुओं में टक्कर करायी जायेगी, जिससे डॉ सिद्धार्थ डेटा कलेक्ट कर भारत लौटेंगे और कोलकाता में शोध संस्थान बोस इंस्टीट्यूट में शोध करेंगे. वह इस महाप्रयोग में पिछले कई वर्षों से शामिल होकर शोध कर रहे हैं. वह 3-4 माह के बाद जब भी महामशीन में इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटॉन की टक्कर करायी जाती है, तब वह जिनेवा जाते हैं. वर्तमान में डॉ. सिद्धार्थ कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूट में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में इस पर शोध कर रहे हैं. वैसे डॉ सिद्धार्थ को यूएसए में पीएचडी के बाद पोस्टडोक करने के दौरान कई अवसर मिले, लेकिन उन्होंने अपने देश के लिए ही काम करने की बात कही. यह महाप्रयोग इतना बड़ा है कि इसे किसी एक देश या महादेश को कर पाना असंभव था, इसलिए दुनिया के लगभग 37 देश के 150 से भी अधिक यूनिवर्सिटी/इंस्टीट्यूट मिलकर इस महामशीन का निर्माण जिनेवा में एक साथ कर रहे हैं, जिसके निर्माण में भारत का भी बहुत बड़ा योगदान है.

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