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डॉ कफील खान केस : SC का इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार, यूपी सरकार बैकफुट पर

सीजेआई ने कहा कि यह उच्च न्यायालय का एक अच्छा आदेश है. हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता. 

 NewDelhi :  सीजेआई बोबडे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुरुवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को रोकने से मना कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत डॉ कफील खान की हिरासत को रद्द कर दिया गया था.

सीजेआई ने कहा कि यह उच्च न्यायालय का एक अच्छा आदेश है. हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता.

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आपराधिक मामलों का फैसला उनकी योग्यता के आधार पर किया जायेगा

उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के आदेश का पालन आपराधिक मामलों में अभियोजन को प्रभावित नहीं करेगा. सीजेआई ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के उपरोक्त अवलोकन वापस लेने के अनुरोध से इनकार कर दिया कि निर्णय आपराधिक अभियोजन को प्रभावित नहीं करेगा.

उन्होंने कहा,आपराधिक मामलों का फैसला उनकी योग्यता के आधार पर किया जायेगा.  एक निरोधक फैसले में की गयी टिप्पणियों से आपराधिक अभियोजन पर प्रभाव नहीं पड़ सकता.

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यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी

जान लें कि यूपी सरकार ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिकारियों के दृष्टिकोण के स्थान परअपनी व्यक्तिपरक संतुष्टि को प्रतिस्थापित किया है. यूपी सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक  सितंबर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत डॉ कफील खान की हिरासत को रद्द कर दिया गया था.

डॉ कफील खान को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 13 दिसंबर को दिये गये एक भाषण के तहत जनवरी 2020 में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था.

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भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करने के आरोप भी जोड़े गये

इस क्रम में  राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत शहर में सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी करने और अलीगढ़ के नागरिकों के भीतर भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करने के आरोप भी जोड़े गये.  खान की मां, नुजहत परवीन द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पहली बार 1 जून, 2020 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध की गयी थी,

क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि उच्च न्यायालय एक उचित मंच है. 1 सितंबर, 2020 को उच्च न्यायालय ने डॉ खान की तत्काल रिहाई के निर्देश के साथ याचिका की अनुमति दी.

एनएसए के तहत बनाये गये रिकॉर्ड को देखने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्णय लिया कि खान को हिरासत में रखने के लिए कोई आधार नहीं था. उनके भाषण को पूर्ण पढ़ने से संकेत मिलता है कि उन्होंने किसी भी तरह की हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया.

न्यायालय ने कहा कि भाषण ने वास्तव में राष्ट्रीय अखंडता और एकता के लिए आह्वान किया. निर्णय ने खान द्वारा दिये भाषण को पूरी तरह से पुन: प्रस्तुत किया, जिसे जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उत्तेजक करार दिया गया था.

  डॉ खान को 2 सितंबर को मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया.

मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह की पीठ द्वारा दिये गये निर्णय में कहा कि भाषण ऐसा नहीं है कि एक उचित व्यक्ति किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकता है, जैसा कि जिला मजिस्ट्रेट अलीगढ़ द्वारा डॉ खान के खिलाफ इस साल फरवरी में निरोधक आदेश पारित किया गया था. डॉ कफील खान को हिरासत में लेने की अवधि के विस्तार को भी अवैध घोषित किया गया है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद, डॉ खान को 2 सितंबर को मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया.

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