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DPRO ने RTI के तहत सरकारी कर्मियों से जुड़ी जानकारी देने से किया मना, कहा सार्वजनिक नहीं सकते पर्सनल बातें

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Ranchi/Deoghar : किसी भी सरकारी उलझन को सुलझाने के लिए सरकार की तरफ से RTI की व्यवस्था करायी गयी है. इससे किसी भी तरह की सरकारी जानकारी जो देने योग्य होती वो आमजन लेते हैं और अपनी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करते हैं. देखा गया है कि RTI से मिली सही जानकारी से देश में कई बड़े खुलासे हुए हैं. लेकिन अगर RTI के जरिए किए गए सवालों के ही चक्रव्यूह बनाकर उसमें RTI करने वालों को फंसाने की कोशिश की जाने लगे तो जाहिर सी बात है कि सूचना अधिकारी किसी वजह से जवाब नहीं देना चाहते हैं. ऐसा ही एक मामला देवघर में सामने आया है. RTI के तहत आवेदन देने वाले जिला संपर्क पदाधिकारी पर सूचना ना देने का आरोप लगा रहे हैं और कार्रवाई के तहत कार्यवाही करने की बात कह रहे हैं.

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ऐसा क्या पूछा कि जवाब ही नहीं मिला

सवालः आप के कार्यालय में कुल कितने अनुबंध कर्मचारी कार्यरत हैं ? सभी कर्मचारियों के शैक्षणिक योग्यता की अभिप्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध कराई जाए.

जवाबः वर्तमान में इस कार्यालय में कुल तीन कर्मचारी अनुबंध पर कार्यरत हैं. शेष प्रश्न के संबंध में कहना है कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (10) के तहत व्यक्तिगत सूचनाओं को प्रकटीकरण पर निषेध करता है.

सवालः उक्त कर्मचारियों को कितना मानदेय मिलता है ? उन चयनित कर्मचारियों की नियमावली उपलब्ध करायी जाए.

जवाबः मानदेय के संबंध में कहना है कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (10) के तहत व्यक्तिगत सूचनाओं को प्रकटीकरण पर निषेध करता है. नियमावली में किस चीज की मांग की गयी है, यह प्रश्न में स्पष्ट नहीं है.

सवालः आप के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों की जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र की अभिप्रमाणित प्रति उपलब्ध करायी जाए.

जवाबः सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (10) के तहत व्यक्तिगत सूचनाओं को प्रकटीकरण पर निषेध करता है.

सवालः देवघर जिले में कुल कितने पत्रकार हैं. उनकी सूची नाम और शैक्षणिक प्रमाण पत्र के साथ उपलब्ध करायी जाए.
जवाबः आरएनआई के साइट पर संबंधित मीडिया प्रतिष्ठानों से इसकी सूची प्राप्त की जा सकती है.

सवालः वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से अब तक सरकारी विज्ञापन में कुल कितने रुपए खर्च किए गए हैं और किन-किन मीडिया हाउसों को दिए गए ? विज्ञापन राशि कितनी थी ? अभिप्रमाणित कागजात की छायाप्रति उपलब्ध करायी जाए.

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जवाबः वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 अंतर्गत इस कार्यालय के द्वारा कोई विज्ञापन जारी नहीं की गई है और ना ही इस कार्यालय के द्वारा विज्ञापन में खर्च किया गया है.

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DPRO ने RTI के तहत सरकारी कर्मियों से जुड़ी जानकारी देने से किया मना, कहा सार्वजनिक नहीं सकते पर्सनल बातें

व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकतीः डीपीआरओ

RTI में अनुबंध पर काम करने वालों की जाति प्रमाण पत्र की प्रति मांगी गयी है और भी कई पर्सनल चीज मांगी गयी है. जो उपलब्ध नहीं करायी जा सकती. जिला जन संपर्क कार्यालय की तरफ से विज्ञापन जारी नहीं की जाती है. विज्ञापन बाबा मंदिर प्रभारी करते हैं. इससे पहले जो बाबा मंदिर प्रभारी थे, वही डीपीआपओ भी थे. लेकिन फिलहाल यह व्यवस्था नहीं है.

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RTI पर प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था सरकार करेः राजगढ़िया

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा चार के अंतर्गत 17 बिंदुओं की स्वघोषणा करना अनिवार्य है. उसमें किसी सरकारी विभाग में कार्यरत लोगों के नाम, पदनाम और वेतन इत्यादि की सूचना देना भी शामिल है. इस मामले में मांगी गई अधिकांश सूचना तो विभाग को खुद ही वेबसाइट पर डाल देनी चाहिए थी. ऐसा करने के बजाय उन सूचनाओं को गोपनीय बताए जाने का मतलब है कि राज्य के अधिकारियों को आरटीआई एक्ट की समुचित जानकारी नहीं है. बेहतर होगा कि सरकार नए सिरे से इस कानून पर प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था करे.
(विष्णु राजगढ़िया वरिष्ठ पत्रकार के साथ RTI एक्सपर्ट के तौर पर जाने-जाते हैं. इन्होंने RTI पर किताबे भी लिखी हैं)

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