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कांटा टोली फ्लाई ओवर के लिये डीपीआर और कंस्लटेंसी टेंडर खुला, अब काम में आयेगी तेजी

Ranchi. कांटा टोली फ्लाई ओवर निर्माण में तेजी आयेगी. बुधवार को इसके लिये निकाली गयी टेंडर का तकनीकी बीड खोला गया. यह टेंडर डीपीआर और पीएमसी बहाल करने के लिये निकाला गया था. लॉकडाउन के कारण टेंडर में देर हुई. जुडको की ओर से आधुनिक तकनीक से फ्लाई ओवर निर्माण किया जायेगा.

तकनीकी बीड खुलने से जानकारी हुई कि टेंडर में दो नामी कंपनियों ने हिस्सा लिया है. जिसमें हरियाणा की ज्वाइंट वेंचर कंपनी एमएसवी इंटरनेशनल एवं इसीएस इंजीनियरिंग कंस्लटेंसी सर्विसेज और भोपाल की कंपनी एलएन मालविया इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने हिस्सा लिया. नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे ने जुडको के परियोजना निदेशक तकनीकी रमेश कुमार को निविदा का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया है. साथ ही डीपीआर बनाने का काम आवंटित करने का निर्देश दिया है.

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सचिव ने यह भी कहा है कि डीपीआर बनने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाये. बता दें कांटा टोली फ्लाई ओवर का काम अब नये सिरे से शुरू किया जायेगा. जिसमें योगदा सत्संग से लेकर कांटाटोली स्थित शांतिनगर तक विस्तार किया जायेगा.

तकनीकी मूल्यांकन कराया जा रहा

जुडको परियोजना निदेशक तकनीकी रमेश कुमार ने जानकारी दी कि दोनों कंपनियों के कागजात का तकनीकी मूल्यांकन कराया जा रहा है. जल्द ही वित्तीय बीड का भी मूल्यांकन कराकर निविदा में योग्य आने वाली को कार्य आवंटित किया जायेगा. दो से तीन महीने का समय डीपीआर बनाने के लिए दिया जायेगा. डीपीआर बन जाने के बाद फ्लाई ओवर बनाने के लिए नये सिरे से टेंडर निकाल कंपनी का चयन किया जायेगा. वर्तमान में कांटाटोली फ्लाई ओवर का निर्माण बहुबाजार की ओर वाईएमसीए से लेकर कोकर की ओर शांतिनगर तक हो रहा था.

जिसकी लंबाई 1260 मीटर थी. अब तक 132 पाइल की कास्टिंग हो चुकी है. 19 खंभों में दो पाइल कैप और एक पीयर की कास्टिंग हो चुकी है. योगदा सत्संग से फ्लाईओवर का निर्माण कराये जाने से फ्लाई ओवर की लंबाई लगभग 2300 मीटर हो जायेगी.

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आधुनिक तकनीक से कराया जायेगा निर्माण

फ्लाई ओवर का निर्माण आधुनिक तकनीक सेगमेंटल बॉक्स गरडर सिस्टम से कराया जायेगा. नयी तकनीक के आधार पर संशोधित डिजाइन और डीपीआर भी बनाया जायेगा. रमेश ने बताया कि फिलहाल फ्लाई ओवर का निर्माण पीएससीआइ गरडर प्रणाली से हो रहा था. अमूमन इस प्रणाली में रात में काम होता. डेक स्लैब की कास्टिंग कार्य स्थल पर ही होती है. यातायात भी प्रभावित होता रहता है. जबकि सेगमेंटल बॉक्स प्रणाली में का इस्तेमाल बड़े शहरों में हो रहा है. इस सिस्टम में काम तेज होता है. हालांकि यह कुछ महंगा है. इस प्रणाली में यातायात बाधित नहीं होता है.

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