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देवघर-बासुकीनाथ के पट खुलने पर संकट, पंडा समाज बता रहे हैं रिस्की, समिति कर रही मंथन

Ranchi. सावन बीत गया. श्रद्धालु देवघर और बासुकीनाथ के बाबा के दर्शन की आस में रह गए. एक बार फिर से उम्मीद जगी कि सीमित, लोगों को दर्शन कराएगी. इसके लिए सरकार की तरफ से एक कमेटी बनी. कमेटी में अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल, सचिव पूजा सिंघल, डॉ नितिन मदन कुलकर्णी, डॉ अमिताभ कौशल, दुमका डीआइजी के अलावा देवघर और दुमका के डीसी-एसपी शामिल हैं.

कौन सा विकल्प होगा बेहतर

कमेटी तय करेगी कि भक्तों के ऑनलाइन निबंधन के लिए वेब पोर्टल और ऐप में कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा. मामले को लेकर समिति के अध्यक्ष केके खंडेलवाल की तरफ से एक बैठक की जा चुकी है. लेकिन कमेटी किसी फैसले तक नहीं पहुंची. बैठक के बाद कई तरह के सवाल उठे, जिसे देवघर और दुमका के डीसी को हल करने को कहा गया है. वहीं मंदिर खोलने का विरोध देवघर और बासुकीनाथ के पंडा समाज खुलकर कर रहे हैं.

जब स्पर्श ही नहीं तो दर्शन कैसा

इस मामले पर न्यूज विंग ने पंडा समाज के धर्मरक्षिणी सभा के महामंत्री कार्तिक नाथ पंडा से बात की. उन्होंने काफी विस्तृत रूप से चर्चा की. उन्होंने कहा कि देवघर का लोकल प्रशासन किसी को भी मंदिर में जाने से रोक रहा है. सिर्फ पूजन करने के लिए सुबह और शाम को कुछ पुरोहितों को मंदिर जाने की अनुमति दी गयी है. हमारे घर के लोग भी रोका जा रहा है. क्योंकि बीमारी ही ऐसी. संक्रमण बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा है. देवघर में ज्य़ोतिर्लिंग है, जिसकी महत्ता स्पर्श पूजन ही है.

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मंदिर खुलने की जो बात हो रही है, वो स्पर्श पूजन के लिए नहीं हो रही है. वो सिर्फ दर्शन के लिए हो रही है. उदाहरण महाकाल और दूसरे मंदिरों की दी जा रही है. लेकिन वहां की भौगोलिक स्थिति और यहां की भौगोलिक स्थिति में फर्क है. अगर देवघर खुलता है तो गर्भगृह के बाहर जो कुंड है वहीं से श्रद्धालु दर्शन कर वापस लौट जाएंगे. जिसका कोई तुर्क नहीं बनता है. दूसरी बात कि जिन्हें मंदिर खुलवाने यानी हमलोगों को लड़ना चाहिए वो मंदिर बंद रखने के लिए लड़ रहे हैं. और जिन्हें बंद रखने के लिए लड़ना चाहिए वो मंदिर खुलवाने के लिए लड़ रहे हैं.

देवघर और दुमका के पंडा समाज मंदिर खुलने का कर रहे विरोध

न्यूज विंग ने मामले पर समिति के अध्यक्ष और विकास आयुक्त केके खंडेलवाल से बात की. उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है. लेकिन वहां के पंडा समाज के लोग मंदिर नहीं खोलने के पक्ष में हैं. दरअसल संक्रमण की वजह से वो लोग डरे हुए हैं.

उनका कहना है कि मंदिर में सरकारी पूजा करने वाले ही प्रवेश करें. दूसरा कोई नहीं. मामले को लेकर एक बैठक की गयी है. लेकिन बैठक में किसी फैसले पर नहीं पहुंचा जा सका. देवघर और दुमका डीसी से मामले से जुड़े आंकड़े मांगे गए हैं. दोनों जिले के पंडा समाज मंदिर खोले जाने के पक्ष में नहीं हैं.

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