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सभा छोड़ जाने लगे लोग तो समय से पहले आ गयीं ममता, कहा- जब तक मैं बोलूं, कोई नहीं जायेगा

ममता के फरमान का कोई असर नहीं हुआ. तृणमूल कार्यकर्ता एक-एक कर उठने लगे और जनसभा मंच से दूर कोई विक्टोरिया मेमोरियल जा पहुंचा तो कोई चिड़ियाघर, कोई कालीघाट के लिए रवाना हुआ तो कोई जादू घर के लिए.

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Kolkata : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आह्वान पर धर्मतल्ला में रविवार को शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज्य भर से कार्यकर्ता पहुंचे थे लेकिन जनसभा शुरू होने के पहले ही लोग मंच के आसपास से उठकर जाने लगे थे.

परिस्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तय कार्यक्रम से पहले ही मंच पर आना पड़ा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को फरमान सुनाते हुए कहा कि जब तक मैं बोलूंगी, कोई यहां से नहीं जायेगा. जैसे ही मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत की उन्होंने कहा, “यहां जितने भी लोग आये हैं वह बहुत मुश्किल से पहुंच सके हैं. मैं उन सब का स्वागत करती हूं.”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि रेड रोड में दो से तीन लाख लोग खड़े हैं.उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे ब्रिगेड परेड मैदान की जनसभा हो रही है. ममता ने दावा किया कि इस बार भीड़ काफी अधिक है.

इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं को लक्ष्य कर कहा “जब तक मैं बोलूंगी, यहां से कोई नहीं जाएगा.” हालांकि ममता के फरमान का कोई असर नहीं हुआ. तृणमूल कार्यकर्ता एक-एक कर उठने लगे और जनसभा मंच से दूर कोई विक्टोरिया मेमोरियल जा पहुंचा तो कोई चिड़ियाघर, कोई कालीघाट के लिए रवाना हुआ तो कोई जादू घर के लिए.

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ममता की रैली में नहीं जुटी अपेक्षित भीड़

हर साल आयोजित होने वाले शहीद दिवस समारोह में इस बार बहुत अधिक भीड़ देखने को नहीं मिली. हालांकि रविवार को हुए इस आयोजन में सुबह से ही हावड़ा, सियालदह, कोलकाता, साल्टलेक, जादवपुर से रैली की शक्ल में हजारों तृणमूल कार्यकर्ता धर्मतल्ला में जनसभा मंच की ओर जरूर बढ़ रहे थे लेकिन हर साल होने वाली भीड़ की तुलना में इस बार संख्या कम थी.

अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल जब शहीद दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था तब सुबह आठ बजे से ही हावड़ा ब्रिज को बंद कर देना पड़ा था. इसके अलावा पूरे महानगर में जहां-तहां गाड़ियों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से बंद हो गयी थी लेकिन इस बार यातायात लगभग सामान्य रही. सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ दिख जरूर रही थी लेकिन संख्या उतनी अधिक नहीं थी.

खुद मुख्यमंत्री भीड़ कम होने को लेकर आशंकित थीं. शनिवार को जब वह जनसभा मंच का जायजा लेने पहुंची थी तब उन्होंने इसकी आशंका व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी शहीद दिवस कार्यक्रम को विफल करने के लिए साजिश रच रही है. इसके लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर रविवार को 30 प्रतिशत कम संख्या में ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है ताकि कम से कम लोग कोलकाता पहुंच सकें. इसके साथ ही ममता ने यह भी दावा किया था कि सोमवार से शुक्रवार के बीच अगर शहीद दिवस का कार्यक्रम पड़ता है तो लोग अपने दैनिक कार्यों, दफ्तर आदि के लिए घर से निकलते हैं और कार्यक्रम में भी शामिल होते हैं लेकिन इस बार रविवार छुट्टी का दिन होने की वजह से गरीब तबके के कार्यकर्ता केवल राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता नहीं आ सकेंगे. ऐसे में भीड़ कम होने की आशंका है.

रविवार को जब कार्यक्रम के लिए महानगर में लोग पहुंचने लगे तब ममता की आशंका सच साबित होती दिखी. हालांकि पार्टी नेताओं का दावा है कि भीड़ पिछले साल की तुलना में कम नहीं है लेकिन नगर में हर ओर यातायात का लगभग सामान्य रहना पार्टी नेताओं के इस दावे को गलत साबित कर रहा है.

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शहीद दिवस को शोक सभा और सर्कस कहने पर दिलिप घोष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ बांकुड़ा जिले में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. उन्होंने रविवार को कोलकाता के धर्मतल्ला में ममता बनर्जी के आह्वान पर आयोजित हुए शहीद दिवस कार्यक्रम को सर्कस और शोक सभा करार दिया था.

बांकुड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए घोष ने कहा था कि 21 जुलाई की सभा ममता बनर्जी का सर्कस है. इस बहाने वह शोक सभा करने जा रही हैं क्योंकि इस बार लोगों ने उन्हें करारी मात दी है.

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दरअसल 1993 में मतदाता पहचान पत्र की मांग पर ममता के नेतृत्व में हुए सचिवालय घेराव के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 लोग मारे गये थे. उसके बाद से आज तक हर साल ममता बनर्जी 21 जुलाई को शहीद दिवस के तौर पर मनाती हैं.

दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी का यह ड्रामा इस साल फ्लॉप हो जायेगा. बांकुड़ा में जनसभा को संबोधित करते हुए घोष ने कहा कि शहीद दिवस के कार्यक्रम में लोग ममता बनर्जी का ड्रामा और सर्कस देखने के लिए जायेंगे.

उन्होंने कहा कि लोकसभा में ममता जीत नहीं पाई है इसीलिए विजय उत्सव तो मना नहीं सकतीं. अब शहीद दिवस के बहाने शोक सभा मनाएंगी. उनके इसी बयान को लेकर बांकुड़ा जिला पुलिस ने हिंसा को भड़काने की कोशिश और भड़काऊ भाषण देने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है.

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इधर इस मामले में प्रतिक्रिया के लिए जब रविवार को दिलीप घोष से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल में हिम्मत है तो मेरे खिलाफ और 10 प्राथमिकी दर्ज करके दिखाये.मैं ममता बनर्जी की सरकार की इस तानाशाही का सामना कर लूंगा.

2021 में तृणमूल कांग्रेस साफ हो जायेगी : बाबुल

आसनसोल से सांसद और केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने रविवार को पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि 2021 में तृणमूल कांग्रेस साफ हो जायेगी.

सुप्रियो ने शहीद दिवस कार्यक्रम के पहले एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस हाफ हो चुकी है और 2021 में साफ हो जायेगी.

उल्लेखनीय है कि बाबुल सुप्रियो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगातार हमला करते रहे हैं. राज्य में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए वह ममता बनर्जी के हिंसक सोच को ही जिम्मेवार ठहराते रहे हैं.

पिछले महीने उन्होंने दावा किया था कि ममता बनर्जी की सरकार 2021 तक सत्ता में नहीं रह सकेगी. सुप्रियो ने कहा था कि स्वाभिमानी बंगाली समुदाय का सिर ममता बनर्जी की वजह से शर्म से झुक गया है.देश के किसी भी हिस्से में अथवा दुनिया भर में कहीं भी रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग ममता बनर्जी की वजह से शर्मिंदगी महसूस करते हैं क्योंकि राज्य में चारों ओर हिंसा का राज ममता ने स्थापित किया है. सुप्रियो के इस बयान के बाद तृणमूल ने दावा किया था कि भाजपा उनकी सरकार को गिराने की कोशिश में जुटी हुई है.

इसके पहले 13 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मुकुल रॉय ने भी कहा था कि तृणमूल कांग्रेस, माकपा और कांग्रेस के 107 विधायकों के संपर्क में हैं जो अगस्त महीने में पार्टी का दामन थाम लेंगे.

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