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क्या सरकार नहीं चाहती कि बने और धोनी? चार साल बीतने को है, फिर भी नहीं बन सकी खेल नीति

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Satya Prakash Prasad

Ranchi : एक वक्त वह भी आया था, जब झारखंड को लोग धोनी की वजह से पहचाना करते थे. दीपिका कुमारी, सुमराय टेटे, असुंता लकड़ा, सावित्री पूर्ति, बिगन सोय और न जाने कितने खिलाड़ियों की वजह से झारखंड का मान-सम्मान बढ़ा है. झारखंड में बनी हर सरकार कहती आयी है कि खेल के क्षेत्र में झारखंड को देश के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचाना है. लेकिन, सवाल है- कैसे. बीते चार साल में रघुवर सरकार की नीति को देखकर नहीं लगता है कि यह सरकार खेल और खिलाड़ियों के प्रति गंभीर है. इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि सरकार और सरकार के मंत्री चार साल में एक अदद खेल नीति नहीं तैयार कर सके. वह खाका सरकार नहीं खींच सकी, जिसकी वजह से झारखंड का नाम देश-विदेश में जाना जाता. सावल उठता है- क्यों. क्या सरकार नहीं चाहती कि झारखंड के खिलाड़ी बाकी राज्यों के खिलाड़ियों के जैसे अपना और राज्य का नाम ऊंचा कर सकें.

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2007 में बनी थी खेल नीति

झारखंड में 2007 में झारखंड खेल नीति बनी थी. इसके बाद से 11 वर्ष बीतने के बाद भी अभी तक राज्य सरकार झारखंड खेल नीति नहीं बना पायी है. खेल नीति नहीं बनने के कारण युवा खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर मिलने में कई सारी बधाएं आ रही हैं. वहीं, राज्य के माध्यमिक स्तर के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में खेल विषय को समाहित करने में स्कूल प्रबंधकों को भी परेशानी हो रही है.

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा रोजगार

झारखंड के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को खेल नीति नहीं बनने के कारण राज्य में रोजगार नहीं मिल रहा है. वे सरकार की उदासीनता के कारण स्वरोजगार करने को विवश हैं. राज्य के कई खिलाड़ी रोजगार नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.

सरकारी स्कूलों में नहीं हो रही खेल की पढ़ाई

झारखंड खेल नीति नहीं बनने के कारण राज्य के सभी स्कूलों में खेल को पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जा सका है, क्योंकि स्कूलों में खेल शिक्षकों का घोर अभाव है. खेल शिक्षकों के अभाव के कारण सरकारी स्कूल एवं कॉलेजों में खेल शिक्षकों को आउट सोर्सिंग करना पड़ रहा है, कई पुराने खिलाड़ियों एवं कोच के माध्यम से कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में युवाओं को खेल प्रशिक्षण देने का कार्य चल रहा है.

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क्या है खेल नीति का उद्देश्य

खेल नीति का उद्देश्य खेल को व्यापक बनाना है, अर्थात सभी के लिए खेल सुलभ करना है. खेल में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय श्रेष्ठता प्राप्त करना, माध्यमिक स्तर तक के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में खेल विषय को समाहित करना, खेल के क्षेत्र की उपलब्धियों को गरिमायुक्त रोजगार से जोड़ना, सुव्यवस्थित एवं सुसंगत ढंग से प्रतिभा का चयन एवं उस प्रतिभा को पूर्ण विकसित होने में सहयोग करना, विकलांग व्यक्तियों को विशेष छूट प्रदान करना, ताकि वे खेल एवं युवा कार्यकलापों में भाग लेने योग्य बन सकें.

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क्या कहते हैं विभाग के निदेशक

झारखंड सरकार के युवा एवं खेलकूद विभाग के निदेशक रणेंद्र ने कहा कि झारखंड खेल नीति बनकर तैयार है, इसके लिए विभाग ने राज्य के सभी जिलों का दौरा कर ड्राफ्ट तैयार किया है. सचिव एवं विभाग के मंत्री के माध्यम से जल्द ही इसे कैबिनेट में पास करा लिया जायेगा.

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