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जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखते सदर अस्पताल के डॉक्टर

जनस्वास्थ्य अभियान संघर्ष मोर्चा ने किया सदर अस्पताल का निरीक्षण

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  • सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया को देख खाना लेकर भागने लगे अस्पताल कर्मी

Ranchi: जनस्वास्थ्य अभियान संघर्ष मोर्चा की टीम ने सोमवार को सदर अस्पताल का निरीक्षण किया. सामाजिक कार्यकर्ता निरीक्षण कर ही रहे थे कि अस्पताल कर्मी मरीजों को खाना देने के लिए आये. लेकिन जैसे ही उन्होंने समाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया को देखा, खाना लेकर भागने लगे. सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया कार्यकर्ताओं ने अस्पताल कर्मियों का पीछा किया. तब जा कर कर्मी रुके. इस दौरान जब खाना की जांच की गई तो पाया गया कि दाल में पानी की मात्रा अधिक थी. वहीं सब्जी में पालक से अधिक आलू पाया गया. जब अस्पताल कर्मियों से इस संबध में बात की गयी, तो उन्होंने बताया कि हर सब्जी के साथ आलू दिया जाता है. ये मेन्यू में है.

जरूरी दवाइयों की है कमी

मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान विभिन्न वार्डों, जांच काउंटर,  डॉक्टर समेत नर्सों से बात कर जानकारी ली. जिसमें पाया गया कि दवाखाना में दवाइयों की कमी है. कई नर्सों ने भी बातचीत के दौरान बताया कि अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयों की कमी है. कैल्शियम तक की दवाई मरीजों को नहीं मिल पाती. एक इंजेक्शन लगाने के लिए महिलाओं को इधर से उधर भटकना पड़ता है.

जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखी जातीं

जब कार्यकर्ताओं ने ईएनटी चिकित्सक अंशु टोप्पो से पूछा कि क्या अस्पताल में जेनेरिक दवाइयां दी जाती हैं. कहा कि हर रसीद के में दोनों तरह की दवाइयों के नाम लिखे जाते हैं. तब कार्यकर्ताओं ने मरीजों के कुछ रसीद दिखाएं जिसमें कहीं भी जेनेरिक दवाई नहीं लिखी गयी थी. डॉक्टर ने कहा कि जिन दवाइयों की जेनेरिक दवाई संभव होती है, उन्हें लिखा जाता है.

स्टाफ की कमी के कारण मरीज होते हैं परेशान

मोर्चा के रतन तिर्की ने जानकारी दी कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था तो ठीक है. लेकिन महिलाओं और बच्चों से संबधित कई परेशानियां हैं. उन्होंने ने जानकारी दी कि मोर्चा के सदस्यों ने अस्पताल का निरीक्षण कर पाया कि कहीं भी सूचना पट्ट नहीं लगा है. जिससे मरीज अस्पताल इधर-उधर भटकते रहते हैं. महिलाओं के बैठने के लिए सही व्यवस्था नहीं है. गर्भवती महिलाएं यहां घंटों खड़ी रहती है. उन्होंने कहा कि मरीजों की लंबी कतार का सबसे मुख्य कारण पर्याप्त कर्मचारियों का न होना है.

24 स्थायी नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल

भले ही सदर अस्पताल को दो सौ बेड का कर दिया गया हो. लेकिन यहां स्थायी नर्सों की संख्या 24 है. वहीं अस्थायी नर्सों की संख्या 71 है. जिन्हें अस्पताल की स्थायी नर्सें ही प्रशिक्षण देती हैं. इस दौरान कई नर्सों ने बताया कि कर्मचारी की कमी के कारण काम सुचारू रूप से नहीं हो पाता.

सिविल सर्जन के समक्ष रखीं ये मांगें 

निरीक्षण के बाद कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन वीवी प्रसाद को कई दिशा निर्देश दिये. जिसमें महिला और पुरुष के लिए चार-चार काउंटर, जरूरी दवाइयों की पर्याप्त मात्रा अस्पताल में रखने, डॉक्टरों और जांचों की सार्वजनिक सूची मुख्य प्रवेश द्वार में लगाने, कर्मचारियों की कमी पूरा करने, बच्चा वार्ड में वार्मर की संख्या 8 से 16 करने,  अंडा, दूध की उपलब्धता,  किचन में स्टाफ की संख्या बढ़ाने समेत अन्य सलाह दिये गये.

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